पत्तागोभी और फूलगोभी की रोपाई के 55 से 60 दिन की अवस्था को वैज्ञानिक भाषा में “पीक कर्ड / हेड डेवलपमेंट स्टेज” (Peak Curd/Head Development Stage) यानी फूल और गड्डे के तेजी से फूलने और वजन पकड़ने की अवस्था कहा जाता है।
इस समय पौधे को अपनी पत्तियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत नहीं होती, बल्कि पत्तियों में पहले से जमा सारे भोजन को खींचकर फूल और गड्डे के अंदर डालना होता है। इस अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण में सिक्वेन्शियल –2 का छिड़काव और जमीन से जेरार्ड सोल्युशन (5:08:40+ मैग्नीशियम और सल्फर) देना आपकी फसल का आकार और वजन दोनों को दोगुना कर सकता है।
- छिड़काव: सिक्वेन्शियल –2 (10:20:40 + सुक्ष्मपोषकतत्व)
55-60 दिन पर गोभी का आकार (Size) बढ़ना शुरू हो जाता है। इस समय पत्तियों के ऊपर सिक्वेन्शियल -2 का स्प्रे सीधे फूल और गड्डे के सेल स्ट्रक्चर (कोशिका संरचना) को प्रभावित करता है:
- पोटैशियम (40%) साईज और ठोसपन : इस ग्रेड में पोटैशियम की मात्रा सबसे अधिक है। पोटैशियम का मुख्य काम होता है पत्तियों में बने कार्बोहाइड्रेट, स्टार्च और शुगर को तेजी से ‘पम्प’ करके फूलगोभी के फूल और पत्तागोभी के गद्दे में भेजना। इससे कोशिकाएं फूलती हैं, जिससे फूल और गड्डे का व्यास (Diameter/Size) अचानक बढ़ता है और वह अंदर से बिल्कुल ठोस (Heavy & Compact) बनते हैं।
- फॉस्फोरस (20%) – निरंतर ऊर्जा: यद्यपि मुख्य फास्फोरस शुरुआती अवस्था में चाहिए होता है, लेकिन इस अंतिम चरण में 20% फास्फोरस पौधे के भीतर एटीपी (ATP) के रूप में ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखता है, जिससे भोजन ट्रांसफर करने की प्रक्रिया थमती नहीं है।
- नाईट्रोजन (10%) – पत्तियों को सुखाने से बचाना: यहाँ केवल 10% नाईट्रोजन है, जो बहुत जरूरी है। यह पौधे को अतिरिक्त शाकाहारी वृद्धि (Vegetative growth) तो नहीं करने देता, लेकिन बाहरी बड़ी पत्तियों को तब तक हरा-भरा रखता है जब तक कि फूल पूरी तरह पक न जाए।
- सुक्ष्मपोषकतत्व (Chelated Micronutrients): इसमें मौजूद सुक्ष्म पोषक तत्व (जैसे जिंक, बोरान, आयरन आदि) यह सुनिश्चित करते हैं कि फूल का आकार बढ़ने के दौरान उसमें कहीं से भी विकृति (जैसे फूल का फटना या ढीला होना) न आए।
- जमीन से: जेरार्ड सोल्युशन (5:08:40 + मैग्नीशियम + सल्फर)
जमीन से दिया जाने वाला यह कोम्बिनेशन इस अवस्था के लिए “मास्टरस्ट्रोक” साबित होता है, क्योंकि गोभी वर्गीय फसलों को सल्फर और मैग्नीशियम की भारी मात्रा में आवश्यकता होती है।
सल्फर (Sulphur) का असर
गोभी वर्गीय (Cruciferous) फसलें अपने तीखे स्वाद और विशेष सुगंध के लिए जानी जाती हैं, जो सल्फर के कारण होती है।
- गुणवत्ता और चमक: सल्फर प्रोटीन के निर्माण में मदद करता है। यह फूलगोभी के फूल को कड़क रखता है, जिससे वह कटाई के बाद दूर मंडियों में भेजने पर भी बिखरता नहीं है।
- पत्तागोभी का कसाव: पत्तागोभी में पत्तियां एक-दूसरे के ऊपर इतनी मजबूती से चिपक जाती हैं कि गद्दे को दबाने पर भी वह दबता नहीं है।
मैग्नीशियम का असर
मैग्नीशियम पत्तियों की ‘क्लोरोफिल फैक्ट्री’ को चालू रखता है। इस समय नीचे की पुरानी पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगती हैं, मैग्नीशियम इस पीलेपन को रोकता है ताकि पौधा आखिरी दिन तक फूल को बड़ा करने के लिए भोजन बनाता रहे।
5:08:40 का असर
जमीन से जब 40% पोटैशियम जड़ों को मिलता है, तो यह पौधे के वाटर-मैनेजमेंट (Water regulation) को सुधारता है। गोभी के फूल में लगभग 90% से अधिक पानी और फाइबर होता है। पोटैशियम जड़ों के जरिए पानी को खींचकर फूल में स्टोर करता है, जिससे फूल का वजन (Single Head/Curd Weight) 20 से 25% तक बढ़ जाता है।
गड्डे और फूल के साइज पर कुल मिलाकर क्या बदलाव दिखेगा?
यदि आप 55-60 दिन पर यह ट्रीटमेंट करते हैं, तो अगले 7 से 10 दिनों के भीतर आपको खेत में निम्नलिखित प्रत्यक्ष लाभ दिखाई देंगे:
- सफेदी और बाजार भाव : फूलगोभी का फूल बिल्कुल मलाईदार सफेद (Milky White) निकलेगा, जिस पर पीलापन नहीं होगा। बाजार में ऐसी गोभी सबसे पहले और ऊंचे दामों पर बिकती है।
- समान आकार (Uniform Harvesting): कई बार खेत में कुछ गोभी बड़ी और कुछ छोटी रह जाती हैं। यह कोम्बिनेशन पूरे खेत की गोभी को एक समान साइज (Uniformity) देता है, जिससे एक साथ पूरी फसल की कटाई की जा सकती है।
- लॉन्ग डिस्टेंस ट्रांसपोर्ट (Shelf Life): पोटैशियम और सल्फर के कारण गोभी की ‘शेड्फ लाइफ’ बढ़ जाती है। तोड़ने के 2-3 दिन बाद भी फूल मुरझाएगा नहीं और पत्तागोभी के गद्दे ढीले नहीं पड़ेंगे।
मात्रा (प्रति लीटर पानी):
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- सिक्वेन्शियल –2: 2 मिली
जमीन से,
- जेरार्ड सोल्युशन: 3 किलो प्रती एकड


