6. संतरा: फलों का आकार बढ़ाने के लिए सिक्वेंशियल-2+सुक्ष्म पोषकतत्व

संतरा: फलों का आकार बढ़ाने के लिए सिक्वेंशियल-2+सुक्ष्म पोषकतत्व

संतरा के फलों का आकार बढ़ाने के लिए सिक्वेंशियल-2 (10:20:40) और सुक्ष्म पोषकतत्वों का सही समय पर इस्तेमाल बहुत प्रभावी होता है। संतरा एक ऐसी फसल है जिसे “Heavy Feeder” कहा जाता है, यानी इसे विकास के लिए भरपूर पोषक तत्वों की जरूरत होती है।

1. सिक्वेंशियल- 2 की भूमिका

यह एक विशेष अनुपात वाला घुलनशील खाद है, जिसमें नाइट्रोजन (10%), फास्फोरस (20%) और पोटेशियम (40%) होता है।

  • पोटेशियम (40%) का महत्व: इसमें पोटेशियम की मात्रा सबसे अधिक है। पोटेशियम को “Quality Element” कहा जाता है। यह फलों के अंदर रस भरने, छिलके की मोटाई सही रखने और फलों का आकार (Diameter) बढ़ाने में मदद करता है।
  • फास्फोरस (20%): यह जड़ों को मजबूती देता है और ऊर्जा के स्थानांतरण (ATP) में मदद करता है, जिससे फल गिरने (Fruit Drop) की समस्या कम होती है।
  • नाइट्रोजन (10%): यह पौधे की पत्तियों को हरा-भरा रखता है ताकि वे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के जरिए पर्याप्त भोजन बना सकें।

कब इस्तेमाल करें?

जब फल का आकार ‘नींबू’ जितना हो जाए और वह ‘मैचुरेशन स्टेज’ (पकने की अवस्था) की ओर बढ़ रहा हो, तब इसका उपयोग सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।

2. मायक्रोमैक्स (सुक्ष्म पोषक तत्वों) की भूमिका

संतरे के लिए सूक्ष्म पोषक तत्व “विटामिन” की तरह काम करते हैं। इनके बिना मुख्य खाद (NPK) भी पूरा असर नहीं दिखा पाती।

A. जिंक (Zinc – Zn)

  • काम: यह हार्मोन (Auxin) के उत्पादन में मदद करता है। जिंक की कमी से पत्तियां छोटी हो जाती हैं और फल का साइज भी छोटा रह जाता है।
  • असर: इसके छिड़काव से फल की कोशिकाएं (Cells) तेजी से फैलती हैं, जिससे साइज बढ़ता है।

B. बोरोन (Boron – B)

  • काम: यह कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है और परागण (Pollination) को सुधारता है।
  • असर: यह फल को फटने (Fruit Cracking) से बचाता है और फलों में चमक लाता है। यह मिठास को भी बढ़ाता है।

C. मैग्नीशियम (Magnesium – Mg)

  • काम: यह क्लोरोफिल का मुख्य हिस्सा है।
  • असर: अगर मैग्नीशियम कम होगा, तो पत्तियां पीली पड़ जाएंगी और पेड़ फलों को पूरा पोषण नहीं दे पाएगा।

इन चीजो के ऊपर अवश्य ध्यान रखे

  1. फलों की छंटनी (Fruit Thinning) –

जब पेड़ पर बहुत अधिक मात्रा में संतरे लग जाते हैं, तो पेड़ सभी को पर्याप्त ऊर्जा नहीं दे पाता, जिससे फल छोटे रह जाते हैं।

  • क्या करें: जब फल छोटे (कंचे के आकार के) हों, तब एक ही जगह गुच्छों में लगे फलों में से कुछ को तोड़कर हटा दें। एक टहनी पर सीमित फल होने से उनका साइज बहुत अच्छा बनता है।
  1. 2. संतुलित खाद (Balanced Nutrition)
  • Micronutrients: जिंक, बोरोन और मैग्नीशियम की कमी से फल छोटे और सख्त हो जाते हैं। बाजार में मिलने वाले ‘मिक्स माइक्रोन्यूट्रिएंट’ का छिड़काव करें।
  1. 3. सिंचाई का सही तरीका

पानी की कमी से फल का छिलका सख्त हो जाता है और वह बढ़ता नहीं है।

  • नमी बनाए रखें: फल बढ़ने के दौरान मिट्टी में नमी का होना जरूरी है, लेकिन जलभराव (Waterlogging) न होने दें।
  • नियमितता: सिंचाई का एक समय तय करें। अचानक बहुत ज्यादा पानी देने से फल फटने (Fruit Cracking) लगते हैं।
  1. 4. छाँटनी कराना (Pruning)

पेड़ के अंदरूनी हिस्सों तक सूरज की रोशनी पहुँचना जरूरी है।

  • पेड़ के बीच की सूखी या आपस में उलझी हुई टहनियों को काट दें।
  • जो टहनियां जमीन को छू रही हों, उन्हें भी हटा दें ताकि पोषण ऊपर के फलों को मिले।
  1. 5. कीट और रोग से बचाव

‘थ्रिप्स’ और ‘माइट्स’ जैसे सूक्ष्म कीड़े फलों की ऊपरी सतह को नुकसान पहुँचाते हैं, जिससे फल का विकास रुक जाता है।

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कुछ अन्य जरूरी सावधानियां

  1. पानी का प्रबंधन: जब आप पोटेशियम और सूक्ष्म तत्व दे रहे हों, तो ध्यान रखें कि जमीन में पर्याप्त नमी हो। सूखे पेड़ पर इनका असर कम होता है।
  2. छिड़काव का समय: स्प्रे हमेशा सुबह 10 बजे से पहले या शाम को 4 बजे के बाद करें। तेज धूप में पत्तियों के जलने का डर रहता है।
  3. फलों की छंटनी (Thinning): यदि पेड़ पर फलों की संख्या बहुत ज्यादा है, तो कोई भी खाद चमत्कार नहीं कर सकती। अतिरिक्त फलों को निकाल दें ताकि बचे हुए फलों को ज्यादा खुराक मिले।

 

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