कंदों के विकास का सबसे अहम समय: जानिए आलू में 30वें दिन कैल्शियम-बोरान छिड़काव के फायदे..

अंकुरण के 30 दिन बाद आलू की फसल एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर होती है जहाँ ज़मीन के अंदर नन्हे कंदों (Tubers) का बनना और उनका आकार लेना शुरू हो जाता है। इस नाज़ुक और महत्वपूर्ण समय पर आलू की त्वचा और आंतरिक मजबूती के लिए सबसे ज्यादा जरूरत होती है—कैल्शियम और बोरान की। इस अवस्था में किया गया कैल्शियम और बोरान का यह खास स्प्रे आपके आलू की क्वालिटी को सुधारने में एक सुरक्षा कवच का काम करता है। आइए जानते हैं इस चरण के और भी बड़े और जरूरी फायदे क्या हैं!

इस अवस्था में केवल कैल्शियम + बोरान का छिड़काव करने से आलू की फसल को जबरदस्त और अचूक लाभ मिलते हैं:

  1. कंदों (Tubers) की त्वचा का मजबूत और चिकना होना:
    • इस समय ज़मीन के भीतर छोटे-छोटे आलू बनना शुरू होते हैं। कैल्शियम कंदों की कोशिकाओं की दीवारों (Cell Walls) को बेहद मजबूत बनाता है, जिससे आलू की स्किन सख्त और रोग-प्रतिरोधी बनती है।
  2. स्कैब (खुरदरेपन) और फटने की समस्या से पक्की सुरक्षा:
    • आलू की फसल में इस अवस्था में कैल्शियम की कमी से ‘स्कैब’ (खुरदरे धब्बे) या आलू के फटने (Internal/External cracking) जैसी दिक्कतें आती हैं। बोरॉन इन दोनों तत्वों को पौधे के हर हिस्से और खास तौर पर कंदों तक पहुँचाने में मुख्य ट्रांसपोर्टर का काम करता है, जिससे आलू बिल्कुल साफ और सुंदर निकलता है।
  3. पौधे के आंतरिक हिस्सों में पोषक तत्वों का परिवहन (Translocation):
    • बोरान पत्तियों द्वारा बनाए गए भोजन, शर्करा (Sugars) और अन्य हार्मोन्स को पौधे के ऊपरी हिस्सों से खींचकर सीधे ज़मीन के अंदर बन रहे आलू (कंदों) तक पहुँचाने का काम तेजी से करता है। इससे आलू का आकार (Size) जल्दी और एकसमान बढ़ता है।
  4. कोशिका विभाजन में तेजी:
    • कैल्शियम पौधे और कंदों दोनों में नई कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ावा देता है, जिससे आलू का वजन और उसकी गुणवत्ता दोनों में जबरदस्त सुधार होता है।

मात्रा:

छिड़कांव:

  • सीए + बी: 2 मिली प्रती लीटर पानी

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