मका जिंक बीजोपचार..

जिंक (Zn) का बीज के अंकुरण और शुरुआती फुटाव के साथ एक बहुत गहरा संबंध है। जिंक से अंकुरण और फुटाव अच्छा होता है, इसके पीछे मुख्य रूप से हार्मोन्स और एन्जाईम्स का महत्वपूर्ण कोम्बीनेशन होता है।

जिंक कैसे काम करता है?

  1. जिंक और ‘औक्सिन’ (Auxin) हार्मोन का संबंध

जिंक की सबसे बड़ी भूमिका ‘इंडोल एसिटिक एसिड’ (IAA) के निर्माण में है, जिसे हम ‘औक्सिन’ हार्मोन कहते हैं।

  • अंकुरण में: जब बीज जमीन के अंदर होता है, तो उसे बढ़ने के लिए इस हार्मोन की अत्यधिक आवश्यकता होती है। जिंक इस हार्मोन को बनाने वाला मुख्य कारक (Precursor) है।
  • फायदा: पर्याप्त मात्रा में जिंक होने पर बीज के अंदर का भ्रूण (Embryo) तेजी से सक्रिय होता है, जिससे अंकुरण जल्दी और स्वस्थ होता है।
  1. पानी में जिंक की उपलब्धता और अंकुरण

ज्यादा पानी (नमी) में अंकुरण और फुटाव बेहतर होने के दो मुख्य कारण हैं:

  • घुलनशीलता: जब मिट्टी में अच्छी नमी होती है, तो जिंक पानी में घुलकर जड़ों या बीज के छिद्रों तक आसानी से पहुँच जाता है।
  • कोशिका विस्तार (Cell Expansion): नमी के साथ मिलकर जिंक कोशिकाओं को खींचने (Elongation) का काम करता है। बिना पानी के जिंक सक्रिय नहीं हो पाता, जिससे अंकुरण धीमा हो जाता है।
  1. फुटाव (Tillering/Branching) में भूमिका
  • इंटरनोड की लंबाई: जिंक दो गांठों (Nodes) के बीच की दूरी को संतुलित रखता है। यदि जिंक की कमी हो, तो पौधा ‘बौना’ रह जाता है और उचित फुटाव नहीं कर पाता।
  • प्रोटीन संश्लेषण: जिंक 300 से ज्यादा एन्जाईम्स को सक्रिय करता है जो प्रोटीन निर्माण में मदद करते हैं। अधिक प्रोटीन का अर्थ है अधिक नई कोशिकाएं, जिससे कल्ले/फुटाव ज्यादा निकलते हैं।
  1. एन्जाईमों की सक्रियता

बीज के अंदर संचित भोजन (Starch) को अंकुरण के समय शुगर (शर्करा) में बदलना आवश्यक होता है ताकि नन्हा पौधा उसे ग्रहण कर सके। जिंक उन विशिष्ट एन्जाईम्स को सक्रिय करता है जो इस स्टार्च को ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।

मिट्टी में पानी का अत्यधिक भराव और जिंक की सुरक्षा

जब खेत में पानी का भराव अधिक होता है, तो सबसे बड़ी समस्या औक्सीजन की कमी की होती है। ऐसी स्थिति में मिट्टी “Anoxic” (औक्सीजन रहित) हो जाती है, जिससे जड़ें सांस नहीं ले पातीं और पोषक तत्वों को सोखना बंद कर देती हैं। इस कठिन परिस्थिति में जिंक निम्नलिखित कार्य करता है:

  • औक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव (Antioxidant Defense): पानी भरने पर पौधे के अंदर “Reactive Oxygen Species” (ROS) नामक जहरीले तत्व बनने लगते हैं जो कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। जिंक एक ‘एंटी-औक्सीडेंट’ के रूप में कार्य करते हुए ‘Superoxide Dismutase’ (SOD) जैसे एन्जाईम्स को सक्रिय करता है, जो इन जहरीले तत्वों को समाप्त कर कोशिकाओं की रक्षा करते हैं। इससे पौधा लंबे समय तक जीवित रहता है।
  • इथेनोल टोक्सिसिटी को कम करना: औक्सीजन न मिलने पर जड़ें “Anaerobic Respiration” (बिना हवा के श्वसन) शुरू कर देती हैं, जिससे जड़ों में इथेनॉल (शराब जैसा हानिकारक तत्व) बनने लगता है जो जड़ों को सड़ा देता है। जिंक ‘Alcohol Dehydrogenase’ एन्जाईम का मुख्य हिस्सा है, जो इस जहरीले इथेनॉल को कम हानिकारक तत्वों में बदलता है। इससे जड़ें सड़ने से बच जाती हैं।
  • रंध्रों का नियंत्रण (Stomatal Regulation): जलभराव की स्थिति में पौधा पत्तियों के स्टोमाटा (Stomata) बंद कर लेता है। जिंक और पोटाश मिलकर रंध्रों को सही समय पर खोलने और बंद करने का संकेत देते हैं, जिससे पौधा जलभराव के बावजूद मुरझाता (Wilting) नहीं है।

मात्रा :

  • किंगफोल जिंक 70: 2 मिली प्रति किलो बीज

zinc

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