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लगातार तुड़ाई से कमजोर हुई स्ट्रौबेरी की फसल को दोबारा कैसे करें तरोताजा?

स्ट्रौबेरी की फसल में 70 से 75 दिन का समय बेहद नाजुक, महत्वपूर्ण और सबसे अधिक रिटर्न देने वाला चरण होता है। इस अवस्था को फसल का ‘पीक बेयरिंग और हार्वेस्टिंग फेज़‘ कहा जाता है। इस समय तक पौधे में शुरुआती फलों की तुड़ाई (Harvesting) शुरू हो चुकी होती है और साथ ही आगे आने […]

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स्ट्रौबेरी प्रीमियम फल विकास, रंग और आकार के लिए पोषकतत्व प्रबंधन:

स्ट्रौबेरी की 40-45 दिन की अवस्था पौधे के जीवन में फल विकास (Fruit Development), रंगत और आकार बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इस समय पौधे पर फल तेजी से बड़े हो रहे होते हैं, इसलिए उन्हें संतुलित माईक्रोन्यूट्रिएंट्स, कैल्शियम और बोरान की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, इस अवस्था में सही […]

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सफेद जड़ों के विकास और संतुलित बढ़वार के लिए खाद एवं स्प्रे शेड्यूल

स्ट्रौबेरी की खेती में रोपाई के बाद का 12वां दिन पौधे के जीवन का एक बेहद नाजुक और निर्णायक मोड़ होता है। इस चरण तक पौधा रोपाई के शुरुआती तनाव (Transplant Shock) से बाहर निकल रहा होता है और उसे अपनी जमीन में जड़ें जमाने तथा नई शाखाएं निकालने के लिए सबसे ज्यादा ऊर्जा और […]

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मजबूत जड़ और तने के विकास लिए केले में 10वें दिन का मैनेजमेंट

केले की फसल में रोपाई के बाद 10वें दिन दी जाने वाली यह ड्रेंचिंग खुराक पौधे की शुरुआती स्थापना, वृद्धि और सुरक्षा के लिए बहुत ही प्रभावी है। इससे जड़, नए पत्तों के विकास और तने पर यह बहुत ही कारगर है: बेरी 48 ( IPE Technology युक्त 14:48:00 ) जड़ पर काम: इसमें फास्फोरस […]

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मक्का खरपतवार तनाव और ग्रोथ बढ़ाने के लिए..

मक्के की फसल में 25 से 30 दिन की अवस्था को सबसे महत्वपूर्ण या ‘क्रिटिकल स्टेज’ माना जाता है। इस समय मक्के का पौधा ‘ग्रोथ फेज’ से निकलकर ‘रीप्रोडक्टिव फेज’ तयारी कर रहा होता है। यह कोम्बिनेशन (बायो 20, किंगफोल जिंक 70 और हेनीग सोल्युशन 11:44:11) को मक्के की इस अवस्था में देने से फसल […]

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मका जिंक बीजोपचार..

जिंक (Zn) का बीज के अंकुरण और शुरुआती फुटाव के साथ एक बहुत गहरा संबंध है। जिंक से अंकुरण और फुटाव अच्छा होता है, इसके पीछे मुख्य रूप से हार्मोन्स और एन्जाईम्स का महत्वपूर्ण कोम्बीनेशन होता है। जिंक कैसे काम करता है? जिंक और ‘औक्सिन’ (Auxin) हार्मोन का संबंध जिंक की सबसे बड़ी भूमिका ‘इंडोल […]

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8. कपास 90 दिन की अवस्था

कपास की फसल जब 90 दिन से आगे (परिपक्वता अवस्था) निकलती है, तब पौधे का मुख्य उद्देश्य फुलों को सुरक्षित रखना, टिंडों (Bolls) का आकार बढ़ाना और वजन देना होता है। इस अवस्था में छिड़काव और ड्रिप का संयोजन बेहद जरुरी हो जाता है। 1. सिक्वेन्शियल 2: (10:20:40 + मैग्नीशियम + सुक्ष्मपोषकतत्व) जब आप पत्तियों […]

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3. कपास की 25 से 45 दिन की अवस्था

कपास की 25 से 45 दिन की अवस्था फसल के लिए बहुत ही नाजुक और महत्वपूर्ण होती है। इस समय पौधे में वानस्पतिक वृद्धि के साथ-साथ फुल की कलियां (Squares) बनने और फूल आने की शुरुआत होती है। स्प्रिंजल मिक्स NPK 11:10:17, कैल्शियम 13%, मैग्नीशियम (MgO 2%) और सुक्ष्मपोषकतत्व का इस अवस्था में बहुत बड़ा महत्व […]

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1. कपास: खाद के साथ कोटिंग की तकनीक और फायदे

मिट्टी में खाद डालने से पहले उसे सही उत्पादों के साथ कोट (Coating) करना खेती की एक बहुत ही वैज्ञानिक और असरदार विधि है। इससे खाद का पूरा फायदा पौधे को मिलता है और जमीन में खाद खराब (Fix या Leach) नहीं होती है। जब आप खाद को कोट करते हैं, तो खाद के हर […]

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6. गेहू: परिक्वता अवस्था

फसल की परिपक्वता अवस्था (Maturation / Grain Filling Stage) में पौधे का मुख्य उद्देश्य पत्तियों (विशेषकर झंडा पत्ती) द्वारा बनाए गए भोजन को तेजी से बालियों या दानों तक पहुंचाना होता है ताकि दाने पूरी तरह से वजनदार, ठोस और चमकदार बन सकें। सिक्वेन्शियल-2 (Sequential-2: 10:20:40 + Mg + सुक्ष्मपोषकतत्व) का स्प्रे और जमीन से […]

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