बैंगन की फसल में रोपाई के 41 से 60 दिन का समय बेहद नाजुक और महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस स्टेज पर पौधा पूरी तरह से फूल और फल (Flowering & Fruiting Stage) की अवस्था में प्रवेश करता है।
इस अवस्था में पोषकतत्व प्रबंधन पर खास ध्यान देना जरुरी होता है,
** पहला डोज: फूल निकलने और सेटिंग में मदद (NPK 06:24:36 + Mg + TE)
घटक: लिबीग (NPK 06:24:36 + मैग्नीशियम + सुक्ष्मपोषकतत्व)
यह डोज पौधे के विकास को वानस्पतिक अवस्था से पूरी तरह से रिप्रोडक्टिव (फूल और फल) अवस्था की तरफ मोड़ने का काम करता है।
- उच्च पोटाश (36% K) और फास्फोरस (24% P): इस फॉर्मूले में पोटाश की मात्रा सबसे अधिक होती है, जो पौधों में फूलों की संख्या को तेजी से बढ़ाती है। पोटाश फूलों तक ऊर्जा और रस के संचार को बेहतर करता है, जिससे कलियां मजबूत बनती हैं।
- मैग्नीशियम (Mg) और सुक्ष्मपोषकतत्व (TE): मैग्नीशियम पौधों में प्रकाश संश्लेषण को तेज रखता है जिससे पत्तियों का हरापन बना रहता है और पौधे को भरपूर ऊर्जा मिलती है। सुक्ष्मपोषकतत्व फूलों के विकास में आने वाली किसी भी रुकावट को दूर करते हैं।
- फायदा: पौधे में अनगिनत फूल खिलने शुरू होते हैं और फूल से फल बनने (Flower Setting) की प्रक्रिया बहुत ही मजबूत होती है।
मात्रा:
- लिबीग: 4 किलो प्रती एकड़
** दूसरा डोज: फूल ड्रॉपिंग रोकना और मजबूत फल सेटिंग (बोरोनेटेड कैल्शियम नाइट्रेट)
घटक: मार्क सॉल्यूशन – बोरोनेटेड कैल्शियम नाइट्रेट (Calcium Nitrate + Boron)
फूल आने के बाद सबसे बड़ी समस्या फूलों का झड़ना (Flower Drop) होती है। यह डोज उस समस्या पर सीधा असर करता है।
- कैल्शियम (Calcium): यह बैंगन के फूलों के डंठल (Pedicel) और नई कोशिकाओं की सेल वॉल (Cell wall) को बेहद मजबूत बनाता है। मजबूत डंठल होने के कारण फूल हवा या हल्के झटके से झड़ते नहीं हैं।
- बोरान (Boron): बोरान एक बेहद जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट है जो परागण (Pollination) की प्रक्रिया को सफल बनाता है। यह परागकणों (Pollen grains) की जीवन क्षमता को बढ़ाता है और निषेचन (Fertilization) में मदद करता है।
- फायदा:
- फूलों की ड्रॉपिंग (Dropping) रुक जाती है।
- शत-प्रतिशत फूल स्वस्थ बैंगन के छोटे फलों (Fruit Setting) में बदलने लगते हैं।
- आगे चलकर बैंगन के फलों में फटने (Fruit cracking) की समस्या नहीं आती और फलों की चमक व गुणवत्ता बेहतरीन होती है।
मात्रा:
- मार्क सोल्युशन: 5 किलो प्रती एकड़
विशेष टिप: इन दोनों डोज के बीच कम से कम 7 से 10 दिन का अंतराल रखें। बेहतर परिणाम के लिए इन्हें ड्रिप इरिगेशन या मिट्टी में ड्रेंचिंग के माध्यम से दें, ताकि जड़ें इन्हें आसानी से अवशोषित कर सकें।


