रोपाई के 61 से 80 दिन की अवस्था फसल बैंगन के लिए सबसे नाजुक और महत्वपूर्ण समय होती है। इस दौरान पौधा वानस्पतिक वृद्धि से फूल आने और फल बनने की तरफ शिफ्ट होता है।
- पहला स्प्रे: केलमैक्स गोल्ड + प्लानोफिक्स (61 से 70 दिन के भीतर)
इस स्प्रे का मुख्य उद्देश्य पौधे की आंतरिक ताकत को मजबूत करना, फूलों को झड़ने से रोकना और अधिकतम फूलों को स्वस्थ दानों में बदलना है।
- कैल्शियम (8%): पौधे की कोशिकाओं की दीवार (Cell Wall) को मजबूत करता है। इससे पौधा मजबूत बनता है और तना गिरने की समस्या कम होती है। साथ ही, यह नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है।
- अमीनो एसिड: यह पौधे के लिए एनर्जी बूस्टर का काम करता है। यदि मौसम में अचानक बदलाव (गर्मी, उमस या हल्की बारिश) हो, तो यह पौधे को अजैविक तनाव (Abiotic Stress) से बचाता है और पोषक तत्वों को पत्तियों के अंदर तक पहुंचाने में तेजी लाता है।
- सुक्ष्म पोषक तत्व (Micro-nutrients): इस अवस्था में जिंक, बोरान, और आयरन जैसे सुक्ष्मतत्वों की बहुत आवश्यकता होती है, जो परागण (Pollination) की प्रक्रिया को सफल बनाते हैं।
- प्लानोफिक्स (NAA – Alpha Naphthyl Acetic Acid): यह एक हार्मोन आधारित ग्रोथ रेगुलेटर है। जब पौधे में फूल खिलते हैं, तो कई बारकमजोरी या हॉर्मोनल असंतुलन के कारण फूल झड़ने लगते हैं। प्लानोफिक्स फूलों के डंठल को मजबूत करता है जिससे फ्लावर ड्रॉप (Flower Drop) रुकता है और शत-प्रतिशत फूलों की सेटिंग (Grain Setting) होती है।
मात्रा:
- केलमैक्स गोल्ड: 2 मिली प्रती लीटर पानी
2. दूसरा स्प्रे: लिबीग (6:24:36 + मैग्नीशियम)
(71 से 80 दिन के भीतर)
यह स्प्रे फल साईंज, चमक बढ़ाने और पौधे की फालतू बढ़वार को रोककर सारी ताकत फल की ओर मोड़ने के लिए किया जाता है।
- फास्फोरस (24%): इस अवस्था में जड़ प्रणाली से लेकर ऊर्जा के हस्तांतरण (Energy Transfer) तक में फास्फोरस अहम भूमिका निभाता है। यह नए फूलों की संख्या बढ़ाने में मदद करता है।
- पोटाश (36%): पोटाश इस स्प्रे का सबसे मुख्य हिस्सा है। यह फल बनाने एवं भरने की प्रक्रिया को तेज करता है, फल का आकार एक समान बनाता है, उनमें वजन लाता है और चमक पैदा करता है। पोटाश पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Disease Resistance) को भी मजबूत करता है।
- मैग्नीशियम (Mg): यह क्लोरोफिल का मुख्य घटक है। यह पत्तियों को हरा-भरा रखता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की क्रिया तेज होती है और पौधा भरपूर मात्रा में भोजन बनाकर फलो तक पहुंचाता है।
- वृद्धि को नियंत्रित रखना (Vegetative Growth Control): इस उर्वरक में नाईट्रोजन न के बराबर या बहुत कम होती है। नाईट्रोजन बंद होने से पौधे की फालतू लंबाई या पत्तियों की अनावश्यक वृद्धि रुक जाती है, जिससे पौधा गिरता नहीं है (Lodging resistance) और पौधे की पूरी ऊर्जा केवल बालियों और दानों के विकास में लगती है।
मात्रा:
- लिबीग: 2 ग्राम प्रती लीटर पानी
छिड़काव के लिए जरूरी सावधानियां:
- नमी: स्प्रे करते समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए, ताकि पौधा पोषक तत्वों को आसानी से ग्रहण कर सके।
- समय: हमेशा सुबह के वक्त (जब ओस सूख जाए) या शाम को ठंडे मौसम में स्प्रे करें। तेज धूप में स्प्रे करने से बचें।
- स्टीकर: पानी में घोल बनाते समय अच्छी क्वालिटी का सिलिकॉन बेस्ट स्प्रेडर (स्टीकर) जरूर मिलाएं, ताकि दवा पौधे की पत्तियों पर लंबे समय तक चिपकी रहे और उसका पूरा असर मिले।


