अनार के 80 वें दिन (नींबू आकार) के फल के लिए आपके उद्देश्य – बीज का आकार बढ़ाना और पत्तियों से शर्करा (शुगर) को फलों में मोड़ना इनकी और होता है । यह फल विकास की वह अवस्था है जहाँ कोशिका विस्तार (Cell Enlargement) तेजी से होता है और गूदा (arils) विकसित होकर भरना या साईज लेना शुरू करता है।
इसमे फास्फोरस, पोटाश के साथ और सूक्ष्मपोषकतत्वों की बहुत जरुरत होती है।
फास्फोरस और पोटाश का समन्वय
ये दोनों तत्व मिलकर फल की गुणवत्ता को अगले स्तर पर ले जाते हैं।
- पोटाश (K) – पोटाश ही वह प्रमुख तत्व है जो पत्तियों में बनी शर्करा (शुगर) को खींचकर फल की कोशिकाओं (बीज/गूदे) तक पहुँचाता है और उनमें पानी भरकर आकार बढ़ाता है। यह फल के वजन, रंग और गूदे के वजन (grain weight) को सीधे तौर पर प्रभावित करता है ।
- फास्फोरस (P) –
- शर्करा परिवहन में सहायक: फास्फोरस ऊर्जा (ATP – एडेनोसिन ट्राईफास्फेट) का निर्माण करता है। पत्तियों से फलों तक शर्करा के परिवहन की पूरी प्रक्रिया के लिए यह ऊर्जा आवश्यक होती है। बिना फास्फोरस के, पोटाश के लिए शर्करा को ढो पाना मुश्किल हो जाता है।
- बीज (गूदे) की गुणवत्ता: फास्फोरस से गूदे (grain) और रस (juice) की मात्रा बढ़ती है, हालाकी इसकी अधिकता से रस की मात्रा थोड़ी कम हो सकती है लेकिन बीज का वजन (seed weight) बढ़ जाता है । याने यह बीजों को भरा-भरा (सोलिड) बनाने में मदद करता है।
- जड़ विकास: यह जड़ों को मजबूत बनाता है, जिससे पौधा/पेड जमीन से अधिक पोषकतत्व खींच पाता है।
- इन दोनो के समन्वय से: पोटाश शुगर को ढोता है, फास्फोरस इस काम के लिए ऊर्जा देता है। दोनों मिलकर फल के आकार, वजन और मिठास को बढाते हैं।
सूक्ष्मपोषकतत्वों (Micronutrients) की भूमिका,
80 वें दिन के आसपास सूक्ष्मपोषकतत्व फल के अंदरूनी विकास और गुणवत्ता को अंतिम रूप देने का काम करते हैं।
- बोरान (Boron): यह अब भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह शर्करा के परिवहन (ट्रांसलोकेशन) की प्रक्रिया को पूरा करता है। बोरान की कमी होने पर, भरपूर पोटाश होने के बावजूद, शर्करा पत्तियों में ही रुकी रह सकती है और फलों तक नहीं पहुंच पाती। यह बीज निर्माण और कोशिका भित्ति को मजबूती देने में भी मदद करता है ।
- जिंक (Zinc): यह फल के आकार और वजन को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। जिंक के प्रयोग से फल का वजन बढ़ता है और फल टूटने (cracking) की समस्या कम होती है । यह विकास हार्मोन (औक्सिन) के निर्माण के लिए आवश्यक है, जो कोशिका विस्तार को नियंत्रित करता है।
- कौपर (Copper): शोध बताते हैं कि फल के वजन (single fruit weight) के साथ कौपर का सकारात्मक संबंध (positive correlation) पाया गया है । यह पौधे के चयापचय में सहाय्यक भूमिका निभाता है।
- मैंगनीज (Manganese) और आयरन (Iron): यह तत्व प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) को सुचारू रखते हैं, जिससे पौधा लगातार भोजन (शर्करा) बनाता रहता है। फल वृद्धि अवस्था (fruit enlargement stage) में इनकी मांग सबसे अधिक होती है ।
जमीन से:
- ओनील : 4 किलो प्रती एकड (00:40:39+Fe+Mg)
- लिपमैन कोम्बी: 500 ग्राम प्रती एकड (Micronutrients)


