मक्का की फसल में 35 से 40 दिन का चरण बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह वह समय होता है जब मक्का का पौधा तेजी से वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative Growth) कर रहा होता है और उसमें अंदर ही अंदर भुट्टा बनने की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू हो रही होती है। इस निर्णायक अवस्था में पौधे को मुख्य खादों (युरिया, डीएपी आदि) के साथ-साथ सुक्ष्मपोषकतत्वों (Micronutrients) की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
मक्का में लिपमैन कोम्बी (सुक्ष्म पोषक तत्व) का छिड़काव करने से फसल को बहुत लाभ मिलते हैं:
- भुट्टों का बेहतर विकास और साइज (Cob Development)
- इस अवस्था में सुक्ष्मपोषकतत्व (जैसे जिंक, बोरान और आयरन) मक्का के पौधे के भीतर चयापचय (Metabolism) की क्रिया को तेज करते हैं।
- इससे भुट्टे की लंबाई और मोटाई अच्छी होती है तथा भुट्टे में दानों की संख्या में वृद्धि होती है।
- तने की मजबूती और मोटाई (Stalk Strength)
- 35-40 दिन पर मक्का का तना तेजी से मोटा और मजबूत हो रहा होता है।
- लिपमैन कोम्बी में मौजूद पोषक तत्व तने के आंतरिक ऊतकों (Tissues) को मजबूत बनाते हैं, जिससे तेज हवा या आंधी चलने पर मक्का की फसल गिरने (Lodging) से बची रहती है।
- प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) में सुधार
- इस स्प्रे से पौधों की पत्तियां गहरी हरी और चौड़ी होती हैं।
- क्लोरोफिल की मात्रा बढ़ने से पौधा सूर्य के प्रकाश का अधिकतम उपयोग करके भोजन बनाता है, जिससे पौधे की वृद्धि एक समान और संतुलित होती है।
- पोषक तत्वों की कमी से बचाव
- मक्का की फसल में अक्सर जिंक (Zinc) या आयरन की कमी के कारण पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं या पत्तियों पर सफेद धारी (Stripes) उभर आती हैं।
- लिपमैन कोम्बी का उपयोग इन सभी छुपी हुई कमियों को दूर करके फसल को शुरुआती झटकों से बचाता है।
- भुट्टे के टिप तक दाने भरना
- कई बार भुट्टे ऊपर से खाली रह जाते हैं (जिसे टिप-ब्लैंकिंग कहा जाता है)। इसमें मौजूद बोरॉन और अन्य सूक्ष्म तत्व परागण प्रक्रिया को सुधारकर भुट्टे के आखिरी छोर तक दाने भरने में मदद करते हैं।
मात्रा: छिड़कांव
- लिपमैन कोम्बी: 1.25 से 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी

