कपास की फसल जब 75 से 90 दिन की होती है, तब पौधा सबसे ज्यादा व्यस्त होता है—एक तरफ पौधे को अपनी लंबाई और टहनियों को संभालना होता है, तो दूसरी तरफ नए फूल, टिंडे (Bolls) और उनका विकास करना होता है। इस समय में ड्रिप या सिंचाई के जरिए इस अवस्था के मुताबिक खाद देना सबसे जरुरी हो जाता है।
1. इस अवस्था में पौधों की मुख्य जरूरतें क्या होती हैं ?
- फलों और फूलों का विकास: इस समय नाईट्रोजन की जगह फास्फोरस (P) और पोटाश (K) की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। फास्फोरस जड़ों और फूलों को मजबूत करता है, जबकि पोटाश फलों का आकार और वजन बढ़ाता है।
- पोषक तत्वों का संतुलन: पौधे की निचली पत्तियां अक्सर पीली या लाल पड़ने लगती हैं, क्योंकि ऊपर आने वाले नए फूलों और फलों को ताकत देने के लिए पौधा नीचे की पत्तियों से भोजन खींचने लगता है।
2. लिबीग (NPK 06:24:36 और मैग्नीशियम):
- फास्फोरस: यह फूलों को झड़ने से रोकता है और ज्यादा से ज्यादा फूल लाने में मदद करता है।
- पोटाश: यह सबसे अहम है।
- यह पौधे की अनावश्यक लंबाई (वानस्पतिक वृद्धि) को रोकता है, जिससे पौधे की सारी ताकत फालतू टहनियां बढ़ाने के बजाय केवल टिंडे और गेंडे (bolls) बनाने में लगती है।
- यह टिंडों का आकार बढ़ाता है, उनमें चमक लाता है और कपास के रेशे की गुणवत्ता सुधारता है।
3. मैग्नीशियम:
- लाल पत्तों की बीमारी से सुरक्षा: कपास में 75-90 दिन की उम्र में पत्तों का लाल होना (Red Leaf Disorder या मैग्नीशियम की कमी) बहुत आम समस्या है। मैग्नीशियम क्लोरोफिल (हरा रंग) का मुख्य हिस्सा है। जब इसकी पूर्ति होती है, तो पत्तियां हरी रहती हैं और लंबे समय तक भोजन बनाती (Photosynthesis) रहती हैं।
- पोषक तत्वों का ट्रांसपोर्ट: मैग्नीशियम पौधे के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में भोजन और अन्य रसायनों को पहुँचाने में ट्रांसपोर्टर का काम करता है, जिससे नए फूलों की सेटिंग बहुत मजबूत होती है।
4. मात्रा:
- लिबीग: 3 किलो प्रती एकड़

