अदरक 88-90 दिन फास्फोरस और फेरस का क्या महत्व है?
अदरक की फसल के लिए 88-90 दिन की अवस्था बहुत महत्वपूर्ण होती है। इस समय पौधा अपनी वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative growth) पूरी कर चुका होता है और कंद (Rhizome) बनने व फूलने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
- हेनीग सोल्युशन (11 N: 44 P: 11 K) का महत्व
90 दिन के आसपास अदरक को उच्च फास्फोरस की आवश्यकता होती है।
- फास्फोरस (44%): इस समय फास्फोरस का मुख्य काम जड़ों को मजबूत करना और कंद (Rhizome) के आकार की शुरुआत करना है। यह ऊर्जा के स्थानांतरण (ATP) में मदद करता है जिससे कंद तेजी से विकसित होते हैं।
- नाईट्रोजन (11%): इस अवस्था में बहुत ज्यादा नाईट्रोजन की जरूरत नहीं होती, क्योंकि अधिक नाईट्रोजन से केवल पत्तियां बढ़ेंगी और कंद छोटा रह जाएगा। 11% नाईट्रोजन केवल हरियाली बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।
- पोटाश (11%): पोटाश पौधों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और प्रकाश संश्लेषण से बने भोजन को पत्तियों से कंदों तक भेजने का काम शुरू करता है।
- फेरस (फिओमेक्स 6% EDDHA फेरस) का महत्व
अदरक की फसल में अक्सर 80-100 दिन के बीच पीलापन (Iron Chlorosis) दिखाई देता है।
- क्लोरोफिल निर्माण: आयरन (फेरस) क्लोरोफिल बनाने के लिए आवश्यक है। अगर पत्तियां पीली पड़ेंगी, तो भोजन कम बनेगा और कंद का साइज छोटा रह जाएगा।
- EDDHA चेलेट: अदरक की खेती अक्सर भारी मिट्टी या अधिक pH वाली मिट्टी में होती है। साधारण फेरस सल्फेट ऐसी मिट्टी में काम नहीं करता। EDDHA एक उच्च श्रेणी का चेलेट है जो मिट्टी में आयरन को ‘लॉक’ होने से बचाता है और जड़ों तक आसानी से पहुँचाता है।
- मिट्टी का स्वास्थ्य: यह पौधे की चयापचय (Metabolism) क्रिया को तेज करता है जिससे पौधा तनाव मुक्त रहता है।
| अवस्था | लाभ |
| कंद का विकास | 11:44:11 जड़ों के ढांचे को चौड़ा करता है ताकि कंद फैल सकें। |
| प्रकाश संश्लेषण | फेरस (Fe) सुनिश्चित करता है कि पत्तियां गहरे रंग की रहें और भोजन बनाती रहें। |
| गुणवत्ता | पोटाश की हल्की मात्रा कंद में चमक और वजन बढ़ाने की नींव रखती है। |
मात्रा:
- हेनीग सोल्युशन: 4 किलो प्रती एकड़
- फिओमेक्स (6% EDDHA फेरस): 500 ग्राम प्रती एकड़
सावधानी:
90 दिन के बाद धीरे-धीरे फास्फोरस की मात्रा कम करके पोटास की मात्रा बढ़ानी चाहिए, क्योंकि कंद को अंतिम रूप देने और वजन बढ़ाने के लिए पोटाश सबसे बड़ा कारक है।


