16-17 दिन की यह अवस्था वास्तव में तरबूज की फसल का “टर्निंग पॉइंट” है, जहाँ पौधा अपनी वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative growth) को प्रजनन अवस्था (Reproductive stage) यानी फूलों की तैयारी से जोड़ता है।
इस समय नाईट्रोजन (N) और फास्फोरस (P) के संतुलन की भूमिका और साथ में सुक्ष्मपोषकतत्वो की भूमिका सबसे प्रमुख होती है:
1. बेरी 48 (14:48:00 + Magnesium) की भूमिका
यह एक आयपीई फास्फोरस वाला ग्रेड है जो इस समय “फाउंडेशन” का काम करता है:
- 14% नाईट्रोजन: यह बेल को अचानक से बहुत ज्यादा कोमल बनाए बिना एक नियंत्रित बढोतरी देता है। इससे तना मोटा होता है, लंबा और कमजोर नहीं।
- 48% फास्फोरस: जैसा कि आपने कहा, यह फूलों के ‘नोड्स’ (जहाँ से फूल निकलते हैं) को विकसित करता है। यह जड़ों को इतनी गहराई तक ले जाता है कि पौधा भारी फल का वजन आसानी से झेल सके।
- मैग्नीशियम (Mg): यह ‘बेरी 48’ का प्लस पॉइंट है। यह पत्तों के क्लोरोफिल को बढ़ाता है, जिससे स्प्रे किए गए पोषकतत्वों का अवशोषण (Uptake) और भी तेज हो जाता है।
2. लिपमैन कोम्बी (सूक्ष्मपोषकतत्व) की भूमिका
जमीन से दिए जाने वाले लिपमैन कोम्बी (500 ग्राम/एकड़) में मौजूद सूक्ष्मपोषकतत्व (Zinc, Fe, Mn, B, Cu, Mo) इस समय उत्प्रेरक का काम करते हैं:
- जिंक (Zn): यह पौधों में ‘औक्सिन’ हार्मोन बनाता है, जिससे बेल की लंबाई बढ़ती है और पत्तों का आकार बड़ा होता है।
- लोहा (Fe) और मैंगनीज (Mn): ये दोनों मिलकर मैग्नीशियम की मदद करते हैं ताकि पौधा भरपूर भोजन बना सके और 16-17 दिन की क्रिटिकल स्टेज पर पीला न पड़े।
- बोरान (B): यह सबसे महत्वपूर्ण है। यह कैल्शियम के साथ मिलकर नई कलियों (Flower buds) के निर्माण की नींव रखता है। बोरान के बिना फूल झड़ने की समस्या शुरू हो सकती है।
- मोलिब्डेनम (Mo): यह नाईट्रोजन के उपयोग को कुशल बनाता है, जिससे पौधा ‘लश ग्रीन’ (गहरा हरा) बना रहता है।
स्प्रे:
- डीपी 98: यह फास्फोरस का एक बहुत ही गतिशील (Mobile) रूप है जो स्प्रे के तुरंत बाद सक्रिय हो जाता है।
- माईक्रोमैक्स : यह पत्तों के माध्यम से सूक्ष्मपोषकतत्वों की कमी को तुरंत पूरा करता है, जिससे पौधे की ‘इम्युनिटी’ (रोगप्रतिरोधशक्ती) बढ़ती है।
स्प्रे
- डीपी 98 – 2 मिली प्रती लिटर पानी
- माईक्रोमैक्स 70 – 1 मिली प्रती लिटर पानी
जमीन से:
- बेरी 48 – 3 किलो प्रती एकड़
- लिपमैन कोम्बी – 500 ग्राम प्रती एकड़



