धान की रोपाई के 10 से 20 दिन बाद का समय फसल की महत्वपूर्ण अवस्था है। इस अवधि में पौधे अपनी वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative Growth) को छोड़कर कल्ले फूटने (Tillering) और जड़ों के फैलाव की प्रक्रिया में तेजी लाते हैं। स्प्रिंजल मिक्स और किंगफोल जिंक 70 इस अवस्था के लिए सबसे बेहतर और असरदार समाधान हैं।
1. इस अवस्था को क्यों सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है?
- कल्लों की संख्या : धान में जितनी अधिक संख्या में मजबूत कल्ले (Tillers) निकलेंगे, आगे चलकर उतनी ही ज्यादा बालियां (Panicles) बनेंगी और अंत में पैदावार (Yield) उतनी ही बंपर होगी।
- तने की मजबूती: इस समय पौधे का तना बनना शुरू होता है। यदि तना कमजोर रह गया, तो बाद में हवा चलने या दाने भारी होने पर फसल गिर सकती है (Lodging)।
- पौधे की रिकवरी: रोपाई के समय जड़ों को जो झटका लगता है, इस अवस्था तक पौधे उससे पूरी तरह उबरकर नई ऊर्जा से भर जाते हैं।
2. स्प्रिंजल मिक्स(11:10:17:13 CaO + Mg + सुक्ष्मपोषकतत्व):
- कैल्शियम औक्साइड (CaO) : धान के खेतों में अक्सर पानी भरा रहता है, जिससे नीचे की जड़ें आक्सीजन की कमी से कमजोर होने लगती हैं। कैल्शियम जड़ों की कोशिकाओं को मजबूत करता है और उन्हें सड़ने से बचाता है।
- संतुलित पोषण (Balanced Nutrition): इस मिक्स्चर में नाईट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का ऐसा अनुपात है जो पौधे को अचानक बहुत ज्यादा लंबा या कमजोर नहीं होने देता, बल्कि उसे अंदर से मजबूत और गठा हुआ बनाता है।
- सुक्ष्मपोषकतत्व: बोरान, आयरन, मैन्गेनीज और कोपर जैसे तत्व पौधे की आंतरिक प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाते हैं ताकि पौधे बीमारियों और कीटों से खुद मुकाबला कर सकें।
3. किंगफोल जिंक 70 का धान में विशेष महत्व
- खैरा रोग (Khaira Disease) से सुरक्षा: धान में जिंक की कमी से पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और उन पर कत्थई या जंग जैसे धब्बे आ जाते हैं, जिसे खैरा रोग कहते हैं। किंगफोल जिंक 70 इस समस्या को जड़ से खत्म करता है।
- जड़ों का प्रसार: जिंक केवल हरियाली ही नहीं लाता, बल्कि यह मिट्टी के भीतर जड़ों के विकास को तेज करता है। जितनी गहरी और फैली हुई जड़ें होंगी, पौधा उतनी ही अधिक नमी और खाद खींच पाएगा।
4. मात्रा:
· स्प्रिंजल मिक्स: 5 ग्राम प्रती लिटर पानी
· किंगफोल जिंक 70: 1 मिली प्रती लिटर पानी
महत्वपूर्ण सावधानियां
- जल प्रबंधन (Water Management):
- कल्ले फूटने के समय खेत में पानी मर्यादित रखें। खेत में हल्की नमी या 1 से 2 इंच पानी रहना सबसे अच्छा होता है, ताकि जड़ों को पर्याप्त औक्सीजन मिल सके और कल्ले तेजी से फूट सकें।
- निराई-गुड़ाई या खरपतवार नियंत्रण:
- यदि खेत में खरपतवार (Weeds) ज्यादा हैं, तो वे इन महंगे और अच्छे पोषक तत्वों को चूस लेंगे। इसलिए इस स्प्रे या खाद के प्रयोग से पहले खेत को खरपतवार मुक्त रखना जरूरी है।
- छिड़काव का समय:
- यदि आप इनका पर्ण छिड़काव कर रहे हैं, तो हमेशा सुबह के समय जब ओस सूख जाए या शाम को ठंडे मौसम में करें। तेज धूप में स्प्रे करने से पत्तियों के जलने का खतरा रहता है।


