ग्रोथ एवं बढ़वार (दूसरा चरण: 16-45 दिन)
इस समय पौधा अपनी वनस्पति (Vegetative) वृद्धि करता है। लेकिन अत्यधिक वानस्पतिक वृध्दी पपीते की फसल में हानिकारक होती है तो इसके लिए नायट्रोजन युक्त खाद का इस्तमाल ना के बराबर करना होता है। लेकिन हरापन बनाये रखने के लिए स्प्रे से जो स्पेशलिटी उत्पाद आते है उससे नायट्रोजन की पूर्ति हो जाती है।। इस अवस्था में नाइट्रोजन को नियंत्रित रखकर फास्फोरस, पोटैशियम और मैग्नीशियम पर ध्यान देना बहुत ही महत्वपूर्ण है।
यहाँ इन पोषक तत्वों भूमिका:
- कम नाइट्रोजन की भूमिका
पपीते में इस अवस्था में अगर यूरिया या नाइट्रोजन ज्यादा दिया जाए, तो पौधा “लम्बा और कोमल” (Succulent) हो जाता है।
- मजबूत कोशिकाएं: कम नाइट्रोजन देने से कोशिका भित्ति (Cell walls) मोटी रहती हैं, जिससे तना सख्त बनता है।
- रोग प्रतिरोधकता: कोमल पौधों पर कीट (जैसे थ्रिप्स, एफिड्स) और वायरस जल्दी हमला करते हैं। नाइट्रोजन कम रखने से पौधा अंदर से मजबूत रहता है।
- फास्फोरस (Potassium – 00:40:39 – ओ’नील और 06:24:36 – लिबीग)
- जड़ों का जाल: फास्फोरस का मुख्य काम जड़ों का विस्तार करना है। जितनी गहरी और घनी जड़ें होंगी, पौधा उतना ही स्थिर रहेगा।
- ऊर्जा का संचार (ATP): यह पौधे के भीतर ऊर्जा के पैकेट बनाता है, जिससे आगे चलकर फूल आने की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
- पोटैशियम (Potassium – 00:40:39 – ओ’नील और 06:24:36 – लिबीग)
इस अवस्था में पोटाश सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है:
- तने की मोटाई: यह तने के जाइलम और फ्लोएम (नसों) को चौड़ा करता है, जिससे तना “बांस” जैसा मजबूत और मोटा होता है।
- पानी का प्रबंधन: यह रंध्रों (Stomata) को नियंत्रित करता है, जिससे तेज धूप में भी पौधा मुरझाता नहीं है।
- मैग्नीशियम (Magnesium – Mg)
चूंकि आप नाइट्रोजन कम दे रहे हैं, इसलिए पौधे में हरापन बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी मैग्नीशियम की होती है।
- क्लोरोफिल का केंद्र: मैग्नीशियम क्लोरोफिल अणु का मुख्य हिस्सा है। बिना इसके पत्तियां पीली पड़ जाएंगी और भोजन (Photosynthesis) नहीं बना पाएंगी।
- पत्तियों का आकार: यह पत्तियों को चौड़ा और गहरा हरा बनाने में मदद करता है।
- आयरन (Iron – Fe) और सूक्ष्म पोषक तत्व
- एंजाइम एक्टिवेशन: आयरन पौधे के भीतर श्वसन और प्रोटीन बनाने की प्रक्रिया में उत्प्रेरक का काम करता है।
- नयी कोपलों की सुरक्षा: आयरन की कमी से पौधे की ऊपर की नयी पत्तियां सफेद या पीली होने लगती हैं। Fe युक्त खाद देने से नयी ग्रोथ स्वस्थ निकलती है।
मात्रा:
ड्रिप से,
- ओ’नील (00:40:39+ Fe+ Mg): 4 किलो (ड्रेचिंग या ड्रिप से)।
- लिबीग (00:24:36+ Mg): 4 किलो (ड्रेचिंग या ड्रिप से)।
(दोनों को पंधरा दिन के अंतराल से 1-1 बार चलाए )
इस अवस्था के लिए बेसल डोज
बेसल डोज 1: 35 – 40 दिन मे
पहिला महिने, तिसरा महिने, पाचवे महिने आणि सातवे महिने देने वाला पहला बेसल डोज इसी अवस्था मे याने 40 दिन के लगभग दे। पपीते में खाद देने का सबसे सही तरीका ‘रिंग विधि’ है। तने से लगभग 1 से 1.5 फीट की दूरी पर गोलाकार गड्ढा बनाकर खाद दें और मिट्टी से ढंक दें। 40वें दिन की खुराक सबसे महत्वपूर्ण होती है।
विकल्प 1: (10:26:26 + यूरिया)
यदि आप मिश्रित खाद का उपयोग कर रहे हैं:
- 10:26:26 खाद: 200 ग्राम प्रति पौधा।
- यूरिया: 70 ग्राम प्रति पौधा।
विकल्प 2: (DAP + पोटाश + यूरिया)
यदि आप अलग-अलग खाद मिलाकर दे रहे हैं:
- DAP (18:46:0): 110 ग्राम प्रति पौधा।
- पोटाश (MOP): 85 ग्राम प्रति पौधा।
- यूरिया: 60 ग्राम प्रति पौधा।


