मूंग – 45 से 50 दिन – फली बनने की अवस्था
मूंग की 55-60 दिन की अवस्था (Pod Initiation) वह समय है जब फसल अपनी पूरी ताकत फलियों में दाने भरने के लिए लगा देती है। इस समय पोषक तत्वों का सही संतुलन “दाने की चमक और वजन” निर्धारित करता है।
इस अवस्था में:
1. पोटाश और मैग्नीशियम: “दाने भरने के मुख्य आधार”
इस अवस्था में ये दोनों तत्व सबसे महत्वपूर्ण हैं:
- पोटाश (Potassium): इसे पौधों का ‘ट्रैफिक पुलिस’ कहा जाता है। यह पत्तियों में बने भोजन (कार्बोहाइड्रेट) को खींचकर फलियों तक पहुँचाता है। इससे फलियां पूरी भरती हैं और दाने चमकदार बनते हैं।
- मैग्नीशियम (Magnesium): यह क्लोरोफिल का मुख्य हिस्सा है। पुरानी पत्तियां अक्सर इस समय पीली पड़ने लगती हैं, मैग्नीशियम उन्हें हरा रखकर प्रकाश संश्लेषण जारी रखता है, जिससे पौधा अंत तक भोजन बनाता रहता है।
2. नाईट्रोजन और फास्फोरस: “सपोर्टर की भूमिका”
भले ही यह फलियों की अवस्था है, लेकिन कम मात्रा में इनका होना भी जरूरी होता है,
- फास्फोरस (Phosphorus): फलियों के अंदर दानों के विकास के लिए ऊर्जा (ATP) प्रदान करता है। यह दानों के छिलके को मजबूत बनाता है।
- नाईट्रोजन (Nitrogen): फलियां बनते समय पौधे को प्रोटीन संश्लेषण के लिए हल्की नाइट्रोजन चाहिए होती है। अगर नाईट्रोजन बिल्कुल खत्म हो जाए, तो पौधा अपनी पत्तियों को समय से पहले गिरा देता है (Early Senescence), जिससे पैदावार घट जाती है।
3. ट्रायकॉनटॅनोल (Triacontanol): “मेटाबोलिक बूस्टर”
ट्रायकॉनटॅनोल एक प्राकृतिक प्लांट ग्रोथ स्टिमुलेंट (PGR) है:
- तनाव सहने की शक्ति: 45-50 दिन पर अक्सर नमी की कमी या बहुत ज्यादा बारिश से पौधा तनाव में आता है। यह उसे बचाता है।
- एन्जाईम गतिविधि: यह पौधे के भीतर एन्जाईम्स को सक्रिय करता है जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण (Uptake) बढ़ जाता है।
- फली सैटिंग: यह सुनिश्चित करता है कि फूल से बनी छोटी फलियां झड़ें नहीं और उनमें दाने बनने की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जाए।
4. कीट प्रबंधन (फली छेदक)
जैसा कि आपने बताया, इस समय कीटों का हमला दानों को सीधे नुकसान पहुँचाता है। इससे बचने के लिए कीटनाशक छिड़काव जरूरी है:
फली छेदक (Pod Borer):
यह इल्ली फलियों के अंदर घुसकर दानों को खा जाती है। इसके लिए आपको ‘सिस्टेमिक’ और ‘कोन्टैक्ट’ कीटनाशक का मिश्रण चाहिए।
- समाधान: स्पिनोसेड (Spinosad) या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल (Chlorantraniliprole – कोराजन) या प्रोफेनोफॉस + सायपरमेथ्रिन- ये दवाएं लंबे समय तक सुरक्षा देती हैं।
इस अवस्था के लिए स्प्रे कोम्बिनेशन और मात्रा:
- लिबीग (06:24:36+ मैग्नीशियम): 1000 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी
- ट्रायकॉनटॅनोल 0.1 % – 400 मिली प्रति लीटर पानी
- साथ में कीटनाशक जो फली छेदक और अन्य किटोको कंट्रोल करेगा।

