लहसुन 61-75 दिन कंद तयार होने की शुरुवाती अवस्था:
लहसुन की खेती में 61-75 दिन की अवस्था सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस समय पौधा अपनी पूरी ऊर्जा पत्तियों से खींचकर कंद (Bulb) बनाने में लगा देता है।
1. 61-75 दिन: तनाव और शारीरिक क्रियाओं का विज्ञान
इस चरण में पौधा “Reproductive Phase” में प्रवेश करता है। पत्तियों का पीला पड़ना अक्सर इस बात का संकेत होता है कि पोषक तत्व पत्तियों से कंद की ओर जा रहे हैं (Translocation)। इस समय पौधे का मेटाबॉलिज्म बहुत तेज होता है, जिससे उसे बायोटिक और एबायोटिक स्ट्रेस (तनाव) महसूस होता है।
2. स्प्रे : बायो 20 (20:20:20 + सुक्ष्मपोषकतत्व + सीवीड)
जब जड़ें तनाव में होती हैं, तो पत्तियों के माध्यम से पोषण देना सबसे प्रभावी होता है।
- 20:20:20 (NPK): यह पौधे को तत्काल नाईट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश प्रदान करता है, जिससे पत्तियों का पीलापन कम होता है और प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) जारी रहता है।
- सुक्ष्मपोषकतत्व: एंजाइमों को सक्रिय करते हैं जो कंद बनने की प्रक्रिया को गति देते हैं।
- सीवीड (Seaweed): यह एक ‘एंटी-स्ट्रेस’ एजेंट है। इसमें मौजूद साइटोकिनिन और ऑक्सिन पौधे को गर्मी या पानी के तनाव से लड़ने की शक्ति देते हैं और कोशिकाओं के विभाजन में मदद करते हैं।
3. जमीन से पोषण: लिबीग (6:24:36 + Mg) + लिपमैन कॉम्बी
यह खाद जमीन की उर्वरता और कंद के ठोसपन के लिए है।
- IPE टेक्नोलॉजी: यह हेनीग सोल्युशन‘ तरह ही काम करता है, IPE तकनीक मिट्टी में फिक्स (जाम) हुए फॉस्फोरस को घोलने का काम करती है। यह सुनिश्चित करती है कि पोटाश और फॉस्फोरस बिना किसी रुकावट के जड़ों को मिलें।
- 6:24:36 (उच्च पोटाश): इस समय पौधे को नाइट्रोजन (6) कम और पोटाश (36) ज्यादा चाहिए ताकि कंद का वजन बढ़े और उसकी चमक आए।
- मैग्नीशियम (Mg): यह क्लोरोफिल का केंद्र है। यह पत्तियों के पीलेपन को जड़ से खत्म कर उन्हें गहरा हरा बनाता है।
- लिपमैन कोम्बी: सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है, जिससे कंद फटने (Splitting) की समस्या नहीं होती।
4. एक सिंचाई के बाद: मार्क सॉल्यूशन (Boronated Calcium Nitrate)
पानी देने के बाद मिट्टी के छिद्र खुल जाते हैं, तब इसका असर सबसे ज्यादा होता है।
- कैल्शियम (Calcium): यह कोशिका भित्ति (Cell Wall) को लचीला और मजबूत बनाता है। जब कंद का आकार तेजी से बढ़ता है, तो कैल्शियम उसे फटने से रोकता है।
- बोरान (Boron): यह पत्तियों में बनी हुई शुगर (Carbohydrates) को खींचकर नीचे कंद तक ले जाने (Sugar Translocation) का काम बोरोन भी करता है। इससे कंद भारी और ठोस बनता है।
| घटक | मुख्य कार्य | लहसुन पर प्रभाव |
| स्प्रे (Bio 20) | त्वरित ऊर्जा और स्ट्रेस मैनेजमेंट | पीलासपन दूर होगा, पौधा हरा-भरा रहेगा। |
| लिबीग (IPE Tech उत्पाद) | मिट्टी में फिक्स खाद को खोलना | पोटाश की उपलब्धता बढ़ेगी, कंद का वजन बढ़ेगा। |
| मार्क (Ca + B) | कोशिका लचीलापन और शुगर ट्रांसपोर्ट | कंद का आकार (Size) बढ़ेगा और पर्दा (Skin) मजबूत होगा। |
छिड़काव,
- बायो 20: 2 मिली प्रति लिटर पानी.
- लिपमैन कोम्बी: 5 ग्राम प्रति लिटर पानी.
जमीन से,
- लिबीग: 4 किलो प्रती एकड़
- मार्क सोल्युशन: 5 किलो प्रती एकड़
(इसको लिबीग के साथ मिलके भी दे सकते है- मिलकर फेक सकते है)
विशेष सलाह:
1. स्प्रे हमेशा सुबह या शाम के समय करें जब तापमान कम हो।
2. सिंचाई हल्की करें, पानी जमा न होने दें, क्योंकि कंद बनते समय अत्यधिक नमी से सड़न का खतरा रहता है।




