लहसुन की फसल में 31 से 45 दिन का समय “ग्रैंड ग्रोथ पीरियड” (Grand Growth Period) कहलाता है। इस अवस्था में पौधा अपनी “शारीरिक बनावट” तैयार करता है।
इस अवस्था में,
- तीव्र कोशिका विभाजन
इस अवस्था में लहसुन की नई पत्तियां और तने के ऊतक बहुत तेजी से विकसित होते हैं।
- कैल्शियम का रोल (केलमैक्स गोल्ड): कैल्शियम “कोशिका भित्ति” (Cell Wall) के बीच में ‘कैल्शियम पेक्टेट’ के रूप में काम करता है, जो कोशिकाओं को आपस में जोड़कर रखता है। इसके बिना नई कोशिकाएं कमजोर रह जाती हैं, जिससे तना फटने (Splitting) की समस्या आती है।
- अमीनो एसिड: कोशिका विभाजन के लिए ऊर्जा और प्रोटीन की आवश्यकता होती है। अमीनो एसिड पौधे को तैयार “बिल्डिंग ब्लॉक्स” प्रदान करता है, जिससे पौधे को अपनी ऊर्जा खर्च नहीं करनी पड़ती और विकास की गति तेज बनी रहती है।
- तने का विकास और गर्दन की मजबूती
लहसुन का तना ही वह पाइपलाइन है जो भविष्य में बनने वाले कंद (Bulb) को भोजन पहुंचाएगा।
- फास्फोरस (डीपी 98 – 37%): फास्फोरस को पौधे का “पावर हाउस” (ATP) कहा जाता है। इस दौरान तने के आधार को चौड़ा करने और जड़ों से पोषक तत्वों को ऊपर खींचने के लिए जो जबरदस्त ऊर्जा चाहिए, वह फास्फोरस से मिलती है।
- पोटाश (17%): यह तने की कोशिकाओं में पानी के दबाव (Turgor Pressure) को नियंत्रित करता है, जिससे तना सीधा और ठोस रहता है।
- पत्तियों का विकास और गहरा हरापन (Photosynthesis Boost)
जितनी ज्यादा और चौड़ी पत्तियां होंगी, पौधा उतना ही ज्यादा भोजन (Sugar/Starch) बनाएगा।
- क्लोरोफिल निर्माण: अल्बर्ट सॉल्यूशन और केलमैक्स गोल्ड में मौजूद मैग्नीशियम, आयरन और जिंक सीधे क्लोरोफिल के केंद्र में काम करते हैं। इससे पत्तियों का रंग “लहराता हरा” (Deep Green) हो जाता है।
- पत्तियों का विकास : संतुलित पोषण से पत्तियों की लंबाई और चौड़ाई दोनों बढ़ती है, जिससे सूरज की रोशनी सोखने के लिए बड़ा “सोलर पैनल” तैयार हो जाता है।
- जड़ों का जबरदस्त विकास: अल्बर्ट सॉल्यूशन में मौजूद संतुलित NPK और सूक्ष्म तत्व सफेद जड़ों के विकास को प्रेरित करते हैं। जड़ें जितनी गहराई तक जाएंगी, जमीन से उतना ही ज्यादा भोजन और पानी उठा सकेंगी।
- संपूर्ण पोषण (Multi-Nutrients): इस अवस्था में केवल यूरिया या DAP काफी नहीं होता। अल्बर्ट सॉल्यूशन में मौजूद मैग्नीशियम, सल्फर और अन्य सूक्ष्म तत्व पौधे की आंतरिक क्रियाओं (Enzymatic activities) को तेज करते हैं।
- आंतरिक शारीरिक क्रियाएं (Physiological Activities)
इस दौरान पौधे के भीतर एन्झाईम की सक्रियता चरम पर होती है।
- पोषक तत्वों का संचार: अल्बर्ट सोल्युशन में मौजूद दुय्यम (Secondary) और सुक्ष्म (Micro) पोषक तत्व मिट्टी की संरचना में सुधार करते हैं और मुख्य पोषक तत्वों (NPK) की उपलब्धता को बढ़ाते हैं।
- प्रतिरोधक क्षमता: कैल्शियम और सल्फर (अल्बर्ट सोल्युशन से) मिलकर पौधे की बाहरी त्वचा को सख्त बनाते हैं, जिससे रस चूसने वाले कीट (जैसे थ्रिप्स) और फफूंद का हमला कम होता है।
| क्रिया | प्रभाव |
| कोशिका विभाजन | कैल्शियम की वजह से कोशिकाएं मजबूत और व्यवस्थित रहती हैं। |
| तने का विकास | फास्फोरस तने को “स्टोरेज टैंक” की तरह मजबूत बनाता है। |
| हरापन | सुक्ष्मपोषकतत्वों से फोटोसिंथेसिस 25-30% तक बढ़ जाता है। |
| शारीरिक क्रिया | अमीनो एसिड तनाव को कम कर वृद्धि को निरंतर रखता है। |
मात्रा:
छिड़काव,
- डीपी 98: 2 मिली प्रति लिटर पानी.
- केलमैक्स गोल्ड: 2 मिली प्रति लिटर पानी.
जमीन से,
- अल्बर्ट सोल्युशन: 4 किलो प्रती एकड़
विशेष सलाह:
- सिलिकॉन स्टीकर: लहसुन की पत्तियां चिकनी होती हैं, इसलिए स्प्रे में सिलिकॉन आधारित स्टीकर जरूर मिलाएं ताकि कैल्शियम और अमीनो एसिड पत्तियों के अंदर जा सकें।
- नमी प्रबंधन: ग्रैंड ग्रोथ पीरियड में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। मिट्टी में हमेशा हल्की नमी (वाफसा) बनाए रखें ताकि खाद जड़ों से पौधे के अंदर तक पहुंचे।
- गर्दन की मोटाई (Neck Thickness): लहसुन में इस दौरान ध्यान दें कि तना (गर्दन) बहुत ज्यादा पतला न रहे। आपका यह कॉम्बिनेशन कैल्शियम और पोटाश के कारण तने को “कॉम्पैक्ट और ठोस” रखेगा।
- थ्रिप्स का हमला: ग्रैंड ग्रोथ के दौरान कोमल पत्तियों पर थ्रिप्स (Thrips) का हमला सबसे ज्यादा होता है। अपने स्प्रे में एक अच्छा कीटनाशक (यदि जरूरत हो) मिला सकते हैं।



