लहसुन: 76-90 दिन की अवस्था कंद की साईंज को कैसे करे ?
लहसुन की खेती में 76-90 दिन की अवस्था वह समय है जब फसल “फिनिशिंग टच” ले रही होती है। इस दौरान पौधे की पूरी शक्ति पत्तियों से हटकर पूरी तरह कंद (Bulb) में समा जाती है।
सिक्वेन्शियल-2 और ओनील इस अवस्था के लिए बहुत ही सटीक तरीके से कम करते है।
1. सिक्वेन्शियल-2 (10:20:40 + सुक्ष्मपोषकतत्व) – स्प्रे
इस अवस्था में पौधा मिट्टी से भारी मात्रा में पोटाश उठाने में असमर्थ हो सकता है, इसलिए स्प्रे (Foliar) बहुत प्रभावी होता है।
- उच्च पोटाश (40%): पोटाश “क्वालिटी पोषक तत्व” है। यह पत्तियों में बने भोजन (कार्बोहाइड्रेट) को कंद की ओर धकेलता है। इससे कंद का वजन और घनत्व (Density) बढ़ता है।
- फास्फोरस (20%): यह कंद की बाहरी परतों (Skin) को मजबूती देता है, जिससे कटाई के बाद लहसुन लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।
- सूक्ष्मपोषकतत्व: ये लहसुन के तीखेपन (Allicin content) और विशिष्ट गंध को बढ़ाते हैं।
2. ओनील (00:40:39 + Fe + Mg) – जमीन के माध्यम से
यह एक विशेष ग्रेड है जो इस अवस्था की “शारीरिक क्रियाओं” (Physiological processes) को सहारा देता है,
- फास्फोरस (40%) और पोटाश (39%): यह एक संतुलित ऊर्जा स्रोत है। जहाँ पोटाश आकार बढ़ाता है, वहीं उच्च फॉस्फोरस कंद की कलियों (Cloves) को सही ढंग से सेट करता है ताकि वे बिखरी हुई न लगें।
- फेरस (लोहा – Fe): यह एंजाइम गतिविधियों को तेज करता है जिससे लहसुन का रंग सफेद और चमकदार बनता है।
- मैग्नीशियम (Mg): यद्यपि पौधा कंद बना रहा है, फिर भी उसे क्लोरोफिल की जरूरत होती है ताकि बची हुई पत्तियाँ अंत तक भोजन बनाती रहें। मैग्नीशियम यह सुनिश्चित करता है कि पौधा “असमय” सूखे नहीं।
3. यह फसल में काम कैसे करेंगे? (Action Mechanism)
इस अवस्था में ये उत्पाद तीन मुख्य काम करते हैं:
A) कोशिकाएं भरना
76-90 दिन के बीच कोशिकाएं (Cells) अपना आकार बढ़ाती हैं। पोटाश (40%) कोशिकाओं के अंदर पानी और पोषक तत्वों का दबाव (Turgor pressure) बढ़ाता है, जिससे कंद का घेरा (Circumference) तेजी से बढ़ता है।
B) ऊपरी परत और चमक
ओनील में मौजूद फेरस (सहायक रूप में) और फास्फोरस लहसुन के ‘परदे’ को सख्त बनाते हैं। इससे लहसुन परत कौलिटी वाली बनता है, जिसकी बाजार में कीमत अधिक मिलती है।
C) तीखापन और ठोसपन
लहसुन का तीखापन उसमें मौजूद गंधकयुक्त यौगिकों से आता है। इस अवस्था में दिए गए सुक्ष्मपोषकतत्व उन रसायनों के निर्माण को तेज करते हैं। इससे कंद अंदर से खोखला नहीं रहता और वजनदार निकलता है।
| विशेषता | लाभ |
| कंद का आकार | सिक्वेन्शियल-2 का पोटाश कंद को अधिकतम फुलाव देता है। |
| कलियों की सैटिंग | ओनील का 0:40:39 रेशो कलियों को एक समान बनाता है। |
| वजन (Weight) | भोजन का सही वहन (Translocation) कंद को भारी बनाता है। |
| बाजार भाव | बेहतर चमक और मजबूत परदे के कारण मंडी में अधिक दाम मिलता है। |
मात्रा :
स्प्रे,
- सिक्वेन्शियल-2: 2 मिली प्रति लिटर पानी.
जमीन से,
- ओनील: 4 किलो प्रती एकड़
सुझाव:
- इस अवस्था में मिट्टी में नमी बनाए रखें, लेकिन जलभराव न होने दें। बहुत ज्यादा सूखा पड़ने पर कंद का आकार छोटा रह सकता है।
- यदि इस दौरान तापमान अचानक बढ़ता है, तो ओनील का फेरस पौधे को “हीट स्ट्रेस” से बचाएगा।


