गेंदे में कलियां आते ही डालें यह खाद – फूलों का आकार होगा दोगुना और चमक रहेगी नंबर वन !

गेंदे में कलियां आते ही डालें यह खाद – फूलों का आकार होगा दोगुना और चमक रहेगी नंबर वन !

35 दिन की अवस्था में गेंदे (Marigold) की फसल अपनी शाकीय वृद्धि (Vegetative Growth) से कलियों के बनने (Bud Initiation Stage) की ओर बढ़ती है। इस समय पौधों की जड़ों और तनों को मजबूत करने तथा अधिक से अधिक शाखाएं (Braching) निकालने के लिए संतुलित पोषण की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

लिबीग (Liebig) का 6:24:36 + Mg + TE (नाईट्रोजन 6%, फास्फोरस 24%, पोटेशियम 36% + मैग्नीशियम + सुक्ष्मपोषकतत्व) इस चरण के लिए एक आदर्श खाद मिश्रण है। इसको देना बहुत फायदेमंद हो जाता हैं..

  1. फास्फोरस (24%) के फायदे: जड़ें और कलियां मजबूत होना
  • सफेद जड़ों का तीव्र विकास: 35वें दिन जड़ों का जाल जितना फैलेगा, पौधा उतना ही पोषक तत्व सोख पाएगा। फास्फोरस जड़ों को गहराई और मजबूती देता है।
  • कलियों की शुरुआत (Bud Formation): यह समय फूल की कलियां बनने का होता है। फास्फोरस पौधों को सही समय पर फूल की अवस्था में प्रवेश कराने में मदद करता है।
  1. पोटाश (36%) के फायदे: झाड़ और फूलों का आकार बढ़ना
  • अधिक शाखाएं (Bushing/Branching): उच्च पोटेशियम पौधे के तने को मोटा बनाता है, जिससे नई साइड-शाखाएं तेजी से निकलती हैं। जितनी ज्यादा शाखाएं होंगी, उतने ही अधिक फूल आएंगे।
  • बीमारियों से बचाव: पोटेशियम पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है और कीड़ों/सूखे के प्रति सहनशील बनाता है।
  • फूलों का वजन और चमक: आगे चलकर बनने वाले फूलों का आकार बड़ा, रंग चमकदार और वजन ज्यादा होगा।
  1. कम नाईट्रोजन (6%) का फायदा: पौधा केवल पत्तियों में नहीं भागेगा
  • इस चरण में यदि ज्यादा नाइट्रोजन दी जाए तो पौधा केवल पत्तियां और ऊंचाई बढ़ाता रहेगा और फूल देर से आएंगे। 6% नाईट्रोजन पौधे को हरा-भरा रखने के लिए पर्याप्त है और इसे अत्यधिक लंबा होने से रोकती है।
  1. मैग्नीशियम (Mg) के फायदे: पत्तियों में गहरा हरापन
  • मैग्नीशियम क्लोरोफिल (Chlorophyll) का मुख्य घटक है। यह पत्तियों में पीलापन आने से रोकता है और प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे पौधा अधिक भोजन बना पाता है।
  1. सुक्ष्मपोषकतत्व: सर्वांगीण विकास
  • इसमें जिंक, बोरान, आयरन आदि सुक्ष्मपोषकतत्व होते हैं। यह पौधों में सुक्ष्मपोषकतत्वों की कमी (Micro-nutrient deficiency) को दूर करते हैं, जिससे कलियां झड़ती नहीं हैं और पौधे का विकास रुकता नहीं है।

मात्रा:

लिबीग: 3 किलो प्रती एकड़

  • सावधानी: खाद देते समय खेत में हल्की नमी होनी चाहिए। अत्यधिक सूखी या बहुत ज्यादा पानी से भरी मिट्टी में खाद न दे।

lebieg

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