1. पपीता: ग्रोथ एवं बढ़वार (पहला चरण: 0-15 दिन)

ग्रोथ एवं बढ़वार (पहला चरण: 0-15 दिन)

पपीते पौधों का पहला चरण (0-15 दिन) सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह उनकी नींव तैयार करने का समय है।

इस समय में, पौधे को

1. जड़ का विकास

इस चरण में पौधा अपनी ऊर्जा ऊपर बढ़ने में नहीं, बल्कि जमीन के नीचे जड़ तंत्र (Root System) विकसित करने में लगाता है।

A. मुख्य पोषकतत्व इस अवस्था में फास्फोरस
  • फास्फोरस (P): यह जड़ों की कोशिका विभाजन (Cell division) के लिए जिम्मेदार है। शुरुआत में फास्फोरस मिलने से जड़ें गहराई तक जाती हैं, जिससे पौधा भविष्य में पोषकतत्वों को बेहतर तरीके से सोख पाता है।
  • ह्युमिक ऐसिड: यह कोई खाद नहीं है, बल्कि एक “सोईल कंडीशनर” है। यह मिट्टी को भुरभुरा बनाता है और सफेद जड़ों (White roots) के निर्माण में मदद करता है। यह मिट्टी में फंसे हुए पोषकतत्वों को खींचकर जड़ों तक पहुँचाता है।
2. पत्तियों में हरापन और तनाव प्रबंधन (छिड़काव)

नन्हे पौधे तेज धूप और मौसम के बदलाव के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं।

  • बायो-20 (सीवीड) : यह समुद्री शैवाल से बना होता है जिसमें सूक्ष्मपोषकतत्व और हार्मोन्स (Auxins, Cytokinins) होते हैं। यह पौधे को “एंटी- स्ट्रैस” शक्ति देता है ताकि वह तेज धूप या ठंड को सह सके।
  • किंगफोल जिंक 70 (जिंक) : जिंक पौधों में ‘औक्सिन’ हार्मोन बनाने में मदद करता है, जो तने की लंबाई और पत्तियों के आकार को नियंत्रित करता है। जिंक की कमी से पत्तियां छोटी और पीली रह जाती हैं।
3. प्रमुख समस्या: डैम्पिंग ओफ और जड़ गलन

शुरुआती 15 दिनों में सबसे ज्यादा नुकसान इसी बीमारी से होता है। इसमें पौधा अचानक जमीन के पास से गलकर गिर जाता है।

कारण और पहचान :
  • मिट्टी में नमी का बहुत ज्यादा होना।
  • मिट्टी में मौजूद हानिकारक फफूंद (Fungi) जैसे Pythium या Rhizoctonia।
समाधान:
  1. थायोफेनेट मिथाईल (Thiophenate Methyl): यह एक प्रणालीगत फफूंदनाशक (Systemic Fungicide) है। यह पौधे के अंदर जाकर फफूंद को खत्म करता है।
  2. पानी का प्रबंधन: मिट्टी को हर समय कीचड़ जैसा न रखें। केवल नमी बनाए रखें।
  3. सावधानी: यदि एक पौधा मर रहा है, तो उसके आसपास के स्वस्थ पौधों पर भी फफूंदनाशक की ड्रेंचिंग तुरंत करें।
मात्रा:
 ड्रेंचिंग / ड्रिप से,
  • बेरी 48 (NPK 14:48:00): 3 किलो प्रति एकड़। (इसमें उच्च मात्रा में फास्फोरस (48%) है।)
  • ह्यूमिक ऐसिड: 500 ग्राम प्रति एकड़।
  • थायोफेनेट मिथाईल (70% WP): 500 ग्राम प्रति एकड़।
छिड़कांव,
·        बायो-20 (सीवीड) : 2 मिली प्रति लिटर पानी.
·        किंगफोल झिंक 70 (जिंक) : आधा मिली प्रति लिटर पानी.

 

विशेष सुझाव:
  • समय : छिड़कांव या ड्रेंचिंग हमेशा सुबह जल्दी या शाम को ढलते सूरज के समय करें। दोपहर की तेज धूप में छिड़कांव करने से पत्तियां जल सकती हैं।
  • सावधानी : खाद और कीटनाशकों को मिलाते समय ध्यान दें कि वह एक-दूसरे के साथ प्रतिक्रिया न करें।
  • ऊपर एक ड्रेंचिंग और एक छिड़कांव दिया है, यह इस अवस्था में पर्याप्त है।

berry 48

bio 20

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