टमाटर 24वां दिन (छिडकांव)
टमाटर की फसल का 24 वां दिन एक ऐसा मोड़ है जहाँ पौधा अपनी वानस्पतिक वृद्धि (Growth) को पूरा कर फूल आने की अवस्था (Flowering Stage) की ओर कदम बढ़ाता है। इस समय बायो-20 और जिनर्जी (Zinergy) स्ट्रेस प्रबंधन और बीमारी से बचाव करता है।
- बायो-20
बायो-20 केवल खाद नहीं, बल्कि एक ‘बायो-स्टिमुलेंट‘ है।
- 20:20:20 (NPK): यह नाईट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का समान अनुपात है। यह सुनिश्चित करता है कि पौधे की लंबाई बढ़ने के साथ-साथ उसका तना भी मजबूत हो।
- सीवीड (Seaweed): यह एक प्राकृतिक टॉनिक है जो जड़ों की अवशोषण क्षमता को बढ़ाता है।
- पत्तों की चौड़ाई और हरापन: इसमें मौजूद मैग्नीशियम और सीवीड क्लोरोफिल के स्तर को बढ़ाते हैं। चौड़े पत्तों का मतलब है अधिक प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis), जिससे पौधा अधिक भोजन बनाता है और तेजी से बढ़ता है।
- कोशिका मजबूती: यह कोशिकाओं को पोषण देकर उन्हें सक्रिय बनाता है, जिससे पौधा स्वस्थ और चमकदार दिखता है।
- जिनर्जी (Zinergy) – सुक्ष्म पोषकतत्व कॉपर, जिंक और सल्फर का मेल
जिनर्जी एक अनोखा उत्पाद है जो पोषण के साथ-साथ रोग प्रबंधन का भी काम करता है। इसमें जिंक, कॉपर और सल्फर का विशेष मिश्रण होता है।
- कोपर (Copper) और बैक्टीरियल ब्लाइट प्रबंधन: कोपर एक बेहतरीन ‘स्पर्शजन्य फफूंदनाशक’ (Contact Fungicide) और ‘बैक्टीरिसाइड’ के रूप में काम करता है। यह पत्तियों की सतह पर एक सुरक्षात्मक परत बनाता है, जो बैक्टीरियल ब्लाइट (जीवाणु झुलसा) और अन्य फफूंद रोगों के कीटाणुओं को नष्ट कर देता है।
- जिंक (Zinc): जैसा कि हम जानते हैं, जिंक हार्मोन (Auxin) बनाता है। यह नई शाखाओं और कलियों के विकास में मदद करता है।
- सल्फर (Sulphur): सल्फर न केवल एक पोषक तत्व है, बल्कि इसमें फफूंद रोधी गुण भी होते हैं। यह पत्तियों में प्रोटीन निर्माण और तेल के अंश को बढ़ाता है, जिससे पौधे की आंतरिक शक्ति बढ़ती है।
मात्रा:
- बायो-20 : 2 मिली प्रति लीटर पानी
- जिनर्जी : 1 मिली प्रति लीटर पानी
जरूरी सावधानियां:
- स्प्रे की गुणवत्ता: स्प्रे करते समय यह ध्यान रखें कि दवा पत्तों के ऊपर और नीचे दोनों तरफ लगे, क्योंकि बैक्टीरिया अक्सर पत्तों के नीचे से हमला शुरू करते हैं।
- स्टिकर का प्रयोग: चूंकि कॉपर को पत्तों पर टिकना जरूरी है, इसलिए एक सिलिकॉन आधारित स्टिकर जरूर मिलाएं।
- मिट्टी में नमी: छिड़काव के समय खेत में नमी होना अनिवार्य है ताकि पौधे पर किसी प्रकार का ‘केमिकल स्ट्रेस’ न आए।
- जरुरत के हिसाब से आप फिर भी अन्य फफूंदनाशक मिला सकते है।

