अंकुरण के 25 दिन बाद आलू का पौधा एक बेहद महत्वपूर्ण और तेज बढ़वार (Vegetative Growth) के चरण में प्रवेश करता है। इस समय पौधे को केवल सामान्य खाद की नहीं, बल्कि एक पूर्ण और संतुलित पोषण आहार की जरूरत होती है ताकि तनों का विकास तेजी से हो और कंदों (Tubers) के बनने की मजबूत तैयारी हो सके। ऊपर से कैल्शियम + बोरान और सुक्ष्मपोषकतत्वों का स्प्रे, तथा ज़मीन से अल्बर्ट सोल्युशन का जादुई कोम्बिनेशन आपकी फसल की चाल और हरियाली को चरम पर पहुँचा देता है।
आइए जानते हैं इस चरण में इसके फायदे क्या हैं …
- प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) में जबरदस्त तेजी:
- सुक्ष्म पोषक तत्वों का मेल पत्तियों में क्लोरोफिल के निर्माण को तेज करता है। इससे सूरज की रोशनी का उपयोग करके पौधे बहुत तेजी से अपना भोजन बनाते हैं, जिससे पत्तियों का आकार चौड़ा और रंग गाढ़ा हरा होता है।
- तनों और पत्तियों का मजबूत एवं तेज विकास:
- 25वें दिन के बाद आलू के तने तेजी से मोटे और मजबूत होने लगते हैं। कैल्शियम पौधे की कोशिका भित्ति (Cell Wall) को सख्त और मजबूत बनाता है, जिससे पौधा हवा या आंधी में गिरता नहीं है और सीधा खड़ा रहता है।
- अल्बर्ट सोल्युशन (10:09:16 + 13% CaO + Mg + S):
- ज़मीन से दिए जाने वाले इस विशेष घोल में नाईट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ-साथ कैल्शियम (CaO), मैग्नीशियम (Mg) और सल्फर (S) जैसे पोषकतत्व होते हैं। यह आलू की फसल के मुख्य विकास चरण में किसी भी प्रकार की छुपी हुई कमी को नहीं होने देता।
- फसल की चाल और फुटाव को निरंतर बनाए रखना:
- पोटाश (16%) और संतुलित सुक्ष्मपोषक तत्वों के कारण पौधे की ‘चाल’ (ग्रोथ की रफ्तार) एक जैसी बनी रहती है। शाखाओं और फुटाव का विस्तार तेजी से होता है, जिससे भविष्य में बनने वाले कंदों के लिए ज्यादा से ज्यादा पत्तियां (भोजन बनाने वाली फैक्ट्रियां) तैयार होती हैं।
- फलों / कंदों की गुणवत्ता और बीमारियों से प्रतिरोधक क्षमता:
- बोरान पौधों में पोषक तत्वों के संचरण (Translocation) को आसान बनाता है और कैल्शियम आलू के फटने या अंदर से खोखले होने जैसी समस्याओं को रोकता है। इससे पौधे की आंतरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
- स्कैब (खुरदरापन) से सुरक्षा: सीए + बी
- आलू में स्कैब की बीमारी ज्यादातर मिट्टी में कैल्शियम की कमी या शुष्क परिस्थितियों के कारण होती है। इस अवस्था में दिया जाने वाला कैल्शियम और बोरान आलू के शुरुआती कंदों की त्वचा (Cell walls) को मजबूत और चिकना बनाता है। इससे बैक्टीरिया या फंगस (जो स्कैब फैलाते हैं) कंदों पर हमला नहीं कर पाते और आलू साफ-सुथरा व चमकदार पैदा होता है।
मात्रा:
छिड़कांव:
- सीए + बी: 2 मिली प्रती लीटर पानी
- लिपमैन कोम्बी: 5 – 2 ग्राम प्रती लीटर पानी
जमीन से
- अल्बर्ट सोल्युशन: 3 किलो प्रती एकड़



