11. अदरक की खुदाई (Harvesting) से 1 महीना पहले से क्या दे?

अदरक की खुदाई से 1 महीना पहले से क्या दे?

अदरक की खुदाई (Harvesting) से 1 महीना पहले का समय “फिनिशिंग स्टेज” कहलाता है। इस दौरान आपकी चुनी हुई खाद का कोम्बिनेशन ही आपकी फसल कौलिटी बढ़ता है। इस अवस्था में पौधे को नाईट्रोजन और फास्फोरस की कम, लेकिन पोटाश (Potash) की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

तो इसके लिए,

  1. जेरार्ड सोल्युशन (5:8:40 +Mg) – जमीन से (प्रति सप्ताह)

खुदाई से 30 दिन पहले प्रति एकड़ 4 किलो का यह डोज़ कंद के लिए “वेट गेनर” (वजन बढ़ाने वाला) का काम करता है।

  • उच्च पोटाश (40%): यह पत्तियों में बचे हुए सारे कार्बोहाइड्रेट और भोजन को खींचकर सीधे अदरक की गांठों (Rhizomes) में जमा कर देता है। इससे कंद का ठोसपन और वजन तेजी से बढ़ता है।
  • मैग्नीशियम (Mg): अंत समय में अक्सर पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। मैग्नीशियम क्लोरोफिल को बनाए रखता है, जिससे पौधा आखिरी दिन तक भोजन बनाता रहता है।
  • कम नाईट्रोजन और फास्फोरस: इस समय ज्यादा नाईट्रोजन देने से कंद नरम हो सकते हैं और सड़न का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए 5% नाईट्रोजन का चुनाव एकदम सही है।
  1. सिक्वेन्शियल-2 (10:20:40 +Mg + सुक्ष्मपोषकतत्व) – स्प्रे से- 2 मिली प्रती लीटर पानी

यह स्प्रे कंद की बाहरी चमक और मजबूती के लिए रामबाण है।

  • पोटाश (40%) और फास्फोरस (20%): स्प्रे के माध्यम से फास्फोरस मिलने से कंद की ‘उंगलियों’ (Fingers) की मोटाई बढ़ती है।
  • मग्नेशियम और सुक्ष्मपोषकतत्व: ये तत्व अदरक की ऊपरी त्वचा (Skin) को आकर्षक और सुनहरा बनाते हैं। इससे खुदाई के बाद अदरक सूखती नहीं है और भंडारण (Storage) क्षमता बढ़ जाती है।
  1. कंद फुटन और साइज़ पर प्रभाव
  • कंद का घेरा (Bulking): पोटाश की इतनी भारी मात्रा कंद की कोशिकाओं के अंदर पानी के दबाव (Turgor Pressure) को संतुलित करती है, जिससे कंद “फूला हुआ” और बड़ा दिखता है।
  • कल्लों की परिपक्वता: इस समय नए कल्ले तो नहीं निकलते, लेकिन जो कल्ले पहले से हैं, वे आधार से मोटे हो जाते हैं, जिससे मुख्य कंद का आकार बढ़ जाता है।
  • छिलके की मजबूती: पोटाश छिलके को सख्त बनाता है जिससे खुदाई के दौरान अदरक छिलती नहीं है।
  1. साप्ताहिक कार्यक्रम (अंतिम 4 हफ्ते)
सप्ताह क्रिया  उद्देश्य
पहला हफ्ता जेरार्ड (जमीन) + सिक्वेन्शियल-2 (स्प्रे) कंद के अंदर रस भरना शुरू करना।
दूसरा हफ्ता केवल जेरार्ड (जमीन से) वजन में निरंतर वृद्धि।
तीसरा हफ्ता जेरार्ड (जमीन) + सिक्वेन्शियल-2 (स्प्रे) कंद की मोटाई और त्वचा की चमक को अंतिम रूप देना।
चौथा हफ्ता केवल पानी (सिंचाई) खाद के असर को स्थिर करना (खुदाई से 7 दिन पहले खाद बंद करें)।

विशेष सलाह:

  1. पानी का प्रबंधन: अंतिम महीने में सिंचाई बहुत संतुलित रखें। न तो खेत ज्यादा सूखा रहना चाहिए और न ही कीचड़ जैसा गीला। ज्यादा गीली मिट्टी में पोटाश का असर कम हो सकता है और कंद सड़ सकते हैं।
  2. मिट्टी का तापमान: अगर तापमान बढ़ रहा है, तो शाम के समय सिंचाई करें ताकि जमीन ठंडी रहे और खाद का अवशोषण अच्छा हो।

gerard

sequ2

Hi
Share

Leave a Comment