6. 61 से 80 दिन अवस्था: जमीन से क्या दे?

बैंगन की फसल में रोपाई के 61 से 80 दिन का समय बेहद नाजुक और महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान पौधा वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative growth) से पूरी तरह से फूल और फल उत्पादन की अवस्था में होता है।

इस चरण (61-80 दिन) में फसल की मुख्य ज़रूरतें

  1. फूलों को गिरने से रोकना (Flower Drop Control): इस समय तापमान या मौसम में उतार-चढ़ाव या पोषक तत्वों की कमी के कारण फूल झड़ सकते हैं।
  2. परागकणों का विकास: फूलों से सही ढंग से फल बनने (Fruit Setting) के लिए बोरान और कैल्शियम की बहुत आवश्यकता होती है।
  3. फलों का आकार और चमक: पोटाश की सही मात्रा फलों के वजन, आकार और उनकी चमक को बेहतर बनाती है।
  4. फोटोसिंथेसिस (प्रकाश संश्लेषण): पौधे में क्लोरोफिल की कमी न हो, इसके लिए आयरन (Fe) और मैग्नीशियम (Mg) जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व जरूरी हैं।
  1. पहला डोज: मार्क सोल्युशन (बोरोनेटेड कैल्शियम नाइट्रेट) + 13:00:45

इसे फसल में ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) या सही मात्रा में घोल बनाकर दिया जाता है।

  • बोरोनेटेड कैल्शियम नाइट्रेट का काम:
    • कैल्शियम: यह पौधे के तनों और नई कोशिकाओं को मजबूती देता है। बैंगन में फल सड़ने या नीचे से काले पड़ने की समस्या (Blossom End Rot) को रोकता है।
    • बोरान: बोरान एक ‘कैरियर’ का काम करता है जो कैल्शियम को पौधे के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाता है। यह पराग नली (Pollen tube) के विकास में मदद करता है, जिससे फर्टिलाइजेशन बेहतर होता है और फूल झड़ना बंद हो जाते हैं।
  • 13:00:45 का काम:
    • इसमें 13% नाईट्रोजन, 0% फास्फोरस, और 45% पोटाश होता है।
    • इस अवस्था में नाईट्रोजन की बहुत कम मात्रा पौधे को हरा-भरा रखती है, जबकि 45% पोटाश फूलों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी करता है और फूलों को टिकने में मदद करता है।

मात्रा (Dose):

  • मार्क सोल्युशन: 2.5 किलो
  • 13:00:45: 4 किलो
  1. दूसरा डोज: ओ’नील (0:40:39 + Fe + Mg)

पहले डोज के कुछ दिनों के अंतराल (फसल की स्थिति के अनुसार 7 से 10 दिन बाद) पर यह दूसरा महत्वपूर्ण डोज दिया जाता है।

  • 0:40:39 का काम:
    • इसमें 40% फास्फोरस और 39% पोटाश होता है।
    • फास्फोरस जड़ तंत्र को सक्रिय रखता है और पौधे को ऊर्जा प्रदान करता है।
    • पोटाश फलों की गुणवत्ता, मिठास, वजन और उनके आकार को बढ़ाने का मुख्य काम करता है। यह तने को भी मजबूत करता है ताकि भारी फलों का वजन पौधा सहन कर सके।
  • आयरन (Fe) और मैग्नीशियम (Mg) का काम:
    • मैग्नीशियम: यह क्लोरोफिल का मुख्य घटक है। इसकी मौजूदगी से पत्तियां गहरी हरी रहती हैं और वे सूरज की रोशनी का अधिकतम उपयोग करके भोजन बनाती हैं।
    • आयरन: यह एन्जाईम एक्टिविटी को तेज करता है जिससे पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है।

मात्रा (Dose):

  • ओ’नील (0:40:39 + Fe + Mg): 3 किलो

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