फुल अवस्था
चने की फुल अवस्था सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान पौधे को सही दिशा न मिले, तो वानस्पतिक वृद्धि (सिर्फ पत्तियां और टहनियां बढ़ना) बढ़ जाती है और फूल झड़ जाते हैं, जिससे सीधा उत्पादन (Yield) पर असर पड़ता है।
1. छिड़काव
- डीपी 98: NPK 06:37:17
- फास्फोरस (37%): इस अवस्था में पौधे को सबसे ज्यादा ऊर्जा (ATP के रूप में) की जरूरत होती है। फास्फोरस फूलों की कलियों (Flower buds) के निर्माण को बढ़ावा देता है और जड़ों को मजबूत करता है।
- पोटेशियम (17%): पोटाश पौधे के अंदर पानी और पोषक तत्वों के परिवहन (Translocation) को तेज करता है। यह फूलों और परागकणों (Pollen grains) की गुणवत्ता सुधारता है ताकि घोगरे टिक सकें।
- नाईट्रोजन (6%): यह बहुत कम मात्रा में है, जो सिर्फ इतनी छूट देता है कि पौधे की बेसिक जरूरत पूरी होती रहे, लेकिन अनियंत्रित वृद्धि नहीं हो पाती।
- लिपमैन कोम्बी (सुक्ष्मपोषकतत्व / Chelated Micronutrients):
- सुक्ष्मपोषकतत्व (जैसे बोरान, जिंक, आयरन) फुलों की गुणवत्ता के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं।
- विशेषकर बोरान: यह परागण (Pollination) और फर्टिलाइजेशन में मदद करता है, जिससे फुल फल में बदलते समय झड़ते नहीं हैं।
2. जमीन से ड्रिप या ड्रेंचिंग:
- हेनीग सोल्युशन – NPK 11:44:11 (IPE Technology):
- हाई फास्फोरस (44%): जब इसे जमीन में दिया जाता है, तो यह रूट जोन (Root zone) में जाकर सफेद जड़ों (White Roots) का जाल बिछा देता है। जितनी मजबूत और ज्यादा सफेद जड़ें होंगी, पौधा उतनी ही गहराई से नमी और अन्य पोषक तत्व खींच पाएगा।
- आई.पी.ई. टेक्नोलॉजी (IPE): आमतौर पर मिट्टी में डाला जाने वाला फास्फोरस मिट्टी में मिलकर लॉक (अघुलनशील) हो जाता है और पौधे को नहीं मिल पाता। हेनीग सोल्युशन की तकनीक फास्फोरस को मिट्टी में लॉक होने से बचाती है और उसे लगातार पौधे की जड़ों के लिए उपलब्ध कराती रहती है।
3. अनियंत्रित वृद्धि पर नियंत्रण कैसे होता है?
जब पौधे को पानी और नाईट्रोजन ज्यादा मात्रा में मिलते हैं, तो वह केवल लंबाई और पत्तियां बढ़ाने लगता है (जिसे किसान जंगली वृद्धि कहते हैं)।
- इस फॉर्मूले में नाईट्रोजन की मात्रा को बेहद सीमित कर दिया गया है।
- इसके विपरीत, फास्फोरस और पोटाश का हाई डोज़ पौधे के हार्मोनल बैलेंस को बदल देता है। यह पौधे को ‘ग्रोथ फेज’ से हटाकर सीधे ‘रिप्रोडक्टिव फेज’ (फूल और फल बनाने की अवस्था) में धकेल देता है। इससे पौधे की ऊर्जा पत्तियां बढ़ाने के बजाय फूल और कलियां खिलाने में लगने लगती है।
मात्रा:
छिड़काव:
- डीपी 98: 2 मिली प्रती लीटर पानी
- लिपमैन कोम्बी: 1.5 ग्राम प्रती लीटर पानी
ड्रिप / जमीन से:
- हेनीग सोल्युशन: 3 किलो प्रती एकड़
इस अवस्था में ध्यान रखने योग्य जरूरी सावधानियां:
- सिंचाई प्रबंधन (Water Management): फूल आने की अवस्था में खेत में न तो बहुत ज्यादा सूखा होना चाहिए और न ही अत्यधिक पानी। नमी एक समान (Moderate) रखें, अन्यथा तनाव के कारण फूल गिर सकते हैं।
- छिड़काव का समय: स्प्रे हमेशा सुबह के वक्त (ओस हटने के बाद) या फिर शाम को ठंडे मौसम में करें। तेज धूप में स्प्रे करने से पत्तियां जल सकती हैं या फूल ड्रॉप हो सकते हैं।
- कीटनाशक मिलाना हो तो: यदि इस स्प्रे के साथ किसी कीटनाशक या फंगीसाइड को मिलाना है, तो पहले थोड़ा सा घोल बनाकर जार टेस्ट (Jar Test) जरूर कर लें ताकि आपस में कोई रिएक्शन न हो।



