दाने भरने के समय सही पोषण का महत्व

सोयाबीन चौथा स्प्रे: 70-75 दिन दाने भरने की अवस्था

सोयाबीन की 70-75 दिन की अवस्था (Grain Filling Stage) फसल का आखरी चरन होता है । इस समय किसान की सारी मेहनत का फल दानों के वजन और चमक के रूप में मिलता है। इस अवस्था में सिक्वेन्शियल-2 (10:20:40 + सुक्ष्मपोषकतत्व) का उपयोग करना बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है।

  1. 10:20:40 (सिक्वेन्शियल–2 ) का पावरफुल कॉम्बिनेशन

इस अवस्था में पौधे को अब नई पत्तियां या शाखाएं नहीं बनानी हैं, बल्कि सारा ध्यान “भोजन के ट्रांसफर” पर है।

  • 40% पोटाश (High Potash): यह इस खाद का सबसे मुख्य हिस्सा है। 70-75 दिन पर पोटाश दानों के अंदर स्टार्च और तेल के निर्माण को तेज करता है। यह पत्तियों में जमा सारा “कार्बोहाइड्रेट” निचोड़कर दानों में भेज देता है, जिससे दाने ठोस, वजनदार और चमकदार बनते हैं।
  • 20% फास्फोरस (Phosphorus): यह दानों के पकने (Maturation) की प्रक्रिया को एक समान (Uniform) बनाता है। इससे ऐसा नहीं होता कि कुछ फलियां पक गई और कुछ हरी रह गईं।
  • 10% नाईट्रोजन (Nitrogen): इस अंतिम समय में हल्की नाईट्रोजन पत्तियों को “असमय सूखने” (Leaf Senescence) से बचाती है। अगर पत्तियां हरी रहेंगी, तभी वे अंत तक दानों को भोजन दे पाएंगी।
  1. सुक्ष्मपोषकतत्वों (Micronutrients) की भूमिका

सिक्वेन्शियल-2 में मौजूद सूक्ष्म पोषक तत्व इस समय क्वालिटी कंट्रोलर का काम करते हैं:

  • बोरान: दानों के फटने (Grain Cracking) को रोकता है और उनकी झिल्ली को मजबूत बनाता है।
  • जिंक: दानों के आकार को एक समान रखने में मदद करता है।
  1. सिक्वेन्शियल-2 दानों के विकास में कैसे मदद करेगा

वजन में वृद्धि (Test Weight): दानों का घनत्व (Density) बढ़ता है। इससे जब आप सोयाबीन मंडी ले जाते हैं, तो उसका वजन सामान्य से 5-10% अधिक निकलता है।

  1. चमक और रंग: पोटैशियम के प्रभाव से दानों पर एक प्राकृतिक पीली चमक आती है, जिससे बाजार में भाव अच्छा मिलता है।
  2. तेल की मात्रा: सोयाबीन एक तिलहन फसल है। इस स्प्रे से दानों में तेल का प्रतिशत बढ़ता है।
  3. रोग प्रतिरोधकता: इस अवस्था में यदि नमी कम हो जाए या तापमान बढ़ जाए, तो उच्च पोटाश पौधे को सूखने से बचाता है।

         4. मात्रा:

  • सिक्वेन्शियल-2: 2 मिली प्रती लीटर पानी
  1. कीट प्रबंधन और सावधानी (Crucial Advice)

जैसा कि आपने पहले उल्लेख किया था, इस अवस्था में फली छेदक (Pod Borer) का खतरा बना रहता है। यदि इस समय इल्ली दानों को कुतर दे, तो सिक्वेंशियल-2 का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।

  • कीटनाशक: यदि इल्लियां दिखें, तो Spinetoram या फ्लूबेंडियामाइड जैसी हल्की लेकिन प्रभावी दवाओं का उपयोग करें जो दानों की गुणवत्ता पर असर न डालें।
  • स्प्रे का समय: हमेशा शाम के समय छिड़काव करें।
  • पानी की मात्रा: इस समय सोयाबीन का झाड़ (Canopy) बहुत घना होता है, इसलिए प्रति एकड़ कम से कम 200 लीटर पानी का उपयोग करें ताकि दवा नीचे की फलियों तक भी पहुँचे।

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