टमाटर 48 दिन कैल्शियम देना जरुरी क्यों है?
टमाटर की 48 दिन की अवस्था वह समय है जब फसल पर फलों का भार सबसे अधिक होता है और पौधा अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहा होता है। इस समय केलमैक्स गोल्ड, मैग्नीशियम प्लस और जमीन से मार्क सोल्यूशन (बोरोनेटेड कैल्शियम नाईट्रेट) का उपयोग करना फसल की ‘क्वालिटी’ और ‘क्वांटिटी’ दोनों को बढ़ाने का सबसे सटीक तरीका है।
- ब्लोसम एन्ड रॉट (Blossom End Rot – BER) से सुरक्षा
48वें दिन तक फल बड़े होने लगते हैं। अगर इस समय कैल्शियम की कमी हुई, तो फल के निचले हिस्से में काला धब्बा पड़ने लगता है (सड़न)।
- मार्क सोल्यूशन (जमीन से) : यह जड़ों के माध्यम से पौधे के ऊतकों को कैल्शियम की निरंतर सप्लाई देता है।
- केलमैक्स गोल्ड (स्प्रे) : यह सीधे फलों की कोशिकाओं तक कैल्शियम पहुँचाता है, जिससे फल फटने से बचते हैं और नीचे से सड़ने (BER) की समस्या खत्म हो जाती है।
- फल का साईज, वजन और चमक
- कोशिका सशक्तीकरण : कैल्शियम फल की बाहरी दीवार को मजबूत बनाता है। इससे फल ठोस बनते हैं और उनका वजन बढ़ता है।
- चमक: अमीनो ऐसिड और सूक्ष्मपोषकतत्व फल की बाहरी सतह (त्वचा) को एक कुदरती चमक देते हैं, जो मार्केट में ऊंचे दाम दिलाने में मदद करती है।
- पत्तियों का गहरा हरापन
- इस अवस्था में पुरानी पत्तियां अक्सर पीली पड़ने लगती हैं क्योंकि पौधा अपनी पूरी ऊर्जा फल बनाने में लगा देता है।
- मैग्नीशियम प्लस का स्प्रे क्लोरोफिल की मात्रा को बढ़ाता है। पत्तियां जितनी हरी और चौड़ी होंगी, फल उतना ही बड़ा और मीठा बनेगा।
- नई फ्लावरिंग और फ्रूट सैटींग
48 दिन पर भी टमाटर में नए फूल आ रहे होते हैं।
- बोरान का महत्व : मार्क सोल्यूशन में मौजूद बोरान परागकणों (Pollens) को सक्रिय रखता है। इससे फूल झड़ते नहीं और हर फूल फल में बदल जाता है।
- अमीनो ऐसिड : यह पौधे को ‘बायोटिक स्ट्रैस (गर्मी या अधिक फल के बोझ का तनाव) से बचाता है, जिससे सैटींग बेहतर होती है।
मात्रा
स्प्रे
- केलमैक्स गोल्ड : 2 मिली प्रती लीटर पानी
- मैग्नीशियम प्लस : 1 मिली प्रती लीटर पानी
जमीन से,
- मार्क सोल्युशन : 5 किलो प्रती एकड़
पानी का प्रबंधन: कैल्शियम और मैग्नीशियम तभी बेहतर काम करते हैं जब मिट्टी में नमी बनी रहे। अनियमित पानी देने से कैल्शियम का अवशोषण रुक जाता है और फल फटने लगते हैं।


