8. लहसुन 90 दिन बाद पत्तियों का कस कंद में कैसे उतारे?

लहसुन 90 दिन बाद पत्तियों का कस कंद में कैसे उतारे ?

लहसुन में 90 दिन बाद की अवस्था को ‘मैच्योरिटी ट्रान्जीशन’ कहा जाता है। आपका मुख्य उद्देश्य “पत्तियों का कस (रस / ऊर्जा) कंद में उतारना” है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘Photosynthate Translocation या सोर्स सिंक रिलेशनशिप’ कहते हैं।

इस उद्देश्य के लिए सिक्वेन्शियल-2 और जेरार्ड सोल्युशन इसपे बेहतरीन काम करते है, क्योंकि इस समय पौधे को ‘नाईट्रोजन’ की कम और ‘पोटाश’ की उच्चतम आवश्यकता होती है।

1. पत्तियों का कस कंद में उतारना:

इस अवस्था में पत्तियां केवल भोजन बनाने का कारखाना नहीं रहतीं, बल्कि वे खुद “भोजन का स्रोत” बन जाती हैं। पत्तियों में जमा हुआ कार्बोहाइड्रेट और शर्करा (Sugar) पाइपलाइन के जरिए नीचे कंद में जाता या जाती है।

  • पोटाश (K) का काम: पोटाश इस पाइपलाइन का ड्राइवर है। यह पत्तियों से रस खींचकर कंद की कोशिकाओं में भर देता है।
  • मैग्नीशियम (Mg) का काम: जेरार्ड सोल्यूशन में मौजूद मैग्नीशियम यह सुनिश्चित करता है कि जब तक आखिरी बूंद रस कंद में न उतर जाए, तब तक पत्तियां पूरी तरह सूखकर गिरें नहीं (यानी क्लोरोफिल बना रहे)।
2. सिक्वेन्शियल-2 (10:20:40 + सूक्ष्मपोषकतत्व) – स्प्रे के लाभ
  • 10:20:40 का अनुपात: कम नाईट्रोजन (10) वानस्पतिक वृद्धि को रोकता है, जबकि 40% पोटाश सीधा कंद के फुलाव पर काम करता है।
  • कलियों की सैटिंग: इसमें मौजूद 20 % फास्फोरस कलियों (Cloves) को एक-दूसरे के साथ मजबूती से जोड़ता है, जिससे कंद ठोस बनता है और उसमें “खोखलापन” नहीं आता।
  • तीखापन: सूक्ष्मपोषकतत्व सल्फर युक्त एन्झाईमो को सक्रिय करते हैं, जिससे लहसुन का तीखापन और गंध (Aroma) बढ़ती है।
3. जेरार्ड सोल्युशन (5:8:40 + मैग्नीशियम ) – जमीन से कार्य

जमीन से पोटाश देने का यह सही समय है क्योंकि कंद अब मिट्टी के दबाव के खिलाफ फैल रहा होता है।

  • उच्च पोटाश (40): यह जड़ों के माध्यम से पौधे के ओस्मोटिक दबाव (Osmotic pressure) को नियंत्रित करता है। इससे कंद का आकार और वजन तेजी से बढ़ता है।
  • ऊपरी परत (पर्दा) की बनावट: यह खाद कंद के ऊपर की परतों को लचीला और चमकदार बनाती है। इससे कटाई के समय पर्दा फटता नहीं है।
  • मैग्नीशियम की भूमिका: यह पत्तियों के पीलेपन को ‘मैच्योरिटी’ की तरफ ले जाता है न कि ‘बीमारी’ की तरफ। यह ऊर्जा के परिवहन (Energy Transfer) में ATP के साथ मिलकर काम करता है।

 

4. इस अवस्था में शारीरिक क्रियाएँ
क्रिया प्रभाव लाभ
शुगर लोडिंग अनलोडिंग पत्तियों का अर्क कंद में जमा होना कंद का वजन और ठोसपन बढ़ना।
सेल एक्सपानशन कोशिकाओं का आकार बढ़ना कंद का घेरा (Size) बड़ा होना।
सेकेंडरी मेटाबोलाइट्स एलिसिन (Allicin) का निर्माण लहसुन में तेज गंध और औषधीय गुण बढ़ना।
परत सुदृढ़ीकरण सेल वॉल का मजबूत होना भंडारण क्षमता (Storage life) में वृद्धि।
5.मात्रा:

मात्रा :

स्प्रे,

  • सिक्वेन्शियल-2:  2 मिली प्रति लिटर पानी.

जमीन से,

  • जेरार्ड सोल्युशन: 4 किलो प्रती एकड़
6. महत्वपूर्ण सुझाव
  • पानी का प्रबंधन: इस अवस्था में हल्का तनाव (Stress) कभी-कभी अच्छा होता है, लेकिन बहुत ज्यादा सूखा पड़ने पर कंद का छिलका ढीला हो सकता है। हल्की सिंचाई जारी रखें।
  • अंतिम स्प्रे: सिक्वेन्शियल-2 का स्प्रे तब करें जब धूप नरम हो, ताकि पत्तियों के रंध्र (Stomata) खुले हों और अवशोषण पूरा हो।

(जेरार्ड सोल्युशन और सिक्वेन्शियल-2 का यह कॉम्बो “पत्तियों के कस” को पूरी तरह निचोड़कर कंद में डाल देगा, जिससे आपको भारी, चमकदार और ठोस लहसुन प्राप्त होगा।)

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