3. मटर 50-60 दिन बाद फल्ली में दाना भरने के लिए क्या दे?

मटर 50-60 दिन बाद फल्ली में दाना भरने के लिए क्या दे?

मटर की फसल में 50-60 दिन की अवस्था वह समय होता है जब फूल से फलियों में दाना भरने की प्रक्रिया (Pod filling stage) शुरू होती है। इस समय सिक्वेन्शियल 2 (10:20:40) का उपयोग “सोर्स-सिंक रिलेशनशिप” को बेहतर बनाके दाने की साईंज के लिए काम करता है।

यह दानों के साइज और वजन पर कैसे असर डालता है:

  1. सोर्स से सिंक तक भोजन का स्थानांतरण (Source to Sink Relationship)

पौधे में ‘सोर्स‘ (Source) पत्तियां होती हैं (जहाँ भोजन बनता है) और ‘सिंक‘ (Sink) फलियां और दाने होते हैं (जहाँ भोजन जमा होता है)।

  • पोटाश (40%): सिक्वेन्शियल 2 में मौजूद हाई पोटाश पत्तियों में बने कार्बोहाइड्रेट और शुगर को तेजी से खींचकर दानों (फलियों) तक पहुँचाता है। इससे दाने पिचकते नहीं और उनमें ठोस भराव होता है।
  1. दानों की साइज और एकरूपता (Grain Size and Uniformity)
  • इस स्प्रे के बाद दानों का आकार एक समान (Uniform) बढ़ता है। अक्सर देखा जाता है कि फली के ऊपरी दाने बड़े और नीचे के छोटे रह जाते हैं, लेकिन पोटैशियम के सही संचार से पूरी फली के दाने मोटे और वजनदार बनते हैं।
  • फास्फोरस (20%): इस अवस्था में फास्फोरस ऊर्जा स्थानांतरण (ATP के रूप में) में मदद करता है, जिससे दाने भरने की प्रक्रिया धीमी नहीं पड़ती।
  1. दानों की चमक और मिठास
  • इसमें मौजूद सुक्ष्मपोषकतत्व (Micro-nutrients) और पोटाश मिलकर दानों में क्लोरोफिल और शुगर कंटेंट बढ़ाते हैं। इससे मटर के दानों में प्राकृतिक मिठास आती है और बाजार में बेचने के लिए उनकी चमक (Luster) बढ़ जाती है, जिससे अच्छा भाव मिलता है।
  1. फलियों का गिरना और समय से पहले पकना रोकना
  • नाईट्रोजन (10%) की हल्की मात्रा पत्तियों को हरा रखती है ताकि वे अंत तक भोजन बनाती रहें। इससे पौधा अचानक सूखता नहीं है और फलियों को पकने के लिए पूरा समय मिलता है।

मात्रा:

सिक्वेन्शियल 2 : 2 मिली प्रति लीटर पानी

सावधानी: इस समय खेत में नमी (Moisture) होना बहुत जरूरी है। अगर जमीन सूखी है, तो पहले हल्की सिंचाई करें और फिर स्प्रे करें।

 

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