फूल और फल सेटिंग अवस्था (75-90 दिन)
पपीते की फसल में 75 से 90 दिन की अवधि “उत्पादन की नींव” होती है। इस समय की गई एक छोटी सी गलती पूरी को बिगाड़ सकती है। इन अवस्था में जमीन से ओ’नील और स्प्रे में डीपी 98 के साथ कैलमेक्स गोल्ड इस अवस्था में आने वाले समस्याओं का समाधान हैं।
इसे विस्तार से समझते हैं:
1. पोषक तत्वों का प्रबंधन:
इस समय पौधे को फास्फोरस और पोटाश के उच्च संतुलन की आवश्यकता होती है।
- ओ’नील (00:40:39 + Fe + Mg):
- फास्फोरस (40%): यह फूलों को झड़ने से रोकता है और जड़ों को मजबूती देता है ताकि वे भारी फलों का बोझ उठा सकें।
- पोटाश (39%): यह फलों के आकार, चमक और मिठास के लिए जिम्मेदार है। साथ ही अधिक वृध्दी को नियंत्रित रखता है।
- आयरन (Fe) और मैग्नीशियम (Mg): मैग्नीशियम क्लोरोफिल बढ़ाता है, जिससे पत्तियां पीली नहीं पड़तीं। आयरन प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को सुचारू रखता है।
2. स्प्रे:
जड़ों के साथ-साथ पत्तियों के जरिए पोषण देना इस समय “बूस्टर” का काम करता है।
- डीपी 98: इसमें उच्च गुणवत्ता वाला फास्फोरस होता है जो तुरंत अवशोषित होकर ‘फूल से फल’ बनने की प्रक्रिया (Fruit Setting) को तेज करता है।
- कैलमेक्स गोल्ड (Calmex Gold): यह कैल्शियम, मैग्नीशियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों का मिश्रण है। यह फल की बाहरी त्वचा (Skin) को मजबूत बनाता है, जिससे फल फटते नहीं हैं और लंबे समय तक खराब नहीं होते।
3. प्रमुख चुनौतियाँ और उनका समाधान
- फूल और छोटे फलों का गिरना (Flower / Fruit Drop)
यह अक्सर बोरॉन या कैल्शियम की कमी और पानी के असंतुलन से होता है। कैलमेक्स गोल्ड का स्प्रे यहाँ ‘गोंद’ की तरह काम करता है जो फल को डंठल से चिपकाए रखता है।
- रस चूसक कीट (Thrips, Aphids, Mites)
ये कीट न केवल पत्तियों का रस चूसते हैं, बल्कि लीफ कर्ल वायरस (Leaf Curl Virus) के वाहक भी होते हैं।
- समाधान: इनके लिए एक प्रभावी कीटनाशक (जैसे Imidacloprid या Thiamethoxam या Fipronil या Isocycloseram या Flonicamid) का उपयोग करना अनिवार्य है। यदि कीट नियंत्रित नहीं हुए, तो वायरस पूरे बगीचे को नष्ट कर सकता है।
- वायरस की समस्या
पपीते में वायरस का कोई इलाज नहीं है, केवल बचाव है।
- कीटों को नियंत्रित रखें।
- प्रभावित पौधों को तुरंत उखाड़कर गहरा दबा दें।
मात्रा:
स्प्रे,
- डीपी 98: 2 मिली प्रती लीटर पानी
- कैलमेक्स गोल्ड: 2 मिली प्रती लीटर पानी
जमीन से,
- ओ’नील: 4 किलो प्रती एकड़
बेसल डोज 2: 75 – 90 दिन
पहिला महिने, तिसरा महिने, पाचवे महिने आणि सातवे महिने में देने वाला पहला बेसल डोज इसी अवस्था मे याने 90 दिन के लगभग दे। पपीते में खाद देने का सबसे सही तरीका ‘रिंग विधि’ है। तने से लगभग 1 से 1.5 फीट की दूरी पर गोलाकार गड्ढा बनाकर खाद दें और मिट्टी से ढंक दें।
विकल्प 1: (10:26:26 + यूरिया)
यदि आप मिश्रित खाद का उपयोग कर रहे हैं:
- 10:26:26 खाद: 200 ग्राम प्रति पौधा।
- यूरिया: 70 ग्राम प्रति पौधा।
विकल्प 2: (DAP + पोटाश + यूरिया)
यदि आप अलग-अलग खाद मिलाकर दे रहे हैं:
-
- DAP (18:46:0): 110 ग्राम प्रति पौधा।
- पोटाश (MOP): 85 ग्राम प्रति पौधा।
- यूरिया: 60 ग्राम प्रति पौधा।
महत्वपूर्ण सुझाव:
- तापमान का ध्यान: यदि तापमान 40°C से ऊपर जा रहा है, तो शाम के समय ही स्प्रे करें।
- पानी का संतुलन: इस दौरान मिट्टी में न तो बहुत ज्यादा कीचड़ होना चाहिए और न ही दरारें पड़नी चाहिए। नमी का स्तर एक समान (Uniform) रखें।



