4.संतरा: विश्राम काल के 3 स्प्रे

संतरा: विश्राम काल के 3 स्प्रे

संतरे की फसल में विश्राम काल (Rest Period/Dormancy) का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी दौरान पेड़ अगले सीजन के लिए ऊर्जा संचय करता है और फूलों की कलियों (Flower bud differentiation) के निर्माण की तैयारी करता है।

यह स्प्रे शेड्यूल का मुख्य उद्देश्य पेड़ को तनाव से बाहर निकालना, मिट्टी से न मिल पाने वाले तत्वों की पूर्ति करना और आने वाले बहार (अंबे या मृग) के लिए झाड़ को सशक्त बनाना है।

संतरे का विश्राम काल स्प्रे शेड्यूल

पहला स्प्रे: ऊर्जा,स्टोरेज बढ़ाने और कोशिका मजबूती हेतु

घटक: ओनील (0:40:39+Fe+Mg) + लिपमन कोम्बी (सूक्ष्म पोषक तत्व)

  • भूमिका (Role):
    • ओनील (0:40:39): इसमें फास्फोरस और पोटैशियम की उच्च मात्रा होती है। फास्फोरस जड़ों के विकास और फूलों की सेटिंग के लिए ऊर्जा प्रदान करता है, जबकि पोटैशियम पेड़ की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और तने को मजबूती देता है।
    • लिपमन कोम्बी: यह चिलेटेड सुक्ष्म पोषकतत्वों का मिश्रण है। विश्राम काल में अगर सुक्ष्म तत्वों की कमी हो, तो पत्तियां पीली पड़ सकती हैं। यह स्प्रे क्लोरोफिल के स्तर को बनाए रखता है।
  • फायदा: यह स्प्रे पेड़ को “रिचार्ज” करता है ताकि वह फूल आने की प्रक्रिया के लिए तैयार हो सके।

दूसरा स्प्रे: संपूर्ण पोषण (Complete Nutrition)

घटक: स्प्रिंजल मिक्स (सभी 11 पोषक तत्व)

  • भूमिका (Role):
    • विश्राम काल के मध्य में पेड़ को संतुलित आहार की जरूरत होती है। स्प्रिंजल मिक्स में मुख्य (N-P-K), द्वितीयक (Ca – Mg) और सूक्ष्म तत्व (Zn, Fe, Mn, B, Cu, Mo) एक साथ होते हैं।
    • चूंकि विश्राम काल में हम खाद कम देते हैं, इसलिए यह “पर्णीय पोषण” (Foliar Nutrition) सीधे पत्तियों के माध्यम से पेड़ की आंतरिक कमियों को भर देता है।
  • फायदा: झाड़ की चमक बनी रहती है और टहनियों में भविष्य के फलों को संभालने की ताकत आती है।

तीसरा स्प्रे: सूक्ष्म तत्वों की सघन पूर्ति

घटक: मायक्रोमैक्स (सुक्ष्म पोषकतत्व)

  • भूमिका (Role):
    • फूल निकलने से ठीक पहले सूक्ष्म तत्वों, विशेषकर जिंक और बोरॉन की भूमिका बढ़ जाती है। मायक्रोमैक्स इन तत्वों की कमी को पूरा करता है।
    • बोरॉन फूलों के परागण (Pollination) में मदद करता है, जिससे फूलों का झड़ना कम होता है।
  • फायदा: यह स्प्रे अंतिम तैयारी के रूप में काम करता है, जिससे निकलने वाली नई फूट (Flush) स्वस्थ और अधिक फूलों वाली होती है।

महत्वपूर्ण टिप्स:

  1. समय: स्प्रे हमेशा सुबह 10 बजे से पहले या शाम 4 बजे के बाद करें।
  2. पानी की गुणवत्ता: स्प्रे के लिए साफ पानी का उपयोग करें और संभव हो तो पानी का pH बैलेंस (5 से 7) रखें।
  3. स्टीकर: बेहतर चिपकाव और अवशोषण के लिए एक अच्छी गुणवत्ता वाले सिलिकॉन आधारित स्टीकर का प्रयोग जरूर करें।
  4. विश्राम का महत्व: ध्यान रहे कि इन स्प्रे के साथ-साथ संतरे के पेड़ों को उचित “तनाव” (Water Stress) देना भी जरूरी है, तभी इन खादों का सर्वोत्तम परिणाम फूलों के रूप में दिखेगा।

‘गमोसिस‘ (गोंद निकलना):

इस समस्या से निजत पाने हेतु ऊपर दिए गए 3 स्प्रे में फफूंदनाशक जरुर मिलाए जैसे की,

  • बारिश शुरू होने से पहले तने पर बोर्डो पेस्ट (Bordeaux Paste) का लेप जरूर लगाएं। यह मानसून में होने वाले ‘गमोसिस’ (गोंद निकलना) और कवक रोगों से बचाव करेगा।
  • स्प्रे में अलिएट या रिडोमिल गोल्ड या कोनिका मिलाके दे सकते है लेकिन बनाया हुआ घोल तुरंत इस्तमाल करे। “जार टेस्ट” जरुर करे।
  • नई फुटान से पहले कॉपर का छिड़कांव जरुर करे।

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