तरबूज की 32-35 दिन की अवस्था वह समय है जब खेत में “फ्रूट सैटिंग” (फलों का सैट होना) जोरों पर होती है। इस समय बेलें पूरी तरह फैल चुकी होती हैं और छोटे-छोटे फल (कंचे के आकार के) दिखाई देने लगते हैं।
इस समय इन पोषकतत्वों का तालमेल आपकी पैदावार (Yield) तय करता है ।
1. कैल्शियम और बोरान (Ca + B):
इस अवस्था में इनकी भूमिका सबसे क्रिटिकल (महत्वपूर्ण) है ।
- कैल्शियम: यह फल की बाहरी त्वचा (Skin) को मजबूती देता है। अगर इस समय कैल्शियम कम हुआ, तो आगे चलकर फल फट जाते हैं।
- बोरोन: यह पराग नली (Pollen Tube) को सक्रिय रखता है जिससे फल “मिस” नहीं होते। साथ ही, यह कैल्शियम को फल के अंतिम सिरे तक पहुँचाता है।
- फायदा: फल का आकार टेढ़ा-मेढ़ा नहीं होता और सेटिंग पक्की होती है।
2. अन्य पोषकतत्व:
इस समय पौधा अपनी पूरी ताकत फल बनाने में लगा रहा होता है।
- मैग्नीशियम और आयरन: पत्तों को पीला पड़ने से बचाते हैं ताकि फल के लिए पर्याप्त भोजन (Carbohydrates) बनता रहे।
- जिंक: फल की कोशिकाओं के विस्तार (Cell Expansion) में मदद करता है।
3. स्फुरद (फास्फोरस):
इस समय पौधा बहुत तनाव में होता है क्योंकि, उसे फल पालने होते हैं। फास्फोरस पौधे को वह “ऊर्जा” (ATP) प्रदान करता है जो फूलों को फल में बदलने के लिए जरूरी है।
4. पालाश (पोटाश):
- पोटैशियम एक वाहक की तरह काम करता है। पत्तों में जो भोजन (शुगर) बनता है, पोटैशियम उसे खींचकर फल तक ले जाता है।
- इससे फल का वजन बढ़ना शुरू होता है और पौधे की रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है।
स्प्रे
- सीए + बी – 2 मिली प्रती लिटर पानी
जमीन से:
- अल्बर्ट सोल्युशन – 3 किलो प्रती एकड़



