आलू की फसल के लिए अंकुरण के 55 दिन बाद का समय यानी ‘कंद फुलाव (Tuber Bulking) की स्वर्ण अवधि’ होती है! इस चरण में पौधे द्वारा तैयार किया गया भोजन सीधे जमीन के अंदर बन रहे कंदों में स्थानांतरित होता है। यदि इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण समय पर फसल को सही और सटीक पोषण मिल जाए, तो बंपर पैदावार, शानदार चमक और भारी वजन की गारंटी पक्की हो जाती है।
अंकुरण के 55 दिन बाद आलू का पौधा वानस्पतिक वृद्धि (शाखाओं और पत्तों के विकास) को लगभग पूरा कर चुका होता है और उसकी सारी ऊर्जा कंदों के आकार, वजन और गुणवत्ता को बढ़ाने में लग जाती है।
- इस अवस्था में पोटाश (Potassium) की मांग अपने चरम पर होती है।
- पौधे को इस समय त्वरित पोषण की आवश्यकता होती है ताकि पत्तियों में बना स्टार्च बिना किसी बाधा के तेजी से कंदों तक पहुंचे।
पोषक प्रबंधन और उसके लाभ
- छिड़कांव (सिक्वेन्शियल 2): NPK 10:20:40 + मैग्नीशियम + सुक्ष्मपोषकतत्व
- कैसे काम करता है: पत्तियों पर छिड़काव करने से पोषक तत्व सीधे पौधे के तंत्र में तेजी से अवशोषित होते हैं।
- लाभ: इसमें मौजूद उच्च पोटाश (40%) स्टार्च निर्माण और उसके संचय को कई गुना बढ़ा देता है। साथ ही, मैग्नीशियम और सुक्ष्मपोषकतत्व (Micronutrients) पौधे की पत्तियों को हरा-भरा रखकर प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को तेज करते हैं, जिससे पौधे को भोजन बनाने में पूरी ताकत मिलती है।
- जमीन से खुराक: जेरार्ड सोल्युशन (5:8:40 + Mg + S)
- कैसे काम करता है: जड़ों के माध्यम से दिया जाने वाला यह सोल्यूशन मिट्टी के राइजोस्फेयर को मजबूत करता है और जड़ों को दीर्घकालिक पोषण प्रदान करता है।
- लाभ: इसमें मौजूद सल्फर (S) और संतुलित फास्फोरस-पोटाश कंदों के छिलके की गुणवत्ता, चमक और फंगस से सुरक्षा में मदद करते हैं, जिससे आलू स्वस्थ और चमकदार बनते हैं।
मुख्य फायदे:
- स्टार्च का भरपूर संचय: कंदों के अंदर ड्राई मैटर और स्टार्च की मात्रा बढ़ती है, जिससे आलू की आंतरिक गुणवत्ता सुधरती है।
- आकार, चमक और वजन में बढ़ोत्तरी: पोटाश और सल्फर के बेहतरीन तालमेल से आलू का साइज एकसमान, आकर्षक चमक वाला और भारी वजन का बनता है, जिससे बाजार में श्रेष्ठ मूल्य प्राप्त होता है।
मात्रा:
छिड़कांव:
- सिक्वेन्शियल 2: 2 मिली प्रती लिटर पानी
जमीन से
- जेरार्ड सोल्युशन: 3 किलो प्रती एकड़

