संतरे: फल गिराने से कैसे बचाए..
संतरे के पौधों में फलों का झड़ना (Fruit Drop) किसानों के लिए एक बड़ी समस्या हो सकती है। इसके पीछे मुख्य रूप से प्राकृतिक, पर्यावरणीय और पोषकतत्व प्रबंधन संबंधी कारण होते हैं।
- शारीरिक कारण
यह अक्सर पेड़ के अंदरूनी स्वास्थ्य और असंतुलन से जुड़ा होता है।
- हार्मोनल असंतुलन: संतरे के पेड़ में ‘ऑक्सिन’ (Auxin) नामक हार्मोन फलों को डंठल से जोड़े रखता है। जब पेड़ तनाव में होता है, तो ‘एब्सिसिक एसिड’ बढ़ जाता है और डंठल के पास एक “एब्शिशन परत” (Abscission layer) बन जाती है, जिससे फल गिर जाता है।
- अत्यधिक फलन (Over-bearing): यदि पेड़ पर जरूरत से ज्यादा फल लग जाएं, तो पेड़ सभी को पोषण नहीं दे पाता। वह अपने अस्तित्व को बचाने के लिए कमजोर फलों को गिरा देता है।
- तनाव
मौसम का प्रभाव संतरे पर बहुत जल्दी पड़ता है।
- तापमान का झटका: यदि फूल आने या फल सेट होने के समय तापमान अचानक 35°C-40°C से ऊपर चला जाए, तो फल झड़ने लगते हैं।
- नमी में उतार-चढ़ाव: अगर मिट्टी पूरी तरह सूख जाए और फिर आप अचानक बहुत ज्यादा पानी दे दें, तो फल के अंदर का दबाव (Turgor pressure) बढ़ जाता है, जिससे फल फटकर गिर जाते हैं।
- गर्म हवाएं: मई-जून या अक्टूबर की भी गर्म हवाएं फलों की नमी सोख लेती हैं, जिससे वे सूखकर गिर जाते हैं।
- कीट और बीमारियाँ (Pathological Factors)
यह सबसे खतरनाक कारण है क्योंकि यह पूरी फसल को तेजी से बर्बाद कर सकता है।
- स्टेम एंड रॉट (Stem End Rot): यह एक फंगस है जो फल और डंठल के मिलन बिंदु पर हमला करती है। यहाँ से फल काला पड़ने लगता है और गिर जाता है।
- फ्रूट सकिंग मोथ (Fruit Sucking Moth): यह पतंगा रात में सक्रिय होता है। यह अपनी सूंड से फल का रस चूसता है, जिससे उस छेद के रास्ते बैक्टीरिया अंदर चले जाते हैं और फल 2-3 दिन में पीला होकर गिर जाता है।
- सिट्रस सायला: यह छोटे कीट वायरस फैलाते हैं और पत्तों का रस चूसकर पेड़ को कमजोर कर देते हैं।
- पोषकतत्व की कमी: कैल्शियम के साथ सुक्ष्म पोषक तत्व भी फल गिरने में भूमिका निभाते है। कैल्शियम फलों के डंठल को लचीला और मजबूत बनाता है। जिंक पेड़ के भीतर ‘ऑक्सिन’ (Auxin) नामक हार्मोन बनाता है। यही हार्मोन फल को गिरने से रोकता है। या अन्य पोषकतत्व शारीरिक क्रियओंको बढ़ावा देने का काम करते हैं।
संतरे में फल झड़ने से रोकने के लिए कैलमेक्स गोल्ड (Calmax Gold) और प्लानोफिक्स (Planofix) का कॉम्बिनेशन बहुत प्रभावी है। ये दोनों दवाएं अलग-अलग तरीके से काम करती हैं और जब इन्हें साथ मिलाया जाता है, तो ये फल की पकड़ और सेहत दोनों को सुधारती हैं।
अ. कैलमेक्स गोल्ड
इसमें कैल्शियम, अमीनो एसिड और सुक्ष्म पोषक तत्व होते हैं। यह एक तरह का “टॉनिक” है।
- कैल्शियम: यह फल की कोशिका भित्ति (Cell Wall) को मजबूत करता है। अगर कैल्शियम सही मात्रा में हो, तो फल का छिलका मजबूत होता है और वह फटता नहीं है।
- अमीनो एसिड: यह पेड़ को तनाव (गर्मी या सूखे) से लड़ने की शक्ति देता है और प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) को बढ़ाता है।
- सूक्ष्म पोषक तत्व: ये फल के रंग, स्वाद और वजन में सुधार करते हैं।
ब. प्लॅनोफिक्स
(Planofix – NAA)
यह एक प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर (PGR) है जिसमें ‘अल्फा नेफ्थाइल एसिटिक एसिड’ होता है।
- कार्य: इसका मुख्य काम फल और डंठल के बीच बनने वाली “अलग होने वाली परत” (Abscission layer) को बनने से रोकना है।
- असर: यह डंठल को पेड़ की टहनी से मजबूती से जोड़कर रखता है, जिससे हवा या सामान्य तनाव से फल नहीं गिरते।
इन दोनों को मिलाकर स्प्रे करते है तो,
- प्लॅनोफिक्स डंठल की पकड़ को शारीरिक रूप से मजबूत करता है।
- कैलमेक्स गोल्ड अंदरूनी पोषण देकर फल को झड़ने से बचाता है और उसकी क्वालिटी सुधारता है।
स्प्रे करने का सही समय
संतरे में फल झड़ने से रोकने के लिए इसके दो स्प्रे सबसे अच्छे माने जाते हैं:
- पहला स्प्रे: जब फल चने या निम्बू के आकार के हों।
- दूसरा स्प्रे: पहले स्प्रे के 20-25 दिन बाद (जब फल थोड़े बड़े हो जाएं)।
महत्वपूर्ण सावधानियां:
- समय: स्प्रे हमेशा सुबह (10 बजे से पहले) या शाम को (4 बजे के बाद) करें। तेज धूप में स्प्रे न करें।
- साथ में अन्य कीटनाशक या फफुंदनाशक इसके साथ दुकानदार की सलाह से ले।


