26वें दिन खीरे की ग्रोथ कंट्रोल करने का तरीका

खीरा के 26वें दिन यदि पौधे में वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative Growth – यानी केवल बेल और पत्तियाँ अत्यधिक तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन फूल या फल नहीं टिक रहे हैं) ज्यादा हो रही है, तो जेरार्ड सोल्युशन (5:8:40 + Mg + S) (कम नाईट्रोजन और उच्च पोटाश वाला वाटर सोल्युबल फर्टिलाइजर) इस पर बहुत प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाता है।

इस फर्टिलाइजर की कार्य-प्रणाली (Mechanism) पौधे के विकास को नियंत्रित करने के लिए इस प्रकार काम करती है:

  1. नाईट्रोजन की कम मात्रा (Low Nitrogen – 5 %)
  • नाईट्रोजन (N) पौधों में नई पत्तियों, शाखाओं और तनों के विकास को सबसे ज्यादा तेज करती है।
  • इसमें नाईट्रोजन केवल 5% है। जब नाईट्रोजन की आपूर्ति सीमित हो जाती है, तो पौधे को वह ‘पोषक खुराक’ मिलना बंद हो जाती है जो उसे अनियंत्रित रूप से लंबा बना रहा होता है। इससे अनावश्यक बेलों का बढ़ना अपने आप धीमा हो जाता है।
  1. पोटाश (Potassium – 40%) की उच्च मात्रा और उसका असर
  • ऊर्जा का दिशा-परिवर्तन (Energy Shift): पोटाश पौधे की ऊर्जा और भोजन को पत्तियों-तनों से खींचकर फूलों, फलों और मजबूत जड़ों की तरफ डायवर्ट कर देता है।
  • कोशिका भित्ति (Cell Wall) को मजबूत करना: पोटाश पौधे की कोशिकाओं की दीवारों को सख्त और मजबूत बनाता है। इसके प्रभाव से तने और बेलें कमजोर और लंबी होने के बजाय मोटी, मजबूत बनती हैं।
  • ऑस्मोरेगुलेशन: यह पौधे के भीतर पानी और रस के दबाव को नियंत्रित करता है, जिससे कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा लंबी नहीं खींचतीं और लंबाई रुककर मोटाई व मजबूती बढ़ती है।
  1. फास्फोरस (Phosphorus – 8%) की भूमिका
  • फूलों का विकास (Flower Bud Differentiation): फास्फोरस पौधे में वानस्पतिक वृद्धि को रोककर फूलों की कलियों (Flower Buds) के निर्माण को ट्रिगर करता है। जब पौधा फूल और फल देने की अवस्था में आता है, तो उसकी सारी ऊर्जा बेल बढ़ाने के बजाय फल सेट करने में लगने लगती है।
  1. मैग्नीशियम (Mg) और सल्फर (S) का संतुलन
  • स्वस्थ चयापचय: मैग्नीशियम प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) को तेज करता है और सल्फर प्रोटीन निर्माण में मदद करता है। ये दोनों तत्व पत्तियों को हरा-भरा और स्वस्थ रखते हैं, लेकिन अवांछित और कमजोर वानस्पतिक फैलाव नहीं होने देते।

यह फर्टिलाइजर पौधे को ‘वेजिटेटिव फेज‘ (केवल बढ़वार वाले चरण) से निकालकर ‘रिप्रोडक्टिव फेज‘ (फूल और फल वाले चरण) में धकेलता है। इससे बेलों की बेलगाम रफ्तार रुकती है, तना मजबूत होता है और खीरे की फसल में मादा फूलों की संख्या बढ़ने में मदद मिलती है।

मात्रा:

जेरार्ड सोल्युशन: 3-4 किलो प्रती एकड़

gerard

Hi
Share

Leave a Comment