गेंदे में शाकीय वृद्धि रोककर ज्यादा और बड़े फूल पाने के सटीक उपाय

गेंदे की 50 दिन की अवस्था बहुत ही महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह शाकीय वृद्धि (Vegetative growth) से फुल प्रक्रिया में प्रवेश करने का सही समय होता है।

इस अवस्था में पौधों में C:N Ratio (कार्बन:नाईट्रोजन रेशो) को संतुलित करके अत्यधिक वानस्पतिक वृद्धि को रोकते हैं और फूल आने की प्रक्रिया को तेज करना होता हैं।

C:N Ratio (कार्बन:नाईट्रोजन रेशो) और वृद्धि नियंत्रण का विज्ञान

  • C:N Ratio का सिद्धांत:
  1. जब पौधे में नाईट्रोजन (N) की मात्रा ज्यादा होती है, तो कार्बन कम रहता है (Low C:N Ratio)। इस स्थिति में पौधा केवल पत्तियां और शाखाएं (Vegetative growth) बढ़ाता रहता है, फूल नहीं आते।
  2. जब पौधे में फास्फोरस (P) और पोटाश (K) की आपूर्ति बढ़ाई जाती है और नाईट्रोजन को नियंत्रित किया जाता है, तो पौधे में स्टार्च/शर्करा (कार्बन) जमा होने लगती है, जिससे C:N Ratio बढ़ जाता है (High C:N Ratio)।
  • वृद्धि नियंत्रण (Growth Regulation): 50वें दिन पर अत्यधिक नाईट्रोजन देने से पौधा लंबा और कमज़ोर हो सकता है। फास्फोरस और पोटाश का यह कोम्बीनेशन पौधे की अनावश्यक लंबाई को रोकता है, तने को मोटा व मजबूत बनाता है और पौधे को फूल देने के मोड़ पर लाता है।

फवारणी – फोर्टीफाय (00:61:41 + Zn + Mn) के फायदे

इस स्प्रे में नाईट्रोजन बिल्कुल शून्य (0%) है, जबकि फास्फोरस (61%) और पोटेशियम (41%) अत्यधिक मात्रा में हैं।

  1. 61% फास्फोरस (P): पौधे में एटीपी (ऊर्जा) बनाता है, जो कली बनने (Bud Initiation) और कली के फूटने के लिए अनिवार्य है।
  2. 41% पोटाश (K): कलियों और फूलों का आकार बड़ा करता है, रंग में चमक लाता है और फूलों का वजन बढ़ाता है।
  3. जिंक (Zn) और मैन्गेनीज (Mn): औक्सिन हार्मोन को संतुलित करते हैं, जिससे नए कल्ले (Branches) निकलते हैं और प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की गति तेज होती है।

ड्रीप – जेरार्ड सोल्युशन (5:8:40 + Mg + S) के फायदे

जड़ों में दी जाने वाली इस ड्रीप में पोटेशियम (40%) की मात्रा सबसे ज्यादा है और नाईट्रोजन (5%) बहुत ही सीमित है।

  1. 5% नाईट्रोजन (N): पौधे को हल्का पोषण देता है ताकि वह पूरी तरह पीला न पड़े और भोजन बनाने की प्रक्रिया चालू रहे।
  2. 8% फास्फोरस (P): जड़ों को गहराई तक मजबूत करता है ताकि वे भारी फूलों का वजन सह सकें।
  3. 40% पोटेशियम (K): पौधे के तनों में पानी और पोषक तत्वों के परिवहन को नियंत्रित करता है, जिससे फूल झड़ने से बचते हैं और लंबे समय तक तरोताजा रहते हैं।
  4. मैग्नीशियम (Mg) और सल्फर (S): मैग्नीशियम क्लोरोफिल को बनाए रखता है (पत्तियां हरी रहती हैं) और सल्फर फूलों की गुणवत्ता, रंग की तीव्रता और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

कुल मिलाकर,

  1. जल्दी और एकसमान फ्लावरिंग: C:N रेशो सही होने के कारण खेत में एक साथ ढेर सारी कलियां निकलेंगी।
  2. फूलों का आकार व वजन: पोटेशियम की उच्च मात्रा से फूलों का व्यास (Diameter) बड़ा होगा और वजन बढ़ेगा।
  3. फूलों की टिकाऊ क्षमता (Shelf Life): फूल तोड़ने के बाद लंबे समय तक खराब नहीं होंगे और बाजार में अच्छा भाव मिलेगा।
  4. मजबूत ढांचा: पौधे का तना मोटा होगा, जिससे भारी फूल आने पर पौधा नीचे नहीं झुकेगा या टूटेगा नहीं।

4. उपयोग की सही मात्रा

छिड़काव

  • फोर्टीफ़ाय: 2 मिली प्रती लीटर पानी

 (छिड़काव में जरुरत के हिसाब से कीटनाशक या फफूंदनाशक मिला सकते है।)

ड्रिप:

जेरार्ड सोल्युशन : 3 किलो प्रती एकड़

phortyfy

gerard

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