अनार के फल के विकास में जामफल (अमरुद) आकार (91-140 दिन) की अवस्था बहुत महत्वपूर्ण होती है। इस समय फल तेजी से बढ़ रहा होता है, अंदर बीज (गूदा) पूरी तरह विकसित हो रहे होते हैं और फल में मिठास (शर्करा) भरने का काम जोरों पर होता है। इसमे फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीशियम के साथ और सूक्ष्मपोषकतत्वों कि भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
फास्फोरस और पोटाश का समन्वय
ये दोनों तत्व मिलकर फल की गुणवत्ता को अगले स्तर पर ले जाते हैं।
- पोटाश (K) – पोटाश ही वह प्रमुख तत्व है जो पत्तियों में बनी शर्करा (शुगर) को खींचकर फल की कोशिकाओं (बीज/गूदे) तक पहुंचाता है और उनमें पानी भरकर आकार बढ़ाता है। यह फल के वजन, रंग और गूदे के वजन (grain weight) को सीधे तौर पर प्रभावित करता है ।
- फास्फोरस (P) –
- शर्करा परिवहन में सहाय्यक: फास्फोरस ऊर्जा (ATP – एडेनोसिन ट्राईफास्फेट) का निर्माण करता है। पत्तियों से फलों तक शर्करा के परिवहन की पूरी प्रक्रिया के लिए यह ऊर्जा आवश्यक होती है। बिना फास्फोरस के, पोटाश के लिए शर्करा को ढो पाना मुश्किल हो जाता है।
- बीज (गूदे) की गुणवत्ता: फास्फोरस से गूदे (grain) और रस (juice) की मात्रा को बढाना है, हालाकी इसकी अधिकता से रस की मात्रा थोड़ी कम हो सकती है लेकिन बीज का वजन (seed weight) बढ़ जाता है । यानी यह बीजों को भरा-भरा (सोलिड) बनाने में मदद करता है।
- जड़ विकास: यह जड़ों को मजबूत बनाता है, जिससे पौधा/पेड़ जमीन से अधिक पोषक तत्व खींच पाता है।
- इन दोनो के समन्वय से: पोटाश शुगर को ढोता है, फास्फोरस इस काम के लिए ऊर्जा देता है। दोनों मिलकर फल के आकार, वजन और मिठास को बढाते हैं।
मैग्नीशियम की भूमिका
1. प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) को बनाए रखना – ‘हरापन’ सुरक्षित रखना
- क्लोरोफिल का केंद्र: मैग्नीशियम क्लोरोफिल (पत्तियों का हरा रंग) के अणु का केंद्रीय तत्व है। अगर मैग्नीशियम की कमी होगी, तो क्लोरोफिल नहीं बनेगा और पत्तियां पीली (क्लोरोसिस) पड़ने लगेंगी, खासकर पुरानी पत्तियों ।
- भोजन निर्माण जारी रखना: 140 दिन तक फल को लगातार भोजन (शर्करा) की आवश्यकता होती है। मैग्नीशियम यह सुनिश्चित करता है कि पत्तियां हरी और सक्रिय रहें, जिससे सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा (भोजन) बनने की प्रक्रिया (फोटोसिंथेसिस) लगातार बिनारुके चलती रहे।
2. शर्करा (शुगर) का परिवहन और भंडारण
- फ्लोएम को सक्रिय रखना: मैग्नीशियम पौधे में शर्करा के परिवहन तंत्र (फ्लोएम) को स्वस्थ रखता है। यह पत्तियों में बनी शर्करा को फलों तक पहुंचाने में मदद करता हैं।
- ऊर्जा चयापचय: यह पौधे में ऊर्जा के चयापचय (एंजाईम सक्रियण) में सहाय्यक है, जो शर्करा को फलों में जमा करने के लिए आवश्यक है।
3. फल की गुणवत्ता (Quality) में सुधार
- फल का वजन और आकार: निरंतर संशोधन ये यह साबीत हुआ हैं कि मैग्नीशियम के प्रयोग से फल का वजन और आकार बढ़ सकता है। यह प्रकाश संश्लेषण और शर्करा परिवहन को बेहतर बनाकर अप्रत्यक्ष रूप से फल की वृद्धि में योगदान देता है।
- मिठास (TSS) और रस: पर्याप्त मैग्नीशियम मिलने से फल में घुलनशील ठोस पदार्थ (TSS – मिठास) और रस की मात्रा बढ़ती है, जिससे फल की गुणवत्ता और स्वाद बेहतर होता है।
4. फल टूटने (Fruit Cracking) से अप्रत्यक्ष सुरक्षा
- हालाकी कैल्शियम और बोरान इसके प्रत्यक्ष रक्षक हैं । मैग्नीशियम भी इस प्रक्रिया में अप्रत्यक्ष रूप से मदद करता है। यह पानी के संतुलन (ओस्मोटिक संतुलन) को बनाए रखता है। एक स्वस्थ पौधा, जिसमें मैग्नीशियम की कमी नहीं है, पानी और पोषकतत्वों के उतार-चढ़ाव को बेहतर तरीके से झेल सकता है, जिससे फल टूटने का खतरा कम होता है।
सूक्ष्मपोषकतत्वों (Micronutrients) की भूमिका,
80 वें दिन के आसपास सूक्ष्मपोषकतत्व फल के अंदरूनी विकास और गुणवत्ता को अंतिम रूप देने का काम करते हैं।
- बोरान (Boron): यह अब भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह शर्करा के परिवहन (ट्रांसलोकेशन) की प्रक्रिया को पूरा करता है। बोरान की कमी होने पर, भरपूर पोटाश होने के बावजूद, शर्करा पत्तियों में ही अटकी रह सकती है और फलों तक नहीं पहुँच पाती। यह बीज निर्माण और कोशिका भित्ति को मजबूती देने में भी मदद करता है ।
- जिंक (Zinc): यह फल के आकार और वजन को सीधे प्रभावित करता है। जिंक के प्रयोग से फल का वजन बढ़ता है और फल टूटने (cracking) की समस्या कम होती है । यह विकास हार्मोन (औक्सिन) के निर्माण के लिए आवश्यक है, जो कोशिका विस्तार को नियंत्रित करता है।
- कौपर (Copper): संशोधन बताता हैं कि फल के वजन (single fruit weight) के साथ कौपर का सकारात्मक संबंध (positive correlation) पाया गया है । यह पौधे के चयापचय में सहाय्यक भूमिका निभाता है।
- मैंगेनीज (Manganese) और आयरन (Iron): यह तत्व प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) को सुचारू रखते हैं, जिससे पौधा लगातार भोजन (शर्करा) बनाता रहता है। फल वृद्धि अवस्था (fruit enlargement stage) में इनकी मांग सबसे अधिक होती है
स्प्रे:
- मैग्नीशियम प्लस: 1 मिली प्रती लिटर पानी
- सिक्वेंशियल-2: 2 मिली प्रती लिटर पानी
जमीन से:
- ओ’नील : 4 किलो प्रती एकड (00:40:39+Fe+Mg)
- लिपमैन कोम्बी: 500 ग्राम प्रती एकड (Micronutrients)
(हर 15 दिन में एक बार इस्तेमाल करें )



