अदरक 103-105 दिनों की अवस्था फास्फोरस और पोटाश ही क्यों दे और क्या दे?
अदरक की फसल 103-105 दिनों की अवस्था “कंद विकास” (Rhizome Bulking) का मुख्य समय होता है। इस समय पौधे को वानस्पतिक विकास के बजाय कंद की मोटाई और मजबूती पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होती है।
- स्प्रे का महत्व,
- डीपी 98 (6:37:17): इस ग्रेड में फास्फोरस (P) और पोटाश (K) का उच्च अनुपात है।
- फास्फोरस (P): नई जड़ों और कंद की लेंग्थ के विकास में मदद करता है, जिससे अधिक कल्ले (Tillers) निकलते हैं।
- पोटाश (K): यह कंद में पानी और स्टार्च के संचय को बढ़ाता है, जिससे कंद का साइज़ और वजन बढ़ता है।
- मायक्रोमैक्स (सुक्ष्मपोषकतत्व): इस समय जिंक, लोहा और मैंगनीज जैसे तत्व क्लोरोफिल बनाए रखने में मदद करते हैं, जिससे फसल में हरापन बना रहता है।
- जमीन से का महत्व,
- लिबीग (6:24:36+Mg): यह एक बेहतरीन कोम्बिनेशन है।
- इसमें मौजूद मैग्नीशियम (Mg) प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) को तेज करता है, जिससे पत्तियां भोजन बनाकर तेजी से कंदों की ओर भेजती हैं।
- उच्च पोटाश (36%) कंद की त्वचा को चमकदार और रोगमुक्त बनाता है।
- लिपमैन कोम्बी (EDTA Chelated Micro-nutrients): चेलटेड होने के कारण ये तत्व मिट्टी के अन्य रसायनों के साथ लॉक नहीं होते और जड़ों द्वारा तुरंत सोख लिए जाते हैं।
इस 103-105 दिन के अंतराल में यह डोज़….
- कल्लों की बढ़वार: फास्फोरस की उच्च मात्रा नए कल्ले (Tillers) निकलने की प्रक्रिया को उत्तेजित करेगी।
- कंद का घेरा (Girth): पोटेशियम की भारी मात्रा अदरक की उंगलियों (Fingers) को मोटा और ठोस बनाएगी।
- चमक और गुणवत्ता: सुक्ष्म पोषकतत्वों के कारण अदरक की त्वचा चमकदार और साफ़ होगी, जिससे बाजार में भाव अच्छा मिलेगा।
- हरापन: मैग्नीशियम (Mg) के कारण पत्तियां लंबे समय तक काली-हरी बनी रहेंगी, जिससे फसल जल्दी नहीं सूखेगी।
मात्रा:
स्प्रे,
- डीपी 98: 2 मिली प्रती लीटर पानी
- मायक्रोमैक्स: 1 मिली प्रती लीटर पानी
जमीन से,
- लिबीग (6:24:36+Mg) : 4 किलो प्रती एकड़
- लिपमैन कोम्बी (EDTA Chelated Micro-nutrients): 500 ग्राम प्रती एकड़
कुछ जरूरी सुझाव:
- पानी का प्रबंधन: जब आप इतनी मात्रा में खाद दे रहे हों, तो खेत में नमी का स्तर उचित बनाए रखें। अधिक सूखे में खाद देने से जड़ों पर तनाव पड़ सकता है।




