तरबूज की 18-20 दिन की अवस्था वह समय है जब बेल पर कुछ-कुछ जगह पर पहली बार कलियां दिखाई देने लगती हैं। इस नाजुक मोड़ पर कैल्शियम (Ca) और बोरान (B) की भूमिका महत्वपूर्ण है।
1. कैल्शियम की भूमिका:
कैल्शियम पौधे की कोशिका भित्ति (Cell Wall) का मुख्य घटक है। 18-20 दिन पर इसकी कमी पूरी फसल को कमजोर कर सकती है।
- कोशिका विभाजन: इस समय बेल हर रोज कुछ इंच बढ़ती है। कैल्शियम नई कोशिकाओं के निर्माण की गति को तेज करता है।
- तने की मजबूती: यह मुख्य बेल और शाखाओं को मोटा और मजबूत बनाता है, जिससे भविष्य में भारी तरबूज लगने पर बेल फटती या टूटती नहीं है।
- रोगप्रतिरोधक क्षमता: मजबूत कोशिका भित्ति होने के कारण फफूंद (Fungi) और कीट आसानी से पौधे के अंदर प्रवेश नहीं कर पाते।
- जड़ों का सिरा (Root Tips): सफेद जड़ों के आगे के हिस्सों को जीवित रखने के लिए कैल्शियम अनिवार्य है।
2. बोरान (Boron) की भूमिका: “गुणवत्ता और सैटिंग”
बोरोन के बिना कैल्शियम अपना काम पूरी तरह नहीं कर पाता।
कैल्शियम का अवशोषण: बोरान मिट्टी से कैल्शियम को उठाकर पौधे के ऊपरी हिस्सों (Tops) तक पहुँचाने में मदद करता है।
- फूलों की शुरुआत: 18-20 दिन पर सूक्ष्म रूप से फूलों की कलियां बनने लगती हैं। बोरान मादा फूलों (Female Flowers) की संख्या बढ़ाने और उन्हें झड़ने से रोकने के लिए जिम्मेदार है।
- परागण (Pollination) की तैयारी: यह ‘पोलन ट्यूब’ के विकास के लिए जरूरी है, जिससे आगे चलकर फल की सैटिंग अच्छी होती है।
- शर्करा का संचारण: यह पौधे के पत्तों में बनी शुगर को जड़ों और बढ़ती हुई बेल तक पहुँचाता है।
स्प्रे
- सीए + बी – 2 मिली प्रती लिटर पानी
जमीन से:
- मार्क सोल्युशन – 5 किलो प्रती एकड़
(इसके अलावा जमीन से 250 ग्राम बोरान देना और फायदेमंद रहेगा)



