मिर्च की फसल में 63-65 दिन की अवस्था वह समय होता है जब पौधा फूल आने (flowering) और फल बनने (fruiting) की दोनों अवस्था एकसाथ होती है। इस समय केलमैक्स गोल्ड और 6:37:17 (डीपी 98) का संयोजन फसल की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने में बहुत प्रभावी भूमिका निभाता है।
- केलमैक्स गोल्ड: (कैल्शियम + अमीनो एसिड + सुक्ष्मपोषकतत्व)
मिर्च में इस अवस्था पर कैल्शियम की कमी से फूल झड़ने लगते हैं और फलों का निचला हिस्सा सड़ने (Blossom End Rot) की समस्या आती है।
- फलों की मजबूती: कैल्शियम कोशिका भित्ति (cell wall) को मजबूत बनाता है, जिससे मिर्च का छिलका मोटा और चमकदार बनता है। इससे भंडारण क्षमता (shelf life) बढ़ती है।
- तनाव से बचाव: अमीनो एसिड एक ‘बायो-स्टिमुलेंट’ की तरह काम करता है। यह तपती गर्मी या अचानक होने वाले मौसम बदलाव के प्रति पौधे की सहनशक्ति बढ़ाता है।
- फूलों का टिकना: यह परागण (pollination) की प्रक्रिया में सुधार करता है, जिससे फूलों का झड़ना कम हो जाता है।
- डीपी 98 (6:37:17)
यह एक उच्च फास्फोरस वाला उर्वरक है जिसमें पोटाश की भी अच्छी मात्रा होती है।
- फास्फोरस (37%) का महत्व: इस समय पौधे को ऊर्जा के संचरण और जड़ों की सक्रियता के लिए फास्फोरस की बहुत आवश्यकता होती है। यह फूलों के गुच्छे बनाने में मदद करता है।
- पोटाश (17%) का महत्व: पोटाश फलों के आकार, वजन और मिर्च के तीखेपन (Capsaicin content) को बढ़ाने में सहायक है।
- कम नाईट्रोजन (6%): इस अवस्था पर अधिक नाईट्रोजन देने से पौधा सिर्फ बढ़वार करता रहता है और फल कम लगते हैं। 6% नाईट्रोजन संतुलन बनाए रखने के लिए पर्याप्त है।
दिनों का एकसाथ इस्तेमाल करणे से…..
- फूलों की संख्या में वृद्धि होती है और वे गिरते नहीं हैं।
- मिर्च की लंबाई और मोटाई एकसमान होती है।
- पौधा रस चूसक कीटों और वायरस के प्रति अधिक सहनशील बनता है।
- फलों में चमक और गहरा रंग आने के कारण बेहतर दाम मिलते हैं।
मात्रा:
छिडकाव:
- केलमैक्स गोल्ड: 2 मिली प्रति लीटर पानी
- डीपी 98 (6:37:17): 2 मिली प्रति लीटर पानी
सावधानी: दोनों के साथ अन्य किटनाशक और फफूंदनाशक को मिलाने से पहले एक छोटे बर्तन में घोल बनाकर देख लें कि वे आपस में फट तो नहीं रहे हैं (Compatibility test), वैसे सामान्यतः इन्हें साथ दिया जा सकता है।


