अदरक 118-120 दिन बाद क्या दे जिससे कंद में बढ़ोतरी और साइज़ बनती रहे ?
अदरक की फसल के लिए 118-120 दिन का समय वह पड़ाव है जहाँ पौधा अपनी पूरी ऊर्जा कंद (Rhizome) को बड़ा करने और उसे ठोस बनाने में लगा देता है। पोटेशियम और फास्फोरस के साथ विशिष्ट सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग करते हो तो इससे उपज 25-30% तक बढ़ सकती है।
1. इसके लिए ,
स्प्रे:
फोर्टीफ़ाय (0:61:41+Zn+Mn): 2 मिली प्रती लीटर पानी
यह एक उच्च फास्फोरस और पोटाश वाला उर्वरक है जो इस समय ‘पावर बूस्टर’ का काम करता है।
- 0:61:41 (P & K): इसमें नाईट्रोजन शून्य है, जो सही है क्योंकि इस समय हमें वानस्पतिक वृद्धि नहीं बल्कि कंद की मोटाई चाहिए। फास्फोरस (P) कंद के नए सेल्स बनाता है और पोटाश (K) उन सेल्स में कार्बोहाइड्रेट्स भरकर उन्हें वजनदार बनाता है।
- जिंक (Zn): यह पौधों के हार्मोन (औक्सिन) को सक्रिय रखता है जिससे गांठों का विकास रुकता नहीं है।
- मैन्गेनीज (Mn): यह प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को अंत तक बनाए रखता है ताकि पत्तियां पीली न पड़ें।
जमीन से:
ओनील (0:40:39+Fe+Mg): 4 किलो प्रती एकड़
- आयरन (Fe): अदरक की फसल में लोहे की कमी से नई पत्तियां सफेद होने लगती हैं। आयरन कंद की गुणवत्ता और स्वाद के लिए जरूरी है।
- मैग्नीशियम (Mg): यह क्लोरोफिल का मुख्य केंद्र है। यह पत्तियों में भोजन बनाने का काम करता है।
- 0:40:39: यह जमीन में जाकर कंद के चारों ओर एक पोषक घेरा बनाता है जिससे कंद की ‘उंगलियां’ (Fingers) लंबी और मोटी होती हैं।
2. 15 दिनों का रिपीट क्रम (शेड्यूल)
अदरक की फसल 120 दिन के बाद परिपक्वता (Maturity) की ओर बढ़ती है। यहाँ आपका आगामी 45 दिनों का चार्ट है:
| दिन (Day) | क्रिया (Activity) | मुख्य लक्ष्य |
| 118 – 120 दिन | फोर्टीफ़ाय (स्प्रे) + ओनील (जमीन से) | कंद फुलाव की शुरुआत और कल्ले मजबूत करना। |
| 133 – 135 दिन | रिपीट डोज़ 1: फोर्टीफ़ाय (2 ml) + ओनील (4 kg) | कंद के वजन (Weight) और घनत्व को बढ़ाना। |
| 148 – 150 दिन | रिपीट डोज़ 2 : फोर्टीफ़ाय (2 ml) + ओनील (4 kg) | कंद के ऊपर की छाल (Skin) को सख्त करना और चमक लाना। |
3. इस डोज़ से होने वाले मुख्य फायदे
- कंद फुटन और कल्ले: इस समय फास्फोरस की भारी मात्रा मिट्टी के अंदर कंद को जगह बनाने और नए ‘नोड्स’ विकसित करने के लिए प्रेरित करती है।
- साइज़ और वजन: पोटाश कोशिका के रस (Cell Sap) के दबाव को बढ़ाता है, जिससे अदरक की कंद पिचकी हुई नहीं बल्कि फुली हुई और भारी होती हैं।
- हरापन: मैग्नीशियम और आयरन के कारण आपकी फसल अंतिम समय तक ‘स्ट्रेस’ (तनाव) में नहीं आएगी और हरी बनी रहेगी।
विशेष सावधानियां:
- पानी का अंतराल: पोटाश युक्त खाद देने के बाद हल्की सिंचाई जरूर करें। पोटाश को काम करने के लिए नमी की आवश्यकता होती है।
- स्प्रे का समय: फोर्टीफ़ाय का स्प्रे करते समय ध्यान रखें कि उस समय तेज धूप न हो। सुबह जल्दी या शाम के समय स्प्रे करें।
- मिट्टी चढ़ाना: यदि कंद जमीन से बाहर दिखाई दे रहे हैं, तो इन खादों को देने के बाद हल्की मिट्टी चढ़ा दें (Earthing up) ताकि कंदों को फैलने के लिए अंधेरा और जगह मिले।


