अनार में आखिरी पानी (हलकी सिंचाई) देकर पौधे को तनाव पर छोड़ने का मतलब होता है, उसे फूल और फल बनाने के लिए प्रेरित करना। इस चरण में फास्फोरस (Phosphorus) और पोटैशियम (Potassium) की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। वहीं, कौपर (Copper) और सल्फर (Sulfur) फफूंदनाशक के रूप में पौधे को बीमारियों से बचाने का काम करते हैं।
- फास्फोरस (P): यह पौधे में ऊर्जा हस्तांतरण (एटीपी के माध्यम से) की प्रक्रिया को चलाता है। तनाव के समय, यह सुनिश्चित करता है कि जड़ वृद्धि और फूल निर्माण के लिए पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध रहे ।
- पोटैशियम (K): पोटैशियम पौधे में जल संतुलन (रंध्रों के खुलने-बंद होने) को नियंत्रित करता है। यह पौधे को सूखे (ड्राउट) और अन्य अजैविक तनावों (जैसे गर्मी) से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है ।
- कौपर (Copper): कौपर एक प्रभावी संपर्क कवकनाशी (Contact Fungicide) है। यह सीधे फफूंद के बीजाणुओं (Spores) के संपर्क में आकर उन्हें नष्ट करता है।
- सल्फर: सल्फर फफूंद कोशिकाओं में प्रवेश करके उनके श्वसन (respiration) की प्रक्रिया को बाधित करता है। यह फफूंद के एंजाईम सिस्टम को प्रभावित करता है, जिससे वह बढ़ नहीं पाती। खास बात यह है कि सल्फर पोषकतत्व के रूप में भी काम करता है और इसका कवकनाशी प्रभाव दोहरा लाभ देता है।
- जिंक: एक अत्यंत आवश्यक सूक्ष्मपोषकतत्व है, जो पौधे के भीतर होने वाली अनेक जैवरासायनिक क्रियाओं के लिए अनिवार्य है। यह कई महत्वपूर्ण एंजाईमों के लिए एक सह-कारक (Cofactor) का काम करता है। औक्सिन हार्मोन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
स्प्रे:
- झिनर्जी: 1 मिली प्रती लीटर पानी (जिंक, कौपर और सल्फर)
- डीपी-98 : 2 मिली प्रती लीटर पानी ( 6:37:17 N:P:K)
जमीन से:
- हेनीग सोल्युशन : 4 किलो प्रती एकड़ ( 11:44:11 N:P:K)


