अनार: 141-200 दिन

अनार के फल के विकास में जामफल (पेरू) आकार (91-140 दिन) की अवस्था बहुत महत्वपूर्ण होती है। इस समय फल तेजी से बढ़ रहा होता है, अंदर बीज (गूदा) पूरी तरह विकसित हो रहे होते हैं और फल में मिठास (शर्करा) भरने का काम जोरों पर होता है। इसमे फास्फोरस, पोटाश,  मैग्नीशियम के साथ और सूक्ष्मपोषकतत्वों कि भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

फास्फोरस और पोटाश का समन्वय

ये दोनों तत्व मिलकर फल की गुणवत्ता को अगले स्तर पर ले जाते हैं।

  • पोटाश (K) – पोटाश ही वह प्रमुख तत्व है जो पत्तियों में बनी शर्करा (शुगर) को खींचकर फल की कोशिकाओं (बीज/गूदे) तक पहुँचाता है और उनमें पानी भरकर आकार बढ़ाता है। यह फल के वजन, रंग और गूदे के वजन (grain weight) को सीधे तौर पर प्रभावित करता है ।
  • फास्फोरस (P) –
    • शर्करा परिवहन में सहायक : फास्फोरस ऊर्जा (ATP – एडेनोसिन ट्राईफास्फेट) का निर्माण करता है। पत्तियों से फलों तक शर्करा के परिवहन की पूरी प्रक्रिया के लिए यह ऊर्जा आवश्यक होती है। बिना फास्फोरस के, पोटाश के लिए शर्करा को ढो पाना मुश्किल हो जाता है।
    • बीज (गूदे) की गुणवत्ता : फास्फोरस से गूदे (grain) और रस (juice) की मात्रा बढ़ती है, हालाकी इसकी अधिकता से रस की मात्रा थोड़ी कम हो सकती है । लेकिन बीज का वजन (seed weight) बढ़ जाता है । याने यह बीजों को भरा-भरा (सोलिड) बनाने में मदद करता है।
    • जड़ विकास : यह जड़ों को मजबूत बनाता है, जिससे पौधे/पेड़ जमीन से अधिक पोषकतत्व खींच पाता है।
  • इन दोनो के समन्वय से : पोटाश शुगर को ढोता है, फास्फोरस इस काम के लिए ऊर्जा देता है। दोनों मिलकर फल के आकार, वजन और मिठास को बढाते हैं।

मैग्नीशियम की भूमिका

  1. हरापन बनाए रखना: मैग्नीशियम क्लोरोफिल (हरा रंग) का मुख्य घटक है। यह पत्तियों को हरा और सक्रिय रखता है, जिससे सूर्य के प्रकाश से फल के लिए भोजन (शर्करा) बनने की प्रक्रिया (प्रकाश संश्लेषण) लगातार चलती रहती है। कमी होने पर पत्तियां पीली पड़ जाती हैं।
  2. शर्करा का परिवहन : यह पत्तियों में बनी शर्करा (शुगर) को फलों तक पहुंचाने वाले तंत्र (फ्लोएम) को सक्रिय रखता है। इससे फल मीठे और रसीले बनते हैं।
  3. गुणवत्ता में सुधार : मैग्नीशियम अप्रत्यक्ष रूप से फल का वजन और आकार बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही, यह फल में मिठास (TSS) और रस की मात्रा को भी बढ़ाता है, जिससे फल की गुणवत्ता बेहतर होती है।
  4. फल टूटने से अप्रत्यक्ष सुरक्षा : यह पौधे में पानी का संतुलन (ओस्मोटिक संतुलन) बनाए रखता है। एक स्वस्थ पौधा पानी और पोषकतत्वों के उतार-चढ़ाव को बेहतर झेल पाता है, जिससे फल टूटने (क्रैकिंग) का खतरा अप्रत्यक्ष रूप से कम हो जाता है।

स्प्रे:

  • मैग्नीशियम प्लस –  1 मिली प्रती लिटर पानी
  • सिक्वेंशियल-2  – 2 मिली प्रती लिटर पानी

जमीन से:

  • जेरार्ड सोल्युशन –  4 किलो प्रती एकड

(हर 15 दिन में एकबार इस्तेमाल करें )

 

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