मिट्टी में खाद डालने से पहले उसे सही उत्पादों के साथ कोट (Coating) करना खेती की एक बहुत ही वैज्ञानिक और असरदार विधि है। इससे खाद का पूरा फायदा पौधे को मिलता है और जमीन में खाद खराब (Fix या Leach) नहीं होती है। जब आप खाद को कोट करते हैं, तो खाद के हर एक दाने पर सुरक्षा कवच और पोषक तत्वों की परत चढ़ जाती है।
हेनीग सोल्युशन (11:44:11 – IPE टेक्नोलॉजी) और किंगफोल जिंक 70 : के साथ खाद की कोटिंग करने की पूरी प्रक्रिया, विज्ञान और इसके विस्तृत फायदों को नीचे विस्तार से समझें:
हेनीग सोल्युशन (11:44:11 with IPE Technology): 3 किलो प्रती एकड़
- IPE टेक्नोलॉजी (Van Iperan):
- फास्फोरस फिक्शेशन रोकना (Preventing Phosphorus Fixation): सामान्यतः जब हम मिट्टी में डीएपी या फास्फोरसयुक्त खाद डालते हैं, तो मिट्टी में मौजूद कैल्शियम, आयरन या एल्युमिनियम के साथ मिलकर फास्फोरस बंध जाता है (Lock हो जाता है)। इसे ‘फिक्शेशन’ कहते हैं। इसके कारण 70% से ज्यादा फास्फोरस पौधों को मिल ही नहीं पाता।
- IPE तकनीक फास्फोरस को मिट्टी में लॉक होने से रोकती है। यह उसे लंबे समय तक ऐसे रूप में रखती है जिसे पौधे की जड़ें आसानी से शोषण कर सकें।
- नाईट्रोजन और पोटाश का साथ: इसमें मौजूद 11% नाईट्रोजन और 11% पोटाश शुरुआती और वानस्पतिक विकास के लिए पौधे को संतुलित ऊर्जा देते हैं।
किंगफोल जिंक 70 – 100 मिली प्रती एकड़
- जिंक की भूमिका: जिंक बैंगन की फसल के लिए एक अनिवार्य माइक्रोन्यूट्रिएंट है। यह पौधों में औक्सिन (Auxin) हॉर्मोन के निर्माण में मदद करता है, जो पत्तियों और तनों की बढ़वार के लिए जरूरी है।
- खाद के साथ तालमेल: जब जिंक को यूरिया या डीएपी के दानों पर कोट किया जाता है, तो यह मिट्टी में एकसमान रूप से फैलता है। पौधे की जड़ें जहां से भी खाद लेती हैं, उन्हें साथ में जिंक भी मिल जाता है।
कोटिंग करने से होने वाले मुख्य लाभ:
- नाईट्रोजन की लीचिंग (Leaching) रोकना: सादा युरिया पानी के संपर्क में आते ही बहुत तेजी से घुलता है और पानी के साथ रिसकर (Leach होकर) जमीन के बहुत नीचे चला जाता है, जहां पौधे की जड़ें नहीं पहुंच पातीं। कोटिंग करने से यूरिया का विघटन धीमा (Slow Release) हो जाता है, जिससे पौधे को लंबे समय तक लगातार नाइट्रोजन मिलती रहती है और खाद बहकर बर्बाद नहीं होती।
- खाद की कार्यक्षमता (Efficiency) में 30-40% की वृद्धि: कम खाद में भी आपको ज्यादा बेहतर परिणाम मिलते हैं, क्योंकि खाद का एक-एक दाना पौधे के काम आता है, जमीन में बेकार नहीं होता।
- जड़ों का भारी विकास (Root Proliferation): फास्फोरस और जिंक जब एक साथ जड़ों के पास धीमी गति से मिलते हैं, तो की प्राथमिक और द्वितीयक जड़ें बहुत तेजी से फैलती हैं, जिससे पौधे की मिट्टी में पकड़ मजबूत होती है।
कोटिंग करने की सही विधि:
- यूरिया या डीएपी या अन्य खाद को फर्श या पॉलीथिन पर फैलाएं।
- तय मात्रा में हेनीग सोल्युशन (11:44:11) और किंगफोल जिंक 70 को थोड़े से पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
- इसे अच्छी तरह से मिला लें (कोट कर लें) ताकि हर दाने पर लेप चढ़ जाए। (इसे आप मशीन जिससे बीज प्रक्रिया करते है या हाथ से भी मिलाकर कर सकते है)
- कोटिंग करने के बाद इसे थोड़ी देर छांव में सुखा लें और फिर खेत में उपयोग करें।
मात्रा:
- हेनीग सोल्युशन (11:44:11 with IPE Technology): 3 किलो प्रती एकड़
- किंगफोल जिंक 70 – 250 मिली प्रती एकड़
इन दोनों के साथ एकड़ की देने वाली यूरिया या डीएपी खाद



