5. कपास 45 से 50 दिन की अवस्था

कपास 45 से 50 दिन की अवस्था

कपास की फसल जब 45 से 50 दिन की अवस्था में होती है, तो यह फसल के जीवन का सबसे अहम मोड़ माना जाता है। इस समय पौधा ‘ग्रोथ फेज’ (बढ़वार के चरण) से निकलकर ‘रीप्रोडक्टिव फेज’ (फुल, कलियां और टिंडे बनने के चरण) में प्रवेश कर रहा होता है।

इस महत्वपूर्ण चरण में पोषकतत्वों और और खासकर फास्फोरस युक्त खाद के इस्तेमाल इस अवस्था में जरुरी है जिससे अधिक मात्रा में फुल एवं सेटिंग पा सके:

1. 45-50 दिन की अवस्था पर इस प्रबंधन की विशेष आवश्यकता क्यों है?
  • बदलता चरण: इस समय पौधे को अपनी शारीरिक बढ़वार (तने और शाखाओं का विस्तार) के साथ-साथ प्रजनन प्रणाली (फूल और कलियां बनाने) के लिए दोहरी ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  • पोषण की अधिक मांग: पिछले 45 दिनों में पौधे ने मिट्टी से बहुत सा भोजन खींच लिया होता है, जिससे कई बार जमीन में पोषक तत्वों की कमी या असंतुलन होने लगता है।
  • मौसम या खाद का तनाव: इस समय तक बारिश, धूप या तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण पौधे में हल्का पीलापन या कमजोरी दिखने लगती है, जिसे समय पर संभालना बहुत जरूरी होता है।
2. छिड़काव:

डीपी 98 (NPK 06:37:17) (फोलियर स्प्रे – पत्तियों पर छिड़काव)

  • फास्फोरस (P) का महत्व: इस अवस्था में फास्फोरस पौधे के अंदर ऊर्जा के आदान-प्रदान (Energy Transfer) को तेज करता है। यह नई कलियों और फूलों के निर्माण में सीधा सहयोग करता है।
  • पोटाश का जादुई असर: 45-50 दिन की फसल के लिए पोटाश सबसे महत्वपूर्ण तत्व है।
    • यह पौधे के तने को इतना मजबूत बनाता है कि वह आगे चलकर भारी संख्या में आने वाले टिंडों (Bolls) का वजन आसानी से सहन कर सके।
    • यह फूलों को कमजोर होकर गिरने (Flower Dropping) से रोकता है और फूलों के आकार को बड़ा करता है।
किंगफोल जिंक 70 % :
  • पीलापन और क्लोरोफिल: 45-50 दिन की उम्र में कई बार पौधे की निचली या नई पत्तियों के बीच पीलापन दिखने लगता है। चीलेटेड जिंक 70% तुरंत पत्तियों के अंदर जाकर क्लोरोफिल का निर्माण तेज करता है, जिससे पत्तियां गहरी हरी और चमकदार हो जाती हैं।
  • ग्रोथ हार्मोन (Auxin): जिंक पौधे में प्राकृतिक रूप से विकास हार्मोन को एक्टिव करता है, जिससे पौधे की साइड की शाखाएं (Sympodial Branches) तेजी से फूटती हैं। कपास में जितनी ज्यादा शाखाएं होंगी, आगे चलकर उतनी ही अधिक पैदावार मिलेगी।
हेनीग सोल्युशन:
  • फिक्स फास्फोरस की मुक्ति: किसान भाई खेत में डीएपी या अन्य खाद डालते हैं, लेकिन उसका एक बड़ा हिस्सा मिट्टी में मौजूद कैल्शियम, मैग्नीशियम या आयरन के साथ मिलकर रासायनिक रूप से ‘फिक्स’ (अघुलनशील) हो जाता है, जिसे पौधे चाहकर भी नहीं ले पाते।
  • IPE तकनीक का कमाल: यह तकनीक मिट्टी में बंद उस फिक्स और अघुलनशील फास्फोरस को तोड़कर पौधे की पहुँच में लाती है, जिससे बिना अतिरिक्त खाद बढ़ाए पौधे को भरपूर फास्फोरस मिलने लगता है।
  • सफेद जड़ों का विकास: इस तकनीक और हेनीग सोल्युशन के मेल से जमीन के अंदर हजारों की संख्या में नई और सक्रिय सफेद जड़ें निकलती हैं। जितनी अधिक सफेद जड़ें होंगी, पौधा उतनी ही तेजी से जमीन से पानी और अन्य सुक्ष्मपोषकतत्वों को खींचकर ऊपर पहुंचाएगा।
3. इससे होने वाले लाभ:
  1. फूलों और टिंडों की संख्या में भारी वृद्धि: तना मजबूत होने और सही समय पर पोटाश-फास्फोरस मिलने से पौधे पर फूलों का गुच्छा बनता है और उनका झड़ना बंद होता है।
  2. रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा: स्वस्थ जड़ें और हरी-भरी पत्तियां पौधे को कीटों और बीमारियों से लड़ने की अंदरूनी ताकत देती हैं।
  3. समान और मजबूत बढ़वार: पौधा एकतरफा लंबा होने के बजाय सुडौल, घना और मजबूत बनता है।
  4. अधिकतम उत्पादन: 45-50 दिन की इस महत्वपूर्ण अवस्था में यदि फसल को यह सटीक पोषण मिल जाए, तो आगे चलकर कपास के टिंडों का आकार, वजन और कुल उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचता है।
मात्रा :
छिडकांव :
  • डीपी 98: 2 मिली प्रती लीटर पानी
  • किंगफोल जिंक 70 % : 0.5 मिली प्रती लीटर पानी
ड्रिप या जमीन से :
  • हेनीग सोल्युशन: 3 किलो प्रती एकड़

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