मक्के की फसल में 25 से 30 दिन की अवस्था को सबसे महत्वपूर्ण या ‘क्रिटिकल स्टेज’ माना जाता है। इस समय मक्के का पौधा ‘ग्रोथ फेज’ से निकलकर ‘रीप्रोडक्टिव फेज’ तयारी कर रहा होता है।
यह कोम्बिनेशन (बायो 20, किंगफोल जिंक 70 और हेनीग सोल्युशन 11:44:11) को मक्के की इस अवस्था में देने से फसल मे बेहतरीन परिणाम देखने को मिलते है।
- हेनीग सोल्युशन (11:44:11) – जमीन या ड्रीप से
यह खाद मुख्य रूप से फास्फोरस (44%) से भरपूर है, जिसे मक्के की जड़ों का टॉनिक कहा जा सकता है।
- जड़ों का अभूतपूर्व विकास (Root Architecture): 25-30 दिन की मक्का को जमीन के अंदर से सबसे ज्यादा ताकत की जरूरत होती है। इसमें मौजूद 44% फास्फोरस मक्के की प्राथमिक और द्वितीयक (Lateral) जड़ों का मजबूत जाल बिछा देता है। जितनी गहरी और फैली हुई जड़ें होंगी, पौधा उतनी ही अधिक नमी और खाद नीचे से खींच पाएगा।
- तने की मोटाई और मजबूती: मक्के का पौधा जैसे-जैसे ऊपर बढ़ता है, उसका तना मजबूत होना चाहिए ताकि हवा चलने पर फसल गिरे नहीं। फास्फोरस तने को आंतरिक मजबूती देता है।
- आगे चलकर भुट्टे का आकार तय होना: बहुत से किसानों को यह नहीं पता होता कि मक्के के भुट्टे के अंदर कितनी लाइनें और कितने दाने होंगे, इसका निर्धारण पौधे की शुरुआती अवस्था (यही 25 से 30 दिन का समय) में ही हो जाता है। इस समय फास्फोरस मिलने से आगे चलकर बड़ा, लंबा और दानों से पूरी तरह भरा हुआ भुट्टा बनता है।
- बायो 20 (NPK 20:20:20 + सुक्ष्मपोषकतत्व + सीवीड + हार्मोन) – स्प्रे
यह एक एडवांस्ड लिक्विड बायो-स्टिमुलेंट और फर्टिलाइज़र है, जो पौधे पर ऊपर से पोषकतत्वो कि पूर्ती करता है।
- सीवीड (Seaweed) का चमत्कार: बायो 20 में मौजूद समुद्री शैवाल (Seaweed) पौधे में ‘साइटोकिनिन’ और ‘ऑक्सिन’ जैसे नेचुरल हार्मोन बढ़ाता है। इससे पौधे की कोशिकाओं (Cells) का विभाजन तेज होता है, जिससे नई पत्तियां तेजी से निकलती हैं और पौधा चौतरफा बढ़वार करता है।
- तनाव से सुरक्षा (Stress Defense): इस उम्र में कई बार मौसम में बदलाव (जैसे तेज धूप, बारिश का न होना या तापमान का बढ़ना) से पौधे की ग्रोथ रुक जाती है। बायो 20 पौधे को इस प्रकार के पर्यावरणीय तनाव से बचाता है।
- संतुलित भोजन (20:20:20): इसमें नाईट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश बराबर मात्रा में होते हैं, जिससे पौधे की पत्तियों में क्लोरोफिल बढ़ता है, फोटोसिंथेसिस (प्रकाशसंश्लेषण) तेज होता है और पत्तियां गहरी हरी व चमकदार हो जाती हैं।
- किंगफोल जिंक 70 – स्प्रे
मक्का कि फसल को सबसे जादा मात्रा मे जिंक कि जरुरत होती है। मक्का जिंक की कमी के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील (Sensitive) फसलों में से एक है।
- पीलेपन और सफेद धारियों से छुटकारा: 25-30 दिन की मक्का में अक्सर जिंक की कमी दिखने लगती है, जिससे नई पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं या उन पर सफेद नसें/धारियां उभर आती हैं। किंगफोल जिंक इस कमी को तुरंत दूर करता है।
- एन्जाईम एक्टिवेशन: जिंक पौधे के अंदर लगभग 300 से ज्यादा एन्जाईमों को सक्रिय (Activate) करता है। यह पौधे के ‘मेटाबॉलिज्म’ (चयापचय) को दुरुस्त करता है ताकि पौधा जमीन से दी गई अन्य खादों को आसानी से पचा सके।
- ग्रोथ लॉक होना रोकना: अगर जिंक की कमी हो जाए, तो मक्के की बढ़वार बिल्कुल रुक जाती है (पौधा बौना सा लगने लगता है)। जिंक इस रुकावट को खोलकर मक्के को फिर से तेजी से बढ़ने की रफ्तार देता है।
मक्के पर इन तीनों के मिलने वाले परिणाम :
हेनीग सोल्युशन (11:44:11) को जमीन के रास्ते जड़ों को मजबूत करने के लिए देते हैं, और साथ ही बायो 20 व किंगफोल जिंक 70 का ऊपर से स्प्रे करते हैं, तो फसल में यह बदलाव देखने को मिलते हैं,
- जड़ से लेकर चोटी तक विकास: जमीन के अंदर जड़ों का मजबूत जाल बिछ जाता है और जमीन के ऊपर तना मोटा व पत्तियां चौड़ी हो जाती हैं।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता: पौधे की इम्युनिटी इतनी मजबूत हो जाती है कि वह शुरुआती कीटों और बीमारियों का मुकाबला खुद कर सकता है।
- अधिक पैदावार की नींव: यह कोम्बिनेशन मक्के की फसल को एक ऐसा ‘बूस्ट’ देता है कि आगे चलकर भुट्टों में एक भी दाना खाली (Missed kernels) नहीं रहता और बंपर पैदावार मिलती है।
मात्रा
जमीन से,
- हेनीग सोल्युशन: 3 किलो प्रती एकड
छिडकांव,
- बायो 20 : 2 मिली प्रती प्रती लिटर पानी
- किंगफोल जिंक 70: 1 मिली प्रती लिटर पानी



