अनार में जब कलियाँ (बड्स) निकलने लगती हैं और फिर फूल (फ्लॉवर) खिलने लगते हैं, तो फास्फोरस (P), पोटैशियम (K) और जिंक (Zn) की भूमिका और भी खास हो जाती है। यह चरण पौधे के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह तय करता है कि कितने फूल आएंगे और उनमें से कितने फल में परिवर्तीत होंगे । यदि C:N अनुपात कम (याने नाईट्रोजन अधिक) होता है, तो पौधा वानस्पतिक वृद्धि (सिर्फ पत्ते और टहनियाँ) में ऊर्जा लगाता है, जिससे फूल कम आते हैं। फास्फोरस और पोटैशियम C:N अनुपात को नियंत्रित रखता है इससे C:N अनुपात अधिक (यानी कार्बन अधिक, नाइट्रोजन नियंत्रित) होता है, तो पौधा प्रजनन अवस्था (फूल और फल) में चला जाता है। इसलिए, फूल निकलने के समय C:N अनुपात को नियंत्रित (उच्च) रखना बेहद जरूरी है। अगर फुटाव ज्यादा है तो कैल्शियम नाईट्रेट (जिसमें नाइट्रोजन होता है) की जरूरत नहीं है, क्योंकि इससे C:N अनुपात बिगड़ सकता है और फूल कम हो सकते हैं।
- फास्फोरस (कोशिका विभाजन को बढ़ावा) : यह नई कलियों के निर्माण के लिए आवश्यक ऊर्जा (ATP) प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि जितनी कलियाँ निकली हैं, वे आगे विकसित हो सकें।
- पोटैशियम (K): यह पौधे द्वारा बनाए गए भोजन (शर्करा) को पत्तियों से कलियों तक पहुँचाने में मदद करता है, जिससे कलियाँ मजबूत बनती हैं। साथ ही, यह फूलों को गिरने से बचाने में भी मदद करता है। पोटैशियम C:N अनुपात को नियंत्रित रखता हैं।
- जिंक (Zn): यह औक्सिन (Auxin) हार्मोन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है। औक्सिन ही कलियों के समान रूप से और एक साथ फूटने को नियंत्रित करता है। जिंक की कमी से कलियाँ मर सकती हैं अथवा अविकसित रह सकती हैं ।
स्प्रे
- डीपी – 98 : 2 मिली प्रती लीटर पानी ( 6:37:17 N:P:K)
- किंगफोल जिंक 70: 0.5 मिली याने आधा मिली प्रती लीटर पानी
(साथ ही इसमें एमिनो ऐसिड भी मिला सकते हैं।)
जमीन से:
- हेनीग सोल्युशन / बेरी 48 : 4 किलो प्रती एकड़
(इस बीच कैल्शियम नाईट्रेट और बोरान देना फायदेमंद रहेगा लेकिन चौकी सही से निकली है और जादा फूटान है तो कैल्शियम नाईट्रेट की जरुरत नही हैं।)



