तरबूज में फल साइज की शुरुआती अवस्था (जब फल नींबू के आकार का हो रहा हो) कोशिका विभाजन (Cell Division) बहुत तेजी से होता है। यदि इस समय सही पोषण मिल जाए, तो फल का अंतिम वजन और आकार दोनों बहुत शानदार मिलते हैं। नहीं तो तरबूज के फलों का साईज छोटा-बड़ा (असमान) मिलता है या आप उन्हें एकसमान (Uniform) और तेजी से बढ़ाना चाहते हैं, तो इस समय पोटैशियम (K) और कैल्शियम (Ca) का मैनेजमेंट सबसे ज्यादा जरूरी है।
1. फास्फोरस – फूल से फल बनने की प्रक्रिया में पौधे को अत्यधिक ऊर्जा (ATP के रूप में) चाहिए। फास्फोरस इस ऊर्जा का पावरहाउस है। यह सुनिश्चित करता है कि फल सैट होते समय पीला होकर गिरे नहीं। इसके लिए कम नाईट्रोजन युक्त खाद जिसमे फास्फोरस है जैसे की लिबीग(6:24:36:+Mg) देना फायदेमंद है।
2. कैल्शियम – कैल्शियम कोशिका विभाजन (Cell Division) का आधार है। फल की बाहरी दिवार कितनी मजबूत होगी, यह कैल्शियम तय करता है। यह फल को सुंदर आकार देता है और भविष्य में फल के फटने (Cracking) की समस्या को खत्म करता है। इसके लिए जमीन से फास्फोरस युक्त खाद दिए जाते है तो स्प्रे से कैलमेक्स गोल्ड दे। यह कोशिकओंको जोड़ने वाले कैल्शियम पेक्टेट का निर्माण करता है इससे फुल नही गिरते और सैटिंग अच्छी मिलती है
3. पोटाश – पोटाश पत्तों में बननेवाले भोजन (कार्बोहाईड्रेट) को खींचकर छोटे फल तक पहुँचाता है इसे सोर्स सिंक रिलेशनशिप कहते है । जिसमे पत्ता सोर्स का काम करता है और फल सिंक का काम करता है । यह फल के ‘सेल’ के अंदर पानी के दबाव को भी बनाएं रखता है, जिससे फल का साईज तेजी से बढ़ता है और उसमें चमक आती है। इसके लिए कम नाईट्रोजन युक्त खाद जिसमे पोटाश है जैसे की वीगर का आयपीई लिबीग खाद देना फायदेमंद है और बाद में 13:00:45 दे (सैटिंग के तुरंत बाद)।
4. सुक्ष्म या अन्य पोषकतत्व (Micronutrients) –
सेटिंग अवस्था में इनकी भी भूमिका महत्वपूर्ण है।
• बोरान : यह कैल्शियम का साथी है । मतलब कैल्शियम शोषण में मदद करता है। बोरान के बिना परागण अधूरा रहता है और फल टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं।
• जिंक : यह प्राकृतिक हार्मोन (औक्सिन) बनाता है और कोशिका विभाजन करता है, जो फल की लंबाई और चौड़ाई बढ़ाने में मदद करता है।
• मैग्नीशियम : पत्तों को हरा रखता है ताकि फल को पोषण के लिए पर्याप्त भोजन बनता रहे जो बाद में पोटाश फल में लाने का काम करता है ।
स्प्रे
• कैलमेक्स गोल्ड : 2 मिली प्रती लिटर पानी
• डीपी 98 : 2 मिली प्रती लिटर पानी
जमीन से:
• ओनिल / लिबीग – 4 किलो प्रती एकड़
(इस अवस्था में नाईट्रोजन का प्रयोग कम करें । इस समय ज्यादा नाईट्रोजन देने से बेल गहरी हरी होकर वृद्धी की और रुख करेगी और छोटे फल गिर जाएंगे। सारा ध्यान P, K, Ca और B पोषकतत्व पूर्ति पर रखें।)



