आलू की फसल का टर्निंग पॉइंट: अंकुरण के 40-45 दिन बाद का पोषण प्रबंधन

आलू की खेती में अंकुरण के 40 से 45 दिन का समय वह स्वर्णिम काल है, जब जमीन के भीतर छोटे-छोटे कंद (Tubers) तेजी से आकार ले रहे होते हैं और उनका वजन बढ़ रहा होता है। फसल की यह अवस्था सीधे तौर पर आपकी अंतिम पैदावार और बाजार में मिलने वाले भाव तय करती है। इस स्टेज पर पौधे को सही माईक्रोन्यूट्रिएंट्स, कैल्शियम और पोटाश का बूस्ट मिल जाए, तो आलू की चमक, साइज और वजन में जबरदस्त इजाफा होता है।

  1. जमीन से पोषण: लिबीग (6:24:36 + मैग्नीशियम) और लिपमैन कोम्बी (सुक्ष्मपोषकतत्व)
  • लिबीग (NPK 6:24:36 + मैग्नीशियम):
    • इस फॉर्मूलेशन में पोटाश (36%) प्रचुर मात्रा में होता है, जो इस अवस्था में सबसे जरूरी तत्व है। पोटाश पत्तियों में बनने वाले भोजन को तेजी से जमीन के नीचे कंदों (आलू) तक पहुँचाता है, जिससे आलू का साइज और वजन तेजी से बढ़ता है।
    • इसमें मौजूद मैग्नीशियम पौधे में क्लोरोफिल की मात्रा को बनाए रखता है, जिससे पौधा हरा-भरा रहता है और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया मजबूत होती है।
  • लिपमैन कोम्बी (सुक्ष्मपोषकतत्व):
    • यह जमीन के रास्ते सभी जरूरी माईक्रो-न्यूट्रिएंट्स की पूर्ति करता है, जिससे पौधे की अंदरूनी ताकत बढ़ती है और किसी भी प्रकार की शुरुआती पोषक तत्वों की कमी दूर होती है।
  1. छिड़कांव: सीए + बी (कैल्शियम + बोरान)
  • कैल्शियम: आलू की नई और बढ़ती हुई कोशिकाओं की दीवारों (Cell Walls) को मजबूत करता है, जिससे आलू अंदर से ठोस बनता है और फटने या सड़ने जैसी समस्याओं से सुरक्षित रहता है।
  • बोरान: बोरान एक ट्रांसपोर्टर का काम करता है। यह पौधे के अन्य अंगों से शर्करा (Sugars) और पोषक तत्वों को खींचकर सीधा आलू के कंदों तक पहुँचाने में मदद करता है। इसके उपयोग से आलू की त्वचा (Skin Finish), सुंदर कलर और चमक बेहतरीन होती है।

इससे आलू में,

  • साईज और कड़ापन: कैल्शियम और पोटाश के मेल से आलू का आकार बड़ा होता है और वे अंदर से मजबूत व ठोस बनते हैं।
  • शानदार कलर और चमक: बोरान और सुक्ष्मपोषकतत्वों के संयोजन से आलू की स्किन साफ, चमकदार और आकर्षक बनती है, जिससे बाजार में बेहतरीन दाम मिलते हैं।
  • वजन में बंपर बढ़ोतरी: पोटाश और बोरान मिलकर कंदों में स्टार्च और ड्राई मैटर का संचय तेजी से करते हैं, जिससे कुल पैदावार और वजन काफी बढ़ जाता है।

मात्रा:

छिड़कांव:

  • सीए + बी: 2 मिली प्रती लीटर पानी

जमीन से,

  • लिबीग: 4 किलो प्रती एकड़ ( किसी भी खाद या बालू रेत में मिलाके डाले)
  • लिपमैन कोम्बी: 500 ग्राम प्रती एकड़

ca+b

lebieg

 

lipman

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