करेला की फसल में अंकुरण के बाद 11वें दिन पौधे की शारीरिक बनावट, जड़ों का फैलाव और पत्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही होती है। इस अहम अवस्था में पत्तियों पर बायो-20 का स्प्रे और जमीन से अल्बर्ट सोल्युशन देना, पौधे को संपूर्ण पोषण, ऊर्जा और मजबूती प्रदान करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। आइए इसके फायदों और इस्तेमाल को विस्तार से समझते हैं:
1. छिड़कांव: बायो-20
(NPK 20:20:20 + सुक्ष्मपोषकतत्व + सीवीड़ + हार्मोन)
11वें दिन बायो-20 का स्प्रे करने से पौधे को तुरंत ऊर्जा और पोषण मिलता है,
- संतुलित NPK (20:20:20): इस अवस्था में करेला के पौधे को मुख्य रूप से नाईट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की समान और भरपूर जरूरत होती है। इससे नई पत्तियों का आकार बढ़ता है और पौधे की शुरुआती शारीरिक बनावट मजबूत होती है।
- सीवीड़ (Seaweed) और हार्मोन: यह पौधे में प्राकृतिक हार्मोन्स को सक्रिय करते हैं, जिससे नई शाखाओं (Laterals/Runners) के फूटने की प्रक्रिया तेज होती है और पौधा तनाव मुक्त रहता है।
- सुक्ष्मपोषकतत्व (Micronutrients): जिंक, आयरन, बोरान आदि तत्व पौधे की अंदरूनी कार्यप्रणाली को सुधारते हैं, जिससे पत्तियों में पीलापन नहीं आता और क्लोरोफिल का निर्माण तेजी से होता है।
2. जमीन के रास्ते: अल्बर्ट सोल्यूशन (Albert Solution)
(NPK 10:09:16 + कैल्शियम + मैग्नीशियम + सल्फर + सुक्ष्मपोषकतत्व)
11 दिन के नन्हे करेला के पौधों को ड्रिंचिंग (Drenching) या खाद के जरिए जमीन में देने से निम्नलिखित जबरदस्त लाभ मिलते हैं:
- कैल्शियम (CaO): यह करेला के पौधे की सेल वाल (Cell Wall/कोशिका भित्ति) को मजबूत करता है। इससे तना कड़ा और मजबूत बनता है, जिससे पौधा हवा या हल्की आंधी में झुकता या टूटता नहीं है।
- मैग्नीशियम (Mg): यह क्लोरोफिल का मुख्य घटक है। जमीन से मिलने पर यह पत्तियों को गहरी हरी और चमकदार बनाए रखता है, जिससे पौधा सूर्य के प्रकाश (Photosynthesis) से अधिक भोजन बना पाता है।
- सल्फर (S): जड़ों के आसपास के क्षेत्र (Rhizosphere) को सुधारता है, जड़ों की वृद्धि में मदद करता है और पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है।
- पोटाश (16% K) और संतुलित NPK: इस अवस्था में हल्का पोटाश जड़ों के विकास और तने को मजबूती देने के साथ-साथ पौधे को मिट्टी से अन्य पोषक तत्वों को खींचने में सक्षम बनाता है।
इस अवस्था में,
- मजबूत रूट ज़ोन (Root System): जमीन के नीचे अल्बर्ट सोल्युशन और ऊपर बायो-20 के प्रभाव से सफेद जड़ों का जाल बहुत तेजी से फैलेगा।
- पौधा कमजोर और लंबा होकर गिरेगा नहीं, बल्कि उसका तना मोटा और मजबूत होगा।
- तेजी से फुटाव: करेला में आगे चलकर बेल और शाखाएं निकलने की प्रक्रिया बहुत शानदार होगी, जो बंपर पैदावार की मजबूत नींव रखेगी।
मात्रा
छिड़कांव
- बायो 20: 2 मिली प्रती लीटर
जमीन से,
- अल्बर्ट सोल्युशन: 3 किलो प्रती एकड़


